अध्याय 4: गतिमान आवेश और चुंबकत्व (Moving Charges and Magnetism)
चुंबकीय क्षेत्र, और्स्टेड का प्रयोग, बायो-सेवर्ट नियम एवं एम्पीयर का परिपथीय नियम
1. चुंबकीय क्षेत्र की संकल्पना और और्स्टेड का प्रयोग (Oersted's Experiment)
चुंबकीय क्षेत्र: किसी चुंबक या धारावाही चालक के चारों ओर का वह क्षेत्र जहाँ तक उसके चुंबकत्व का प्रभाव अनुभव किया जा सके, चुंबकीय क्षेत्र कहलाता है। इसका मात्रक टेस्ला (Tesla या Wb/m2) है。
और्स्टेड का प्रयोग: वैज्ञानिक और्स्टेड ने देखा कि जब किसी चालक तार में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो उसके पास रखी चुंबकीय सुई में विक्षेप उत्पन्न होता है। इससे यह सिद्ध हुआ कि विद्युत धारा और चुंबकत्व आपस में संबंधित हैं (धारा के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है)।
2. बायो-सेवर्ट का नियम (Biot-Savart Law) व इसका अनुप्रयोग
इसके अनुसार, किसी धारावाही अल्पांश Idl के कारण किसी बिंदु पर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र dB, धारा I, लंबाई dl, और स्थिति सदिश के कोण कीज्या (sin θ) के अनुक्रमानुपाती तथा दूरी r के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है:
अनुप्रयोग (वृत्ताकार धारावाही लूप के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र): यदि r त्रिज्या के N फेरों वाले वृत्ताकार लूप में I धारा बहे, तो केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र का सूत्र होता है:
3. एम्पीयर का परिपथीय नियम (Ampere's Circuital Law) तथा उपयोग
किसी बंद वक्र के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता का रेखा समाकलन, उस बंद पृष्ठ द्वारा घिरी कुल कुल धारा I का μ0 गुना होता है:
प्रमुख उपयोग: इसकी सहायता से अनंत लंबाई के सीधे धारावाही चालक के निकट तथा परिनालिका (Solenoid) के भीतर चुंबकीय क्षेत्र का व्यंजक आसानी से प्राप्त किया जाता है।
4. गतिमान आवेश पर बल: लोरेंट्ज़ बल (Lorentz Force)
जब कोई आवेशित कण (q) किसी ऐसे क्षेत्र में गति करता है जहाँ वैद्युत क्षेत्र (E) और चुंबकीय क्षेत्र (B) दोनों उपस्थित हों, तो उस पर लगने वाले कुल बल को लोरेंट्ज़ बल कहते हैं:
केवल चुंबकीय क्षेत्र में गतिमान आवेश पर बल: F = qvB sinθ (जहाँ v = वेग, θ = वेग और चुंबकीय क्षेत्र के बीच का कोण)।
5. एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही चालक पर बल (Force on a Current-Carrying Conductor)
जब l लंबाई के किसी धारावाही चालक (जिसमें I धारा बह रही है) को B तीव्रता के एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो उस पर लगने वाला चुंबकीय बल निम्नलिखित होता है:
(यदि चालक क्षेत्र के लंबवत हो, तो F = IlB)
6. दो समांतर धारावाही चालकों के बीच बल एवं एम्पीयर की परिभाषा
जब दो लंबे सीधे समांतर चालकों में एक ही दिशा में धारा प्रवाहित होती है, तो वे एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं और विपरीत दिशा में होने पर प्रतिकर्षित करते हैं। प्रति एकांक लंबाई पर लगने वाला बल:
एम्पीयर की परिभाषा: 1 ऐम्पियर वह विद्युत धारा है जो निर्वात में एक-दूसरे से 1 मीटर की दूरी पर स्थित दो सीधे समांतर चालकों में प्रवाहित होने पर प्रत्येक चालक की प्रति मीटर लंबाई पर 2 × 10-7 न्यूटन का बल उत्पन्न करती है।
7. चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही लूप पर बल आघूर्ण (Torque on a Current Loop)
जब किसी N फेरों और A क्षेत्रफल वाले आयताकार धारावाही लूप को एकसमान चुंबकीय क्षेत्र B में इस प्रकार रखा जाता है कि उसका अभिलंब क्षेत्र के साथ θ कोण बनाए, तो उस पर लगने वाला बल आघूर्ण (τ) निम्नलिखित होता है:
इसे सदिश रूप में τ = M × B भी लिखा जाता है (जहाँ M = N I A चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण है)।
8. चल कुंडली गैल्वेनोमीटर (Moving Coil Galvanometer)
यह एक ऐसा सुग्राही उपकरण है जिसका उपयोग किसी विद्युत परिपथ में अतिसूक्ष्म धारा की उपस्थिति का संसूचन (पता लगाने) या मापन करने के लिए किया जाता है। इसका सिद्धांत इस तथ्य पर आधारित है कि जब किसी चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही कुंडली को रखा जाता है, तो उस पर एक बल आघूर्ण कार्य करता है।
9. गैल्वेनोमीटर को अमीटर व वोल्टमीटर में बदलना (Conversion)
(क) अमीटर में बदलना: गैल्वेनोमीटर को अमीटर में बदलने के लिए उसके समांतर क्रम में एक अत्यंत अल्प प्रतिरोध (जिसे 'शंट' कहते हैं) जोड़ दिया जाता है।
(ख) वोल्टमीटर में बदलना: गैल्वेनोमीटर को वोल्टमीटर में बदलने के लिए उसके साथ श्रेणी क्रम में एक बहुत उच्च प्रतिरोध जोड़ दिया जाता है।

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