📌 1. विलयन का परिचय एवं प्रकार (Introduction & Types of Solutions)
🔹 (A) विलयन की परिभाषा (Definition of Solution)
दो या दो से अधिक रासायनिक रूप से अक्रिय पदार्थों के समांगी मिश्रण (Homogeneous Mixture) को विलयन (Solution) कहते हैं।
🧪 (B) विलयन के घटक (Components of Solution)
किसी द्विअंगी (Binary) विलयन में मुख्य रूप से दो घटक होते हैं:
- 1. विलेय (Solute): विलयन में जो घटक कम मात्रा में उपस्थित होता है या जो घुलता है, उसे विलेय कहते हैं। उदाहरण: चीनी, नमक
- 2. विलायक (Solvent): विलयन में जो घटक अधिक मात्रा में उपस्थित होता है या जो घोलता है, उसे विलायक कहते हैं। उदाहरण: जल, एथेनॉल
📊 (C) भौतिक अवस्था के आधार पर विलयन के 9 प्रकार
विलेय तथा विलायक की भौतिक अवस्था (ठोस, द्रव, गैस) के आधार पर विलयन कुल 9 प्रकार के होते हैं:
| क्रम | विलयन का प्रकार | विलेय (Solute) | विलायक (Solvent) | महत्वपूर्ण उदाहरण |
|---|---|---|---|---|
| 1 | गैसीय विलयन | गैस | गैस | वायु (O₂ और N₂ का मिश्रण) |
| 2 | गैसीय विलयन | द्रव | गैस | क्लोरोफॉर्म का N₂ गैस में मिश्रण / नमी (वायु में जल) |
| 3 | गैसीय विलयन | ठोस | गैस | कपूर का N₂ गैस में विलयन / धुआँ |
| 4 | द्रव विलयन | गैस | द्रव | जल में घुली हुई ऑक्सीजन / सोडा वॉटर (CO₂ + जल) |
| 5 | द्रव विलयन | द्रव | द्रव | जल में एथेनॉल (ऐल्कोहॉल) का मिश्रण |
| 6 | द्रव विलयन | ठोस | द्रव | जल में ग्लूकोज, नमक या चीनी का घोल |
| 7 | ठोस विलयन | गैस | ठोस | पैलेडियम (Pd) धातु में हाइड्रोजन (H₂) गैस |
| 8 | ठोस विलयन | द्रव | ठोस | सोडियम के साथ पारे का अमलगम (Hg + Na) |
| 9 | ठोस विलयन | ठोस | ठोस | मिश्र धातुएँ (जैसे: तांबे का सोने में विलयन, पीतल) |
📌 2. विलयन की सांद्रता व्यक्त करने की विधियाँ (Concentration Units)
विलयन के निश्चित आयतन या द्रव्यमान में उपस्थित विलेय की मात्रा को विलयन की सांद्रता (Concentration) कहते हैं। इसे व्यक्त करने की प्रमुख विधियाँ निम्नलिखित हैं:
(i) द्रव्यमान प्रतिशत (Mass Percentage - % w/w)
100 ग्राम विलयन में उपस्थित विलेय पदार्थ का ग्राम में द्रव्यमान, उसका द्रव्यमान प्रतिशत कहलाता है।
(ii) आयतन प्रतिशत (Volume Percentage - % v/v)
100 mL विलयन में उपस्थित विलेय का mL में आयतन, उसका आयतन प्रतिशत कहलाता है।
(iii) द्रव्यमान-आयतन प्रतिशत (% w/v)
100 mL विलयन में उपस्थित विलेय पदार्थ का ग्राम में द्रव्यमान, द्रव्यमान-आयतन प्रतिशत कहलाता है।
(iv) पार्ट्स प्रति मिलियन (Parts Per Million - ppm)
जब विलेय की मात्रा बहुत सूक्ष्म (अल्प) होती है (जैसे जल में प्रदूषण या कठोरता), तब सांद्रता को ppm में व्यक्त करते हैं।
🧪 (v) मोलरता (Molarity - M) [बोर्ड परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण]
1 लीटर (1000 mL) विलयन में घुले हुए विलेय के मोलों की संख्या को विलयन की मोलरता (M) कहते हैं।
- WB: विलेय का भार (g में)
- MB: विलेय का अणुभार (Molar Mass)
- VmL: विलयन का आयतन (mL में)
- मात्रक: मोल/लीटर (mol/L) या Molar (M)
- ताप का प्रभाव: ताप बढ़ाने पर आयतन प्रसार होता है (आयतन बढ़ता है), जिससे मोलरता घटती है (अर्थात् मोलरता ताप पर निर्भर करती है)।
🧪 (vi) मोललता (Molality - m) [बोर्ड परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण]
1 किलोग्राम (1000 g) विलायक में घुले हुए विलेय के मोलों की संख्या को मोललता (m) कहते हैं।
- WA: विलायक का भार (g में)
- मात्रक: मोल/किग्रा (mol/kg) या m
- ताप का प्रभाव: क्योंकि द्रव्यमान ताप से परिवर्तित नहीं होता, अतः मोललता ताप से पूरी तरह स्वतंत्र होती है।
📊 (vii) मोल-अंश या मोल प्रभाज (Mole Fraction - x)
विलयन में किसी घटक के मोलों की संख्या और विलयन में उपस्थित सभी घटकों के कुल मोलों की संख्या के अनुपात को मोल-अंश कहते हैं।
यदि विलेय के मोल nB तथा विलायक के मोल nA हों:
- विलेय का मोल-अंश (xB) = nB / (nA + nB)
- विलायक का मोल-अंश (xA) = nA / (nA + nB)
- महत्वपूर्ण नोट: सभी घटकों के मोल-अंश का योग हमेशा 1 होता है (xA + xB = 1)।
- मात्रक: यह एक मात्रकहीन (Unitless) राशि है और ताप पर निर्भर नहीं करती।
⚖️ मोलरता (M) तथा मोललता (m) में तुलना व अंतर
| अंतर का आधार | मोलरता (Molarity - M) | मोललता (Molality - m) |
|---|---|---|
| परिभाषा | 1 लीटर विलयन में घुले विलेय के मोलों की संख्या। | 1 किग्रा विलायक में घुले विलेय के मोलों की संख्या। |
| आधारित राशि | विलयन के आयतन पर। | विलायक के द्रव्यमान पर। |
| मात्रक | मोल/लीटर (mol/L) | मोल/किग्रा (mol/kg) |
| ताप का प्रभाव | ताप बदलने पर परिवर्तित होती है। | ताप से अपरिवर्तित रहती है। |
| श्रेष्ठता | कम उपयुक्त इकाई है। | सांद्रता मापने की अधिक उपयुक्त और श्रेष्ठ इकाई है। |
📌 3. विलेयता एवं हेनरी का नियम (Solubility & Henry's Law)
🔹 (A) विलेयता (Solubility) की परिभाषा
किसी निश्चित ताप पर, 100 ग्राम विलायक को संतृप्त (Saturated) करने के लिए आवश्यक विलेय पदार्थ की ग्राम में अधिकतम मात्रा को उसकी विलेयता (Solubility) कहते हैं।
🧪 (B) ठोसों की द्रवों में विलेयता (Solubility of Solids in Liquids)
सामान्यतः "समान, समान को घोलता है" (Like dissolves like) के नियमानुसार ध्रुवीय विलेय (जैसे NaCl) ध्रुवीय विलायक (जैसे जल) में घुलते हैं।
🔥 ताप का प्रभाव (Effect of Temperature):
- ऊष्माशोषी प्रक्रम (Endothermic, ΔH > 0): ताप बढ़ाने पर विलेयता बढ़ती है (जैसे KNO₃, NaCl)।
- ऊष्माक्षेपी प्रक्रम (Exothermic, ΔH < 0): ताप बढ़ाने पर विलेयता घटती है (जैसे Ce₂(SO₄)₃)।
⚙️ दाब का प्रभाव (Effect of Pressure):
ठोस एवं द्रव अत्यधिक असंपीड्य (Incompressible) होते हैं, अतः इन पर दाब का कोई उल्लेखनीय प्रभाव नहीं पड़ता।
💨 (C) गैसों की द्रवों में विलेयता (Solubility of Gases in Liquids)
गैसें द्रवों में खुलकर विलयन बनाती हैं (जैसे जल में O₂ एवं CO₂ गैस का घुलना)।
- ताप का प्रभाव: गैसों का द्रव में घुलना एक ऊष्माक्षेपी प्रक्रम (Exothermic Process) है, इसलिए **ताप बढ़ाने पर गैसों की विलेयता घटती है**। यही कारण है कि जलीय जीव गर्म जल की तुलना में ठंडे जल में अधिक सहज महसूस करते हैं।
- दाब का प्रभाव: दाब बढ़ाने पर गैसों की द्रव में विलेयता **बढ़ती है** (जिसे हेनरी के नियम द्वारा समझाया गया है)।
📜 (D) हेनरी का नियम (Henry's Law) [अति-महत्वपूर्ण]
कथन: स्थिर ताप पर किसी द्रव में गैस की विलेयता, द्रव की सतह पर आरोपित गैस के आंशिक दाब के समानुपाती होती है।
या (डाल्टन के रूप में): किसी विलयन में गैस का मोल-अंश (x), उस विलयन के ऊपर गैस के आंशिक दाब (P) के समानुपाती होता है।
- P: गैस का आंशिक दाब (Partial Pressure)
- x: विलयन में गैस का मोल-अंश (Mole Fraction)
- KH: हेनरी स्थिरांक (Henry's Constant)
- महत्वपूर्ण बिंदु: ताप बढ़ाने पर KH का मान बढ़ता है, जिससे गैस की विलेयता (x) घटती है।
💡 (E) हेनरी के नियम के महत्वपूर्ण अनुप्रयोग (Applications)
-
शीतल पेयों (Soft Drinks) की बोतलों को उच्च दाब पर बंद करना:
सोडा वॉटर या कोल्ड ड्रिंक्स में CO₂ गैस की विलेयता बढ़ाने के लिए बोतलों को उच्च दाब पर बंद किया जाता है। -
गोताखोरों (Scuba Divers) के सिलेंडरों में हीलियम मिलाना:
समुद्र में गहरे उतरते समय उच्च दाब के कारण रक्त में N₂ गैस अत्यधिक घुल जाती है। बाहर आते समय दाब कम होने से N₂ गैस के बुलबुले नसों में बनते हैं, जिसे दर्दनाक बीमारी 'बेंड्स' (Bends) कहते हैं। इससे बचने के लिए सिलेंडरों में हीलियम (11.7% He + 56.2% N₂ + 32.1% O₂) मिलाई जाती है। -
उच्च तुंगता (High Altitude) पर एनॉक्सिया (Anoxia) बीमारी:
पहाड़ों या अधिक ऊँचाई पर वायुमण्डलीय दाब कम होने से O₂ का आंशिक दाब कम हो जाता है। इससे रक्त में O₂ की सांद्रता घट जाती है, जिससे व्यक्ति कमजोर महसूस करता है और स्पष्ट सोच नहीं पाता। इस स्थिति को एनॉक्सिया (Anoxia) कहते हैं।
⚠️ (F) हेनरी के नियम की सीमाएं (Limitations)
हेनरी का नियम केवल निम्नलिखित परिस्थितियों में ही लागू होता है:
- दाब बहुत अधिक न हो।
- ताप बहुत कम न हो।
- गैस विलायक में बहुत कम विलेय (तनु विलयन) हो।
- गैस विलायक के साथ कोई रासायनिक अभिक्रिया न करती हो (जैसे NH₃ या HCl जल के साथ अभिक्रिया कर लेती हैं, अतः इन पर यह नियम लागू नहीं होता)।
📌 4. द्रवों का वाष्प दाब एवं राउल्ट का नियम (Raoult's Law)
♨️ (A) वाष्प दाब (Vapor Pressure) की परिभाषा
स्थिर ताप पर, साम्यावस्था (Equilibrium) में किसी द्रव की वाष्प द्वारा द्रव की सतह पर लगाया गया दाब, उस द्रव का वाष्प दाब (Vapor Pressure) कहलाता है।
⚙️ (B) वाष्प दाब को प्रभावित करने वाले कारक
