अध्याय 3: विद्युत धारा (Current Electricity)
विद्युत धारा, चालकों में आवेशों का प्रवाह, अपवाह वेग, गतिशीलता एवं धारा से संबंध
1. विद्युत धारा (Electric Current)
किसी चालक में आवेश के प्रवाह की दर को विद्युत धारा (Electric Current) कहते हैं। यदि किसी चालक के किसी अनुप्रस्थ काट से t समय में q आवेश प्रवाहित हो, तो प्रवाहित धारा:
• मात्रक: ऐम्पियर (Ampere या A) या कूलॉम/सेकंड。
• प्रकृति: यह एक अदिश राशि (Scalar Quantity) है।
2. धात्विक चालकों में आवेशों का प्रवाह (Flow of Charges in Metallic Conductors)
धातुओं में विद्युत का चालन मुक्त इलेक्ट्रॉनों के कारण होता है। जब तक चालक के सिरों पर कोई विभवांतर नहीं लगाया जाता, तब तक मुक्त इलेक्ट्रॉन अनियमित (यादृच्छिक) गति करते हैं, जिससे नेट धारा का मान शून्य होता है। जब विभवांतर लगाया जाता है, तो ये इलेक्ट्रॉन एक निश्चित सूक्ष्म नियत वेग से उच्च विभव की ओर प्रवाहित होने लगते हैं।
3. अपवाह वेग या अनुगमन वेग (Drift Velocity)
वह सूक्ष्म नियत वेग जिसके प्रभाव से चालक के मुक्त इलेक्ट्रॉन बाह्य वैद्युत क्षेत्र के विपरीत दिशा में प्रवाहित होते हैं, अपवाह वेग (vd) कहलाता है। इसका मान लगभग $10^{-4}$ मीटर/सेकंड की कोटि का होता है।
(जहाँ e = इलेक्ट्रॉन का आवेश, E = वैद्युत क्षेत्र, m = द्रव्यमान, τ = विश्रांति काल)
4. गतिशीलता (Mobility) एवं धारा से संबंध (Relation with Current)
गतिशीलता (μ): प्रति एकांक वैद्युत क्षेत्र में उत्पन्न अपवाह वेग को आवेश वाहक की गतिशीलता कहते हैं।
वैद्युत धारा तथा अपवाह वेग में संबंध: यदि किसी चालक में प्रति एकांक आयतन में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या n, अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल A हो, तो:
5. ओम का नियम (Ohm's Law) एवं V-I अभिलाक्षणिक
यदि किसी चालक की भौतिक अवस्थाएँ (ताप, दाब आदि) स्थिर रहें, तो चालक के सिरों पर लगाया गया विभवांतर (V) उसमें बहने वाली धारा (I) के अनुक्रमानुपाती होता है।
V-I अभिलाक्षणिक वक्र: विभवांतर V और धारा I के बीच खींचा गया ग्राफ एक सरल रेखा होता है, जिसका ढलान (Slope) प्रतिरोध के व्युत्क्रम को दर्शाता है।
6. विद्युत ऊर्जा तथा विद्युत सामर्थ्य (Electric Energy & Power)
विद्युत ऊर्जा (W): किसी विद्युत परिपथ में धारा प्रवाहित करने में किए गए कुल कार्य को विद्युत ऊर्जा कहते हैं: W = VIt = I2Rt = V2tR
विद्युत सामर्थ्य (P): कार्य करने की दर को वैद्युत सामर्थ्य कहते हैं:
(मात्रक: वाट [W] या जूल/सेकंड)
7. प्रतिरोधकता (Resistivity) तथा चालकता (Conductivity)
किसी चालक का प्रतिरोध R उसकी लंबाई l के अनुक्रमानुपाती और क्षेत्रफल A के व्युत्क्रमानुपाती होता है: R = ρ lA
• प्रतिरोधकता (ρ): इसे विशिष्ट प्रतिरोध भी कहते हैं। (मात्रक: ओम·मीटर Ω·m)
• विशिष्ट चालकता (σ): प्रतिरोधकता के व्युत्क्रम को विशिष्ट चालकता कहते हैं: σ = 1ρ (मात्रक: ओम-1·मीटर-1 या सीमेंस/मीटर)
8. प्रतिरोधों का श्रेणी व समांतर क्रम संयोजन (Combination of Resistors)
(क) श्रेणी क्रम संयोजन (Series Combination): इस स्थिति में प्रत्येक प्रतिरोध में धारा (I) समान होती है। तुल्य प्रतिरोध:
(ख) समांतर क्रम संयोजन (Parallel Combination): इस स्थिति में प्रत्येक प्रतिरोध के सिरों पर विभवांतर (V) समान होता है। तुल्य प्रतिरