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Class 12th Chemistry Chapter-2 : वैद्युतरसायन (Electrochemistry)

🧪 रसायन विज्ञानअध्याय 02

2. वैद्युतरसायन (Electrochemistry)

पूर्ण हस्तलिखित एवं सरल बोर्ड नोट्स (Complete Chapter Notes)

👨‍🏫
Notes By Sunil Yadav
⚗️ चालकतत्व & कोलराऊश नियम ⚖️ नर्न्स्ट समीकरण & सेल विभव 🔬 फैराडे नियम & बैटरियाँ

टॉपिक 1: ऑक्सीकरण-अपचयन अभिक्रियाएं (Oxidation-Reduction / Redox Reactions)



📌 इलेक्ट्रॉनिक अवधारणा (Electronic Concept)

वैद्युत रसायन में ऑक्सीकरण और अपचयन की व्याख्या इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण (Transfer of Electrons) के आधार पर की जाती है:

1. ऑक्सीकरण (Oxidation): वह प्रक्रिया जिसमें कोई परमाणु, अणु या आयन इलेक्ट्रॉन त्यागता (Lose) है। इससे धन-आवेश बढ़ता है या ऋण-आवेश घटता है।
उदाहरण: Zn → Zn2+ + 2e-   |   Fe2+ → Fe3+ + e-
2. अपचयन (Reduction): वह प्रक्रिया जिसमें कोई परमाणु, अणु या आयन इलेक्ट्रॉन ग्रहण (Gain) करता है। इससे धन-आवेश घटता है या ऋण-आवेश बढ़ता है।
उदाहरण: Cu2+ + 2e- → Cu   |   Cl2 + 2e- → 2Cl-
रेडॉक्स अभिक्रिया (Redox Reaction): वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें ऑक्सीकरण और अपचयन की दोनों क्रियाएं एक साथ (Simultaneously) संपन्न होती हैं।

📊 ऑक्सीकरण एवं अपचयन में अंतर (Comparison Table)

आधार (Basis) ऑक्सीकरण (Oxidation) अपचयन (Reduction)
इलेक्ट्रॉन (e-) इलेक्ट्रॉन का त्याग (Loss) इलेक्ट्रॉन को ग्रहण (Gain)
ऑक्सीकरण संख्या वृद्धि होती है (Increases) कमी होती है (Decreases)
ऑक्सीजन का योग/ह्रास ऑक्सीजन का योग (+) ऑक्सीजन का निष्कासन (-)
हाइड्रोजन का योग/ह्रास हाइड्रोजन का निष्कासन (-) हाइड्रोजन का योग (+)
सेल का इलेक्ट्रोड एनोड (Anode) पर होता है कैथोड (Cathode) पर होता है

🧪 ऑक्सीकारक एवं अपचायक (Oxidizing & Reducing Agents)

1. ऑक्सीकारक (Oxidizing Agent / Oxidant)

• वह पदार्थ जो दूसरे का ऑक्सीकरण करता है तथा स्वयं अपचयित (Reduce) होता है।
• यह इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है।
उदाहरण: KMnO4, K2Cr2O7, Cl2, O2, Cu2+

2. अपचायक (Reducing Agent / Reductant)

• वह पदार्थ जो दूसरे का अपचयन करता है तथा स्वयं ऑक्सीकृत (Oxidize) होता है।
• यह इलेक्ट्रॉन त्यागता है।
उदाहरण: Zn, Na, H2, LiAlH4, FeSO4

रेडॉक्स अभिक्रिया विश्लेषण:
Zn (s) + Cu2+ (aq) → Zn2+ (aq) + Cu (s)
Zn: इलेक्ट्रॉन त्याग रहा है → ऑक्सीकरण (अपचायक का कार्य)
Cu2+: इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर रहा है → अपचयन (ऑक्सीकारक का कार्य)

🔢 ऑक्सीकरण संख्या (Oxidation Number / State)

किसी यौगिक में उपस्थित किसी तत्व का वह आवेश जो उस पर तब दिखाई देता है जब उसके साथ जुड़े अन्य सभी परमाणुओं को आयनों के रूप में पृथक कर दिया जाए।

ऑक्सीकरण संख्या ज्ञात करने के मुख्य नियम:
  • मुक्त अवस्था में: सभी तत्वों की ऑक्सीकरण संख्या 0 होती है (जैसे: O2, H2, Na, Cl2 = 0)।
  • क्षार धातुएँ (Li, Na, K): हमेशा +1 | क्षारीय मृदा धातुएँ (Mg, Ca): हमेशा +2
  • फ्लोरीन (F): हमेशा -1 होती है (सबसे अधिक विद्युत ऋणात्मक)।
  • हाइड्रोजन (H): सामान्यतः +1 (धातु हाइड्राइड जैसे NaH में -1)।
  • ऑक्सीजन (O): सामान्यतः -2 (पेरॉक्साइड जैसे H2O2 में -1, OF2 में +2)।

🔥 बोर्ड परीक्षा प्रश्न स्पेशल (Reasoning & Calculation Special)

  • प्रश्न 1: KMnO4 में Mn तथा K2Cr2O7 में Cr की ऑक्सीकरण संख्या ज्ञात कीजिए।
    उत्तर:
    • KMnO4: (+1) + x + 4(-2) = 0 ⇒ x - 7 = 0 ⇒ x = +7 (Mn)
    • K2Cr2O7: 2(+1) + 2x + 7(-2) = 0 ⇒ 2x - 12 = 0 ⇒ x = +6 (Cr)
  • प्रश्न 2: क्या कोई ऐसी अभिक्रिया संभव है जिसमें केवल ऑक्सीकरण या केवल अपचयन हो?
    उत्तर: नहीं। ऑक्सीकरण और अपचयन एक दूसरे के पूरक (Complementary) हैं। यदि एक पदार्थ इलेक्ट्रॉन त्यागेगा, तो दूसरा उसे ग्रहण करने के लिए अवश्य उपस्थित होगा।
  • प्रश्न 3: वैद्युत रासायनिक सेल में एनोड (Anode) पर कौन सी अभिक्रिया होती है?
    उत्तर: एनोड पर सदैव ऑक्सीकरण (Oxidation) अभिक्रिया होती है (इलेक्ट्रॉन का त्याग)।

टॉपिक 2: वैद्युत अपघटनी विलयनों का चालकत्व (Conductance of Electrolytic Solutions)

📌 मूलभूत परिभाषाएँ (Basic Definitions)

वैद्युत अपघट्य के विलयन में विद्युत धारा का प्रवाह स्वतंत्र आयनों (Free Ions) की गति के कारण होता है:

1. वैद्युत प्रतिरोध (Electrical Resistance, R): ओम के नियमानुसार, किसी चालक के सिरों का विभवांतर उसमें प्रवाहित धारा के समानुपाती होता है (V = I × R)।
मात्रक: ओम (Ω / Ohm)
2. चालकत्व (Conductance, G): प्रतिरोध के व्युत्क्रम (Reciprocal) को चालकत्व कहते हैं।
सूत्र: G = 1 / R   |   मात्रक: Ohm-1 (या mho / सीमेंस, S)

📐 विशिष्ट चालकता (κ) एवं सेल स्थिरांक (G*)

किसी चालक का प्रतिरोध (R) उसकी लंबाई (l) के समानुपाती तथा अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल (A) के व्युत्क्रमानुपाती होता है:

R = ρ × (l / A)   ⇒   ρ = R × (A / l)

• विशिष्ट चालकता / चालकता (Conductivity, κ - कप्पा): विशिष्ट प्रतिरोध (ρ) के व्युत्क्रम को विशिष्ट चालकता कहते हैं।

κ = 1 / ρ = (1 / R) × (l / A) = G × G*
मात्रक: Ohm-1 cm-1 या S cm-1 (SI मात्रक: S m-1)

• सेल स्थिरांक (Cell Constant, G*): इलेक्ट्रोडों के बीच की दूरी (l) तथा उनके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल (A) के अनुपात को सेल स्थिरांक कहते हैं।

G* = l / A = κ × R
मात्रक: cm-1 या m-1

🧪 मोलर चालकता (Λm) एवं तुल्यांकी चालकता (Λeq)

1. मोलर चालकता (Molar Conductivity, Λm)

1 मोल वैद्युत अपघट्य युक्त विलयन की चालकता को मोलर चालकता कहते हैं।

सूत्र: Λm = (κ × 1000) / M
(यहाँ M = मोलरता Molarity)
मात्रक: S cm2 mol-1

2. तुल्यांकी चालकता (Equivalent Conductivity, Λeq)

1 ग्राम तुल्यांक वैद्युत अपघट्य युक्त विलयन की चालकता को तुल्यांकी चालकता कहते हैं।

सूत्र: Λeq = (κ × 1000) / N
(यहाँ N = सामान्यता / नॉर्मलता Normality)
मात्रक: S cm2 eq-1

💡 तनुता (Dilution) तथा सांद्रता का चालकता पर प्रभाव

तनुता बढ़ाने पर (पानी मिलाने पर):
  • विशिष्ट चालकता (κ): घटती है (Decreases) - क्योंकि प्रति सेमी3 (1 cm3) आयतन में आयनों की संख्या कम हो जाती है।
  • मोलर चालकता (Λm) एवं तुल्यांकी चालकता (Λeq): बढ़ती है (Increases) - क्योंकि तनुता बढ़ाने पर आयनों के बीच की दूरी बढ़ती है और दुर्बल अपघट्य का वियोजन बढ़ता है।
  • सीमांत मोलर चालकता (Λ0m / Limiting Molar Conductivity): अनंत तनुता (Infinite Dilution) पर मोलर चालकता का मान अधिकतम हो जाता है।

🔥 बोर्ड परीक्षा प्रश्न एवं आंकिक हल (Numerical Special)

  • प्रश्न 1: तनुता बढ़ाने पर विशिष्ट चालकता घटती है जबकि मोलर चालकता क्यों बढ़ती है?
    उत्तर: तनुता बढ़ाने पर प्रति इकाई आयतन में आयनों की संख्या घटती है, जिससे विशिष्ट चालकता (κ) घटती है। परंतु कुल आयतन बढ़ने तथा आयनों की गतिशीलता बढ़ने के कारण मोलर चालकता (Λm = κ × V) बढ़ती है।
  • प्रश्न 2 (आंकिक): 0.05 M KCl विलयन के कॉलम का प्रतिरोध 200 Ω है। यदि सेल स्थिरांक 0.5 cm-1 हो तो मोलर चालकता (Λm) ज्ञात कीजिए।
    हल:
    • विशिष्ट चालकता κ = G* / R = 0.5 / 200 = 0.0025 S cm-1
    • मोलर चालकता Λm = (κ × 1000) / M = (0.0025 × 1000) / 0.05 = 50 S cm2 mol-1

टॉपिक 3: सांद्रता के साथ चालकत्व में परिवर्तन एवं कोलराउश का नियम (Variation of Conductance & Kohlrausch's Law)

📌 सांद्रता का मोलर चालकता (Λm) पर प्रभाव

सांद्रता घटाने (या तनुता बढ़ाने) पर विलयन की मोलर चालकता (Λm) बढ़ती है। परंतु प्रबल एवं दुर्बल वैद्युत अपघट्यों के लिए यह परिवर्तन भिन्न-भिन्न होता है:

1. प्रबल वैद्युत अपघट्य (Strong Electrolytes - जैसे KCl, NaCl, HCl):

ये सभी सांद्रताओं पर पूर्णतः आयनित रहते हैं। तनुता बढ़ाने पर अंतर-आयनिक आकर्षण (Inter-ionic attraction) कम होता है, जिससे मोलर चालकता में धीमी एवं रेखीय (Linear) वृद्धि होती है।

डिबाई-हुकेल-ऑन्सैगर समीकरण (Debye-Hückel-Onsager Equation):
Λm = Λ0m - A √c
(यहाँ Λ0m = सीमांत मोलर चालकता, A = स्थिरांक, c = सांद्रता)
2. दुर्बल वैद्युत अपघट्य (Weak Electrolytes - जैसे CH3COOH, NH4OH):

ये कम सांद्रता पर भी आंशिक रूप से आयनित होते हैं। उच्च सांद्रता पर इनकी मोलर चालकता बहुत कम होती है, लेकिन अनंत तनुता (c → 0) के पास वियोजन की मात्रा (Degree of Dissociation) तेज़ी से बढ़ने के कारण Λm में तीव्र वृद्धि होती है।

नोट: दुर्बल वैद्युत अपघट्यों की सीमांत मोलर चालकता (Λ0m) आलेखीय विधि (Graph) द्वारा सीधे प्राप्त नहीं की जा सकती। इसके लिए कोलराउश के नियम का उपयोग किया जाता है।

📏 कोलराउश का नियम (Kohlrausch's Law of Independent Migration of Ions)

नियम की परिभाषा: अनंत तनुता पर (जब वियोजन पूर्ण हो जाता है), किसी वैद्युत अपघट्य की सीमांत मोलर चालकता (Λ0m) उसके सभी धनायनों और ऋणायनों की सीमांत आयनिक चालकताओं (Ionic Conductivities) के योग के बराबर होती है।
गणितीय रूप:
Λ0m = ν+ λ0+ + ν- λ0-
λ0+, λ0-: धनायन एवं ऋणायन की सीमांत आयनिक चालकताएँ
ν+, ν-: प्रति सूत्र इकाई में धनायनों एवं ऋणायनों की संख्या
उदाहरण:
  • NaCl: Λ0m(NaCl) = λ0(Na+) + λ0(Cl-)
  • MgCl2: Λ0m(MgCl2) = λ0(Mg2+) + 2 λ0(Cl-)
  • Al2(SO4)3: Λ0m = 2 λ0(Al3+) + 3 λ0(SO42-)

🛠️ कोलराउश के नियम के मुख्य अनुप्रयोग (Applications)