- द्रव की प्रकृति (Nature of Liquid): जिन द्रवों के अणुओं के मध्य अंतराअणुक आकर्षण बल (Intermolecular Force) कमजोर होता है, वे आसानी से वाष्पित होते हैं और उनका वाष्प दाब अधिक होता है (जैसे- ईथर, एल्कोहल)।
- ताप का प्रभाव (Temperature): ताप बढ़ाने पर अणुओं की गतिज ऊर्जा बढ़ती है जिससे वाष्पन की दर बढ़ जाती है, अतः ताप बढ़ाने पर वाष्प दाब बढ़ता है।
- विलेय मिलाने का प्रभाव: किसी शुद्ध द्रव में अवाष्पशील विलेय (Non-volatile Solute) मिलाने पर उसका वाष्प दाब घट जाता है।
📜 (C) राउल्ट का नियम (Raoult's Law) [अति-महत्वपूर्ण]
1. वाष्पशील द्रवों के मिश्रण के लिए (For Volatile Liquids Solution):
नियम: "किसी निश्चित ताप पर वाष्पशील द्रवों के मिश्रण में, प्रत्येक घटक का आंशिक वाष्प दाब उसके मोल-अंश (Mole Fraction) के समानुपाती होता है।"
कुल दाब (PTotal): PTotal = PA + PB = (P°A · xA) + (P°B · xB)
(यहाँ P°A व P°B शुद्ध घटकों A व B के वाष्प दाब हैं, तथा xA व xB उनके मोल-अंश हैं।)
2. अवाष्पशील विलेय युक्त विलयन के लिए (For Non-Volatile Solute Solution):
नियम: "जब किसी वाष्पशील विलायक में कोई अवाष्पशील विलेय (जैसे चीनी, नमक, यूरिया) घोला जाता है, तो विलयन का वाष्प दाब केवल विलायक के वाष्प दाब पर निर्भर करता है।"
📉 (D) वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन (Relative Lowering of Vapor Pressure)
शुद्ध विलायक का वाष्प दाब P°A तथा अवाष्पशील विलेय युक्त विलयन का वाष्प दाब P हो, तो:
- वाष्प दाब में अवनमन (Lowering of VP): ΔP = P°A - P
- वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन (Relative Lowering): (P°A - P) / P°A
राउल्ट के नियमानुसार: "अवाष्पशील विलेय युक्त तनु विलयन के वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन, विलयन में उपस्थित विलेय के मोल-अंश (xB) के बराबर होता है।"
अत्यधिक तनु विलयन के लिए (nB << nA):
(P°A - P) / P°A = (WB × MA) / (MB × WA)
(यहाँ WB व MB विलेय का भार व अणुभार हैं, तथा WA व MA विलायक का भार व अणुभार हैं।)
📌 5. आदर्श तथा अनादर्श विलयन (Ideal & Non-Ideal Solutions)
✨ (A) आदर्श विलयन (Ideal Solution)
वे विलयन जो ताप एवं सांद्रता की सभी परासों (Ranges) में राउल्ट के नियम का पूर्णतः पालन करते हैं, आदर्श विलयन कहलाते हैं।
📌 लक्षण एवं मुख्य शर्तें:
- यह राउल्ट के नियम का पालन करता है: PA = P°A · xA तथा PB = P°B · xB
- मिश्रण की एन्थैल्पी में परिवर्तन शून्य होता है: ΔHmix = 0 (न ऊष्मा उत्सर्जित होती है, न अवशोषित)
- मिश्रण के आयतन में परिवर्तन शून्य होता है: ΔVmix = 0 (घटकों को मिलाने पर आयतन बदलता नहीं है)
- अंतराअणुक आकर्षण बल: विलेय-विलायक (A-B) का आकर्षण बल, विलेय-विलेय (A-A) और विलायक-विलायक (B-B) के आकर्षण बल के बराबर होता है।
💡 उदाहरण:
• बेंजीन + टॉलुईन
• n-हेक्सेन + n-हेप्टेन
• एथिल ब्रोमाइड + एथिल आयोडाइड
⚠️ (B) अनादर्श विलयन (Non-Ideal Solution)
वे विलयन जो ताप एवं सांद्रता की सभी सीमाओं पर राउल्ट के नियम का पालन नहीं करते हैं, अनादर्श विलयन कहलाते हैं।
📌 मुख्य लक्षण:
- PA ≠ P°A · xA तथा PB ≠ P°B · xB
- ΔHmix ≠ 0 (ऊष्मा परिवर्तन होता है)
- ΔVmix ≠ 0 (आयतन परिवर्तन होता है)
- A-B अंतराअणुक आकर्षण बल A-A तथा B-B के समान नहीं होता।
राउल्ट के नियम से विचलन के आधार पर अनादर्श विलयन दो प्रकार के होते हैं:
1. धनात्मक विचलन दर्शाने वाले विलयन (Positive Deviation)
जब विलयन का कुल वाष्प दाब राउल्ट के नियम द्वारा परिकलित वाष्प दाब से अधिक होता है।
- कारण: A-B का आकर्षण बल A-A या B-B के आकर्षण बल से कमजोर (दुर्बल) होता है, जिससे अणु आसानी से वाष्पित होते हैं।
- शर्ते: ΔHmix > 0 (ऊष्माशोषी) तथा ΔVmix > 0 (आयतन में वृद्धि)
- ग्राफ का स्वरूप: वाष्प दाब का वक्र (Curve) आदर्श स्थिति की सीधी रेखा से ऊपर (उभरा हुआ) बनता है।
- उदाहरण: एथेनॉल + एसीटोन, एथेनॉल + जल, कार्बन टेट्राक्लोराइड + बेंजीन।
2. ऋणात्मक विचलन दर्शाने वाले विलयन (Negative Deviation)
जब विलयन का कुल वाष्प दाब राउल्ट के नियम द्वारा परिकलित वाष्प दाब से कम होता है।
- कारण: A-B का आकर्षण बल A-A या B-B के आकर्षण बल से अधिक मजबूत (प्रबल) होता है (जैसे H-बॉन्डिंग बनने से)।
- शर्ते: ΔHmix < 0 (ऊष्माक्षेपी) तथा ΔVmix < 0 (आयतन में कमी)
- ग्राफ का स्वरूप: वाष्प दाब का वक्र (Curve) आदर्श स्थिति की सीधी रेखा से नीचे (धंसा हुआ) बनता है।
- उदाहरण: क्लोरोफॉर्म + एसीटोन, HNO₃ + जल, HCl + जल।
🧪 (C) स्थिरक्वाथी मिश्रण (Azeotropes / Azeotropic Mixtures)
दो या दो से अधिक द्रवों का ऐसा द्विअंगी (Binary) मिश्रण, जो संगठन में बिना किसी परिवर्तन के एक निश्चित ताप पर उबलता है और जिसके द्रव तथा वाष्प प्रावस्था में संगठन समान होते हैं, स्थिरक्वाथी मिश्रण कहलाता है। (इसे प्रभाजी आसवन द्वारा पृथक नहीं किया जा सकता।)
| प्रकार (Type) | विचलन का प्रकार | लक्षण एवं क्वथनांक | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| 1. न्यूनतम क्वथनांकी स्थिरक्वाथी (Minimum Boiling Azeotrope) |
अत्यधिक धनात्मक विचलन | इनका क्वथनांक दोनों घटकों के क्वथनांक से कम होता है। | 95.4% एथेनॉल + 4.6% जल (द्रव्यमान से) |
| 2. अधिकतम क्वथनांकी स्थिरक्वाथी (Maximum Boiling Azeotrope) |
अत्यधिक ऋणात्मक विचलन | इनका क्वथनांक दोनों घटकों के क्वथनांक से अधिक होता है। | 68% HNO₃ + 32% जल (द्रव्यमान से) |
📌 6. अणुसंख्य गुणधर्म (Colligative Properties)
विलयन के वे गुणधर्म जो विलयन में उपस्थित विलेय के कणों की संख्या (कणों के मोल-अंश) पर निर्भर करते हैं, न कि विलेय की रासायनिक प्रकृति पर, अणुसंख्य गुणधर्म कहलाते हैं।
🧪 (i) वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन (Relative Lowering of Vapor Pressure)