1. दुर्बल वैद्युत अपघट्य की Λ0m की गणना

प्रबल वैद्युत अपघट्यों के मानों को जोड़कर/घटाकर दुर्बल अपघट्य का मान प्राप्त किया जाता है:
Λ0m(CH3COOH) = Λ0m(CH3COONa) + Λ0m(HCl) - Λ0m(NaCl)

2. वियोजन की मात्रा (α) एवं स्थिरांक (Kc)

वियोजन की मात्रा (Degree of Dissociation):
α = Λm / Λ0m

वियोजन स्थिरांक (Dissociation Constant):
Kc = (c × α2) / (1 - α)

🔥 बोर्ड परीक्षा प्रश्न एवं आंकिक प्रश्न (Numerical Special)

  • प्रश्न 1: कोलराउश का नियम लिखिए। दुर्बल वैद्युत अपघट्य के लिए इसका एक अनुप्रयोग समझाइए।
    उत्तर: इस नियम के अनुसार अनंत तनुता पर किसी वैद्युत अपघट्य की मोलर चालकता उसके धनायनों और ऋणायनों की सीमांत आयनिक चालकताओं के योग के बराबर होती है। अनुप्रयोग: CH3COOH जैसी दुर्बल अम्ल की सीमांत मोलर चालकता की गणना प्रबल लवणों (CH3COONa, HCl, NaCl) के मानों से की जाती है।
  • प्रश्न 2 (आंकिक): यदि NaCl, HCl एवं CH3COONa की सीमांत मोलर चालकताएँ (Λ0m) क्रमशः 126.4, 425.9 तथा 91.0 S cm2 mol-1 हों, तो CH3COOH की सीमांत मोलर चालकता ज्ञात कीजिए।
    हल:
    • Λ0m(CH3COOH) = Λ0m(CH3COONa) + Λ0m(HCl) - Λ0m(NaCl)
    • = 91.0 + 425.9 - 126.4
    • = 516.9 - 126.4 = 390.5 S cm2 mol-1

टॉपिक 4: वैद्युत अपघटन तथा फैराडे के नियम (Electrolysis & Faraday's Laws)

📌 वैद्युत अपघटन (Electrolysis) की अवधारणा

वह प्रक्रिया जिसमें किसी वैद्युत अपघट्य के गलित (Molten) या जलीय विलयन में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर रासायनिक विघटन (Chemical Decomposition) होता है, वैद्युत अपघटन कहलाती है।

1. एनोड (Anode - धनावेशित इलेक्ट्रोड):
इस पर ऋणात्मक आयन (Anions) आकर्षित होते हैं तथा इलेक्ट्रॉनों का त्याग करके ऑक्सीकृत (Oxidized) होते हैं।
2. कैथोड (Cathode - ऋणावेशित इलेक्ट्रोड):
इस पर धनात्मक आयन (Cations) आकर्षित होते हैं तथा इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके अपचयित (Reduced) होते हैं।
उदाहरण (गलित NaCl का वैद्युत अपघटन):
कैथोड पर (अपचयन): Na+ + e- → Na (s)
एनोड पर (ऑक्सीकरण): 2Cl- → Cl2 (g) + 2e-

📐 फैराडे का प्रथम नियम (Faraday's First Law of Electrolysis)

नियम की परिभाषा: वैद्युत अपघटन की क्रिया में किसी इलेक्ट्रोड पर मुक्त (या निक्षेपित) पदार्थ की मात्रा (m), उसमें प्रवाहित वैद्युत आवेश (Q) के समानुपाती होती है।
गणितीय रूप:
m ∝ Q   ⇒   m = Z × Q = Z × I × t
m: निक्षेपित पदार्थ का द्रव्यमान (ग्राम में)
Q: आवेश (कूलाम में, Q = I × t)
I: धारा (ऐम्पियर में), t: समय (सेकंड में)
Z: पदार्थ का विद्युत रासायनिक तुल्यांक (Electrochemical Equivalent - g/C)
विद्युत रासायनिक तुल्यांक (Z): यदि Q = 1 कूलाम (I = 1A, t = 1s) हो, तो m = Z होगा। अर्थात् 1 कूलाम आवेश प्रवाहित करने पर इलेक्ट्रोड पर निक्षेपित पदार्थ की मात्रा को उसका विद्युत रासायनिक तुल्यांक (Z) कहते हैं।

⚖️ फैराडे का द्वितीय नियम (Faraday's Second Law of Electrolysis)

नियम की परिभाषा: जब श्रेणीक्रम में जुड़े विभिन्न वैद्युत अपघट्यों के विलयनों में समान वैद्युत आवेश (Q) प्रवाहित किया जाता है, तो इलेक्ट्रोडों पर मुक्त होने वाले पदार्थों की मात्राएँ (m1, m2) उनके रासायनिक तुल्यांकी भारों (E1, E2) के समानुपाती होती हैं।
गणितीय रूप:
m1 / m2 = E1 / E2
तथा E = Z × F   ⇒   Z = E / 96500
F (फैराडे नियतांक - Faraday Constant): 1 मोल इलेक्ट्रॉनों पर आवेश = 96,500 C/mol (लगभग)

🔥 बोर्ड परीक्षा प्रश्न एवं आंकिक प्रश्न (Numerical Special)

  • प्रश्न 1: 1 फैराडे (1 F) आवेश का मान कितना होता है और यह किस आधार पर निकाला जाता है?
    उत्तर: 1 F = 96,487 C ≈ 96,500 C/mol। यह 1 मोल इलेक्ट्रॉनों के कुल आवेश के बराबर होता है (6.022 × 1023 × 1.602 × 10-19 C)।
  • प्रश्न 2 (आंकिक): CuSO4 के विलयन में 1.5 ऐम्पियर की धारा को 10 मिनट तक प्रवाहित किया गया। कैथोड पर निक्षेपित कॉपर (Cu) का द्रव्यमान ज्ञात कीजिए। (Cu का परमाणु भार = 63.5 g/mol)
    हल:
    • धारा I = 1.5 A, समय t = 10 × 60 = 600 s
    • कुल आवेश Q = I × t = 1.5 × 600 = 900 C
    • Cu2+ + 2e- → Cu (2 मोल e- या 2 × 96500 C आवेश से 63.5 g Cu निक्षेपित होता है)
    • निक्षेपित Cu का द्रव्यमान m = (63.5 × 900) / (2 × 96500) = 0.296 ग्राम

टॉपिक 5: विद्युत रासायनिक सेल एवं गैल्वैनी सेल (Electrochemical & Galvanic Cells)

📌 गैल्वैनी / वोल्टीय सेल (Galvanic / Voltaic Cell)

वह युक्ति जो स्वतः रेडॉक्स अभिक्रिया (Spontaneous Redox Reaction) की रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करती है, विद्युत रासायनिक सेल या गैल्वैनी सेल कहलाती है (उदाहरण: डेनियल सेल - Daniell Cell)।

1. एनोड (Anode - ऋणात्मक इलेक्ट्रोड):
• इस पर ऑक्सीकरण (Oxidation) होता है।
• Zn इलेक्ट्रोड: Zn (s) → Zn2+ (aq) + 2e-
2. कैथोड (Cathode - धनात्मक इलेक्ट्रोड):
• इस पर अपचयन (Reduction) होता है।
• Cu इलेक्ट्रोड: Cu2+ (aq) + 2e- → Cu (s)
💡 याद रखने का ट्रिकी नियम (L-O-A-N Rule):
Left side | Oxidation | Anode | Negative charge
(अर्थात् बाईं ओर एनोड होगा, जिस पर ऑक्सीकरण होगा और वह ऋणात्मक आवेशित होगा।)

🌉 लवण सेतु (Salt Bridge) एवं इसके कार्य

लवण सेतु U-आकार की एक काँच की नली होती है जिसमें अक्रिय वैद्युत अपघट्य (जैसे KCl, KNO3 या NH4NO3) का एगर-एगर (Agar-Agar) जेल में जमा हुआ विलयन भरा होता है।

लवण सेतु के मुख्य कार्य:
  • दोनों अर्ध-सेलों के परिपथ को आंतरिक रूप से पूरा करता है।
  • दोनों हाफ-सेल विलयनों की विद्युत उदासीनता (Electrical Neutrality) को बनाए रखता है।
  • दोनों विलयनों को आपस में मिलने से रोकता है तथा द्रवित संधि विभव (Liquid Junction Potential) को उत्पन्न नहीं होने देता।

📐 सेल निरूपण (Cell Representation)

किसी विद्युत रासायनिक सेल को संक्षेप में प्रदर्शित करने के नियम:

डेनियल सेल का निरूपण:
Zn (s) | Zn2+ (aq, C1) || Cu2+ (aq, C2) | Cu (s)
एकल ऊर्ध्वाधर रेखा (|): धातु और उसकी आयनिक प्रावस्था (Phase boundary) को अलग करती है।
दोहरी ऊर्ध्वाधर रेखा (||): लवण सेतु (Salt Bridge) को प्रदर्शित करती है।
बाईं ओर (Left): एनोड | दाईं ओर (Right): कैथोड लिखा जाता है।

🔥 बोर्ड परीक्षा प्रश्न स्पेशल (Reasoning Special)