अवाष्पशील विलेय मिलाने पर विलायक का वाष्प दाब घट जाता है। राउल्ट के नियमानुसार, वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन विलेय के मोल-अंश के बराबर होता है।
🔹 विलेय का अणुभार (MB) ज्ञात करने का सूत्र:
अत्यधिक तनु विलयन के लिए:
🔥 (ii) क्वथनांक का उन्नयन (Elevation of Boiling Point - ΔTb)
किसी विलायक में अवाष्पशील विलेय घोलने पर उसके क्वथनांक में होने वाली वृद्धि को क्वथनांक का उन्नयन (ΔTb) कहते हैं। (ΔTb = Tb - T°b)
- Kb (मोलल उन्नयन स्थिरांक / Ebullioscopic Constant): 1000 ग्राम (1 किग्रा) विलायक में विलेय का 1 मोल घोलने पर क्वथनांक में होने वाले उन्नयन को विलायक का Kb कहते हैं। (मात्रक: K kg mol⁻¹)
- अणुभार (MB) का सूत्र: MB = (1000 × Kb × WB) / (ΔTb × WA)
❄️ (iii) हिमांक का अवनमन (Depression of Freezing Point - ΔTf)
किसी विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर उसके हिमांक (जमने के ताप) में आने वाली कमी को हिमांक का अवनमन (ΔTf) कहते हैं। (ΔTf = T°f - Tf)
- Kf (मोलल अवनमन स्थिरांक / Cryoscopic Constant): 1 किग्रा विलायक में विलेय का 1 मोल घोलने पर हिमांक में होने वाली कमी को विलायक का Kf कहते हैं। (मात्रक: K kg mol⁻¹)
- अणुभार (MB) का सूत्र: MB = (1000 × Kf × WB) / (ΔTf × WA)
🌊 (iv) परासरण एवं परासरण दाब (Osmosis & Osmotic Pressure - π)
अर्धपारगम्य झिल्ली (SPM): वह झिल्ली जो केवल विलायक के अणुओं को अपने में से पार होने देती है, विलेय के कणों को नहीं (उदा. कॉपर फेरोसायनाइड, पार्चमेंट पेपर)।
परासरण (Osmosis): विलायक का SPM के माध्यम से अपनी कम सांद्रता वाले विलयन से अधिक सांद्रता वाले विलयन की ओर स्वतः प्रवाह।
| अंतर का आधार | विसरण (Diffusion) | परासरण (Osmosis) |
|---|---|---|
| SPM की आवश्यकता | आवश्यकता नहीं होती। | SPM अत्यंत आवश्यक है। |
| कणों का प्रवाह | विलेय व विलायक दोनों कण विपरीत दिशा में बहते हैं। | केवल विलायक के कण एक ही दिशा में बहते हैं। |
📜 परासरण दाब का नियम (van 't Hoff Equation):
विलयन के परासरण को रोकने के लिए लगाया गया आवश्यक न्यूनतम बाह्य दाब परासरण दाब (π) कहलाता है।
विलेय का अणुभार: MB = (WB × R × T) / (π × V)
💡 सांद्रता आधारित विलयनों के प्रकार:
- समपरासारी विलयन (Isotonic): समान ताप पर जिन दो विलयनों के परासरण दाब बराबर होते हैं (π₁ = π₂)।
- अतिपरासारी विलयन (Hypertonic): जिस विलयन का परासरण दाब दूसरे से अधिक होता है।
- अल्पपरासारी विलयन (Hypotonic): जिस विलयन का परासरण दाब दूसरे से कम होता है।
💧 प्रतिलोम परासरण (Reverse Osmosis - RO) एवं जल विमुग्धीकरण:
यदि विलयन पर उसके परासरण दाब से अधिक बाह्य दाब लगाया जाए, तो विलायक के कण विलयन से शुद्ध विलायक की ओर उल्टी दिशा में बहने लगते हैं। इसे प्रतिलोम परासरण (RO) कहते हैं। इसका उपयोग समुद्री या खारे पानी से शुद्ध पीने योग्य जल प्राप्त करने (जल का विमुग्धीकरण/Desalination) में किया जाता है।