  • प्रश्न 1: यदि किसी डेनियल सेल पर बाह्य विपरीत विभव Eext लागू किया जाए, तो क्या होगा?
    उत्तर:
    यदि Eext < 1.10 V: सेल सामान्य रूप से कार्य करेगा (इलेक्ट्रॉन Zn से Cu की ओर प्रवाहित होंगे)।
    यदि Eext = 1.10 V: धारा का प्रवाह रुक जाएगा (सेल साम्यावस्था में आ जाएगा, अभिक्रिया बंद हो जाएगी)।
    यदि Eext > 1.10 V: अभिक्रिया की दिशा उल्टी हो जाएगी और सेल वैद्युत अपघटनी सेल (Electrolytic Cell) की भांति कार्य करने लगेगा।
  • प्रश्न 2: क्या लवण सेतु में KCl के स्थान पर किसी भी वैद्युत अपघट्य का प्रयोग किया जा सकता है?
    उत्तर: नहीं, केवल ऐसे अक्रिय वैद्युत अपघट्य का प्रयोग करते हैं जिसमें K+ और Cl- आयनों की गतिशीलता (Ionic Mobility) लगभग बराबर हो और वे सेल के विलयन से कोई रासायनिक क्रिया न करें।

टॉपिक 6: इलेक्ट्रोड विभव, मानक इलेक्ट्रोड विभव एवं सेल का EMF (Electrode Potential & EMF of Cell)

📌 इलेक्ट्रोड विभव एवं मानक इलेक्ट्रोड विभव (E°)

जब किसी धातु की छड़ को उसके अपने आयनों युक्त विलयन में डुबाया जाता है, तो धातु की छड़ और विलयन के संधि तल (Interface) पर एक विभवांतर उत्पन्न हो जाता है, जिसे इलेक्ट्रोड विभव (Electrode Potential) कहते हैं।

1. ऑक्सीकरण विभव (Oxidation Potential):
धातु द्वारा इलेक्ट्रॉन त्यागने (ऑक्सीकृत होने) की प्रवृत्ति।
M (s) → Mn+ (aq) + ne-
2. अपचयन विभव (Reduction Potential):
धातु आयन द्वारा इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति। IUPAC के अनुसार मानक अपचयन विभव को ही मानक इलेक्ट्रोड विभव माना जाता है।
Mn+ (aq) + ne- → M (s)
मानक इलेक्ट्रोड विभव (Standard Electrode Potential, E°):
जब ताप 298 K (25°C), दाब 1 bar / 1 atm तथा विलयन की सांद्रता 1 M (1 मोलर) हो, तब मापे गए इलेक्ट्रोड विभव को मानक इलेक्ट्रोड विभव (E°) कहते हैं।

🧪 मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड (Standard Hydrogen Electrode - SHE)

किसी एकल इलेक्ट्रोड का निरपेक्ष (Absolute) विभव ज्ञात करना संभव नहीं है। इसलिए किसी अन्य इलेक्ट्रोड का विभव ज्ञात करने के लिए मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड (SHE) को संदर्भ इलेक्ट्रोड (Reference Electrode) के रूप में प्रयोग किया जाता है।

मुख्य बिंदु एवं लक्षण:
  • इसमें प्लैटिनम ब्लैक से लेपित प्लैटिनम इलेक्ट्रोड होता है, जो 1 M H+ (HCl) विलयन में डूबा रहता है।
  • 298 K ताप तथा 1 bar दाब पर शुद्ध H2 गैस प्रवाहित की जाती है।
  • मानक मान: SHE का मानक इलेक्ट्रोड विभव स्वेच्छा से 0.00 V (शून्य) माना गया है।
  • अभिक्रिया: H+ (aq) + e- ⇌ ½ H2 (g)   (E° = 0.00 V)

⚡ विद्युत रासायनिक श्रेणी (Electrochemical Series) एवं सेल का EMF

विद्युत रासायनिक श्रेणी: विभिन्न तत्वों को उनके मानक अपचयन विभव (E°) के बढ़ते (या घटते) क्रम में व्यवस्थित करने पर जो श्रेणी प्राप्त होती है, उसे विद्युत रासायनिक श्रेणी कहते हैं।
  • ऋणात्मक E° वाली धातुएँ (जैसे Li, K, Zn): प्रबल अपचायक (Reducing agent) होती हैं और अम्लों से H2 गैस विस्थापित करती हैं।
  • धनात्मक E° वाली धातुएँ (जैसे Cu, Ag, Au): दुर्बल अपचायक / प्रबल ऑक्सीकारक होती हैं।
सेल का मानक विद्युत वाहक बल (EMF - E°cell):
cell = E°cathode - E°anode   (या E°right - E°left)
• यदि cell > 0 (धनात्मक) है, तो रेडॉक्स अभिक्रिया स्वतः (Spontaneous) होगी तथा सेल कार्य करेगा।

🔥 बोर्ड परीक्षा प्रश्न एवं आंकिक हल (Numerical Special)

  • प्रश्न 1: क्या कॉपर (Cu) तनु HCl अम्ल से हाइड्रोजन गैस को विस्थापित कर सकता है? कारण स्पष्ट कीजिए।
    उत्तर: नहीं, क्योंकि कॉपर का मानक अपचयन विभव (E°Cu2+/Cu = +0.34 V) हाइड्रोजन (0.00 V) से अधिक (धनात्मक) है। इसलिए कॉपर हाइड्रोजन आयन को अपचयित नहीं कर सकता।
  • प्रश्न 2 (आंकिक): निम्नलिखित सेल के लिए मानक EMF (E°cell) की गणना कीजिए:
    Zn (s) | Zn2+ (aq) || Ag+ (aq) | Ag (s)
    दिया है: E°Zn2+/Zn = -0.76 V तथा E°Ag+/Ag = +0.80 V
    हल:
    • यहाँ कैथोड (Right) = Ag एवं एनोड (Left) = Zn
    • E°cell = E°cathode - E°anode
    • = E°Ag+/Ag - E°Zn2+/Zn
    • = +0.80 - (-0.76) = 0.80 + 0.76 = +1.56 V

टॉपिक 7: नर्न्स्ट समीकरण एवं गिब्स मुक्त ऊर्जा में संबंध (Nernst Equation & Gibbs Free Energy)

📌 नर्न्स्ट समीकरण (Nernst Equation)

किसी गैर-मानक अवस्था (भिन्न सांद्रता या ताप) पर इलेक्ट्रोड विभव या सेल EMF की गणना करने के लिए नर्न्स्ट समीकरण का उपयोग किया जाता है।

1. एकल इलेक्ट्रोड के लिए (For Single Electrode):
अभिक्रिया: Mn+ (aq) + ne- → M (s)
E = E0 - (0.0591 / n) log10 [1 / [Mn+]]   (298 K ताप पर)
2. संपूर्ण सेल के लिए (For Whole Cell):
सामान्य सेल अभिक्रिया: aA + bB ⇌ cC + dD के लिए:
Ecell = E0cell - (0.0591 / n) log10 [ [C]c [D]d / [A]a [B]b ]
डेनियल सेल हेतु: Ecell = E0cell - (0.0591 / 2) log10 [ [Zn2+] / [Cu2+] ]

⚖️ नर्न्स्ट समीकरण एवं साम्य स्थिरांक (Equilibrium Constant, Kc)

साम्यावस्था (Equilibrium) पर सेल द्वारा कोई धारा प्रवाहित नहीं होती, अर्थात् Ecell = 0 हो जाता है।

साम्य स्थिरांक समीकरण (298 K पर):
E0cell = (0.0591 / n) log10 Kc
⇒ log10 Kc = (n × E0cell) / 0.0591

🔥 गिब्स मुक्त ऊर्जा (Gibbs Free Energy, ΔG) एवं सेल EMF

सेल द्वारा किया गया अधिकतम वैद्युत कार्य (Electrical Work) उसकी गिब्स मुक्त ऊर्जा में कमी (-ΔG) के बराबर होता है।

मुख्य सूत्र:
ΔG = -n F Ecell   &   ΔG0 = -n F E0cell
ΔG0: मानक गिब्स मुक्त ऊर्जा परिवर्तन (J/mol या kJ/mol)
n: स्थानांतरण में भाग लेने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या
F: फैराडे नियतांक (96500 C/mol)
स्वतः प्रवर्तिता (Spontaneity) की शर्त:
• यदि E0cell धनात्मक (+) है, तो ΔG0 ऋणात्मक (-) होगा और सेल अभिक्रिया स्वतः (Spontaneous) होगी।

🔥 बोर्ड परीक्षा प्रश्न एवं आंकिक प्रश्न (Numerical Special)

  • प्रश्न 1 (आंकिक): 298 K पर निम्नलिखित सेल का EMF ज्ञात कीजिए:
    Zn (s) | Zn2+ (0.1 M) || Cu2+ (0.01 M) | Cu (s)
    दिया है: E0cell = 1.10 V
    हल:
    • n = 2 (Zn → Zn2+ + 2e-)
    • Ecell = E0cell - (0.0591 / 2) log10 [ [Zn2+] / [Cu2+] ]
    • Ecell = 1.10 - 0.02955 × log10 (0.1 / 0.01) = 1.10 - 0.02955 × log10(10)
    • Ecell = 1.10 - 0.02955 × 1 = 1.0704 V
  • प्रश्न 2 (आंकिक): किसी सेल अभिक्रिया के लिए यदि E0cell = 1.10 V तथा n = 2 हो, तो मानक गिब्स मुक्त ऊर्जा (ΔG0) की गणना कीजिए।
    हल:
    • ΔG0 = -n F E0cell
    • ΔG0 = -2 × 96500 C × 1.10 V = -212,300 J/mol = -212.3 kJ/mol