📌 7. बोर्ड परीक्षा आंकिक प्रश्न (Numericals)
UP Board chemistry परीक्षा में इस अध्याय से 3 से 5 अंकों के न्यूमेरिकल्स अवश्य पूछे जाते हैं। नीचे प्रमुख सूत्रों पर आधारित हल सहित आंकिक प्रश्न दिए गए हैं:
🧪 (i) सांद्रता पद (M, m, x) पर आधारित प्रश्न
प्रश्न 1: 5.85 ग्राम NaCl को 200 mL जल में घोला गया है। विलयन की मोलरता (M) ज्ञात कीजिए। (Na = 23, Cl = 35.5)
• विलेय (NaCl) का भार (WB) = 5.85 g
• NaCl का अणुभार (MB) = 23 + 35.5 = 58.5 g/mol
• विलयन का आयतन (VmL) = 200 mL
सूत्र: मोलरता (M) = (WB × 1000) / (MB × VmL)
M = (5.85 × 1000) / (58.5 × 200)
M = 5850 / 11700 = 0.5 M (या mol/L)
प्रश्न 2: 20% (w/w) जलीय KI विलयन की मोललता (m) की गणना कीजिए। (K = 39, I = 127)
• 20% (w/w) का अर्थ है: 100 g विलयन में 20 g KI और 80 g जल (विलायक) है।
• विलेय (KI) का भार (WB) = 20 g
• KI का अणुभार (MB) = 39 + 127 = 166 g/mol
• विलायक (जल) का भार (WA) = 100 - 20 = 80 g
सूत्र: मोललता (m) = (WB × 1000) / (MB × WA)
m = (20 × 1000) / (166 × 80)
m = 20000 / 13280 = 1.506 m (mol/kg)
📜 (ii) हेनरी तथा राउल्ट के नियम पर आधारित प्रश्न
प्रश्न 3: एक अवाष्पशील विलेय का 10g 90g जल में घोला गया है। यदि 298 K पर शुद्ध जल का वाष्प दाब 24 mm Hg है, तो विलयन का वाष्प दाब ज्ञात कीजिए। (विलेय का अणुभार = 40)
• विलेय का भार (WB) = 10 g, MB = 40 g/mol ⇒ मोल nB = 10/40 = 0.25 मोल
• जल का भार (WA) = 90 g, MA = 18 g/mol ⇒ मोल nA = 90/18 = 5 मोल
• शुद्ध विलायक का वाष्प दाब (P°A) = 24 mm Hg
राउल्ट का नियम: (P°A - P) / P°A = nB / (nA + nB)
(24 - P) / 24 = 0.25 / (5 + 0.25)
(24 - P) / 24 = 0.25 / 5.25 = 1 / 21
24 - P = 24 / 21 = 1.14
P = 24 - 1.14 = 22.86 mm Hg (विलयन का वाष्प दाब)
📊 (iii) अणुसंख्य गुणधर्मों (ΔTb, ΔTf, π) पर आधारित प्रश्न
प्रश्न 4: 3.0 ग्राम अवाष्पशील विलेय को 50 ग्राम बेंजीन में घोलने पर हिमांक में 0.40 K का अवनमन होता है। विलेय का अणुभार ज्ञात कीजिए। (बेंजीन के लिए Kf = 5.12 K kg mol⁻¹)
• WB = 3.0 g, WA = 50 g, ΔTf = 0.40 K, Kf = 5.12
सूत्र: MB = (1000 × Kf × WB) / (ΔTf × WA)
MB = (1000 × 5.12 × 3.0) / (0.40 × 50)
MB = 15360 / 20 = 768 g/mol
प्रश्न 5: 27°C पर 5% (w/v) यूरिया (NH₂CONH₂) विलयन का परासरण दाब (π) ज्ञात कीजिए। (R = 0.0821 L atm K⁻¹ mol⁻¹, C = 12, N = 14, O = 16, H = 1)
• 5% (w/v) = 100 mL में 5 g यूरिया
• यूरिया का अणुभार (MB) = 60 g/mol
• ताप (T) = 27 + 273 = 300 K
• V = 100 mL = 0.1 L
सूत्र: π = (WB × R × T) / (MB × V)
π = (5 × 0.0821 × 300) / (60 × 0.1)
π = 123.15 / 6 = 20.525 atm

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