टॉपिक 8: व्यावसायिक सेल, बैटरियाँ, ईंधन सेल तथा संक्षारण (Commercial Cells, Fuel Cells & Corrosion)

📌 प्राथमिक एवं द्वितीयक सेल (Primary & Secondary Cells)

1. प्राथमिक सेल (Primary Cell):
• ये वे सेल हैं जिनमें इलेक्ट्रोड अभिक्रिया केवल एक बार होती है और इन्हें पुनः आवेशित (Recharge) नहीं किया जा सकता
उदाहरण: शुष्क सेल (Dry Cell / Leclanché Cell), मरकरी सेल (Mercury Cell - घड़ियों में)।
2. द्वितीयक सेल (Secondary Cell):
• इन्हें बाह्य स्रोत से विद्युत धारा प्रवाहित करके पुनः आवेशित (Recharge) किया जा सकता है
उदाहरण: लेड संचायक सेल (Lead Storage Battery), निकेल-कैडमियम (Ni-Cd) सेल।
🔋 लेड संचायक सेल (Lead Storage Battery) की अभिक्रियाएँ (Discharging):
एनोड (Anode): Pb (s) + SO42- (aq) → PbSO4 (s) + 2e-
कैथोड (Cathode): PbO2 (s) + SO42- (aq) + 4H+ + 2e- → PbSO4 (s) + 2H2O (l)
संपूर्ण अभिक्रिया: Pb (s) + PbO2 (s) + 2H2SO4 (aq) → 2PbSO4 (s) + 2H2O (l)

🚀 ईंधन सेल (Fuel Cells - H2-O2 Cell)

वे गैल्वैनी सेल जो ईंधन (जैसे H2, CH4, CH3OH) के दहन की रासायनिक ऊर्जा को सीधे विद्युत ऊर्जा में बदलते हैं, ईंधन सेल कहलाते हैं।

H2-O2 ईंधन सेल की इलेक्ट्रोड अभिक्रियाएँ:
एनोड पर: 2H2 (g) + 4OH- (aq) → 4H2O (l) + 4e-
कैथोड पर: O2 (g) + 2H2O (l) + 4e- → 4OH- (aq)
कुल अभिक्रिया: 2H2 (g) + O2 (g) → 2H2O (l)
मुख्य लाभ: उच्च दक्षता (लगभग 70%), प्रदूषण रहित (Pollution Free), तथा इसके जलवाष्प का उपयोग अपोलो अंतरिक्ष कार्यक्रम (Apollo Space Programme) में पीने के पानी के रूप में किया गया था।

🛡️ संक्षारण (Corrosion) एवं बचाव के उपाय

वायुमंडल की नमी तथा गैसों (O2, CO2 आदि) की उपस्थिति के कारण धातु की सतह का धीरे-धीरे नष्ट होना संक्षारण कहलाता है। (उदा. लोहे पर जंग लगना)।

लोहे पर जंग लगने की वैद्युतरासायनिक क्रियाविधि:
एनोड (Fe का ऑक्सीकरण): Fe (s) → Fe2+ (aq) + 2e-
कैथोड (H+ की उपस्थिति में O2 का अपचयन): O2 (g) + 4H+ (aq) + 4e- → 2H2O (l)
जंग (Rust) का सूत्र: Fe2O3 · xH2O (जलयोजित फेरिक ऑक्साइड)
संक्षारण रोकने के उपाय:
1. गैल्वनीकरण (Galvanization): लोहे की सतह पर जस्ता (Zn) की परत चढ़ाना।
2. बलिदानी रक्षण (Sacrificial Protection): लोहे को Mg या Zn जैसी अधिक सक्रिय धातु से जोड़ना।
3. जंग रोधी पेंट, ग्रीस या बिस्फिनोल (Bisphenol) का लेप करना।

🔥 बोर्ड परीक्षा प्रश्न स्पेशल (Reasoning Special)

  • प्रश्न 1: लेड संचायक सेल को डिस्चार्ज करने पर H2SO4 के घनत्व (Density) पर क्या प्रभाव पड़ता है?
    उत्तर: डिस्चार्जिंग के समय H2SO4 का उपभोग होता है तथा जल (H2O) का निर्माण होता है, जिससे H2SO4 का घनत्व घट जाता है (1.30 g/cm3 से घटकर लगभग 1.20 g/cm3 हो जाता है)।
  • प्रश्न 2: H2-O2 ईंधन सेल को सामान्य तापीय पावर प्लांटों से श्रेष्ठ क्यों माना जाता है?
    उत्तर: क्योंकि इसकी दक्षता (Efficiency ~70%) तापीय संयंत्रों (34-40%) से लगभग दोगुनी होती है और यह पूरी तरह प्रदूषण रहित (Pollution Free) होता है।

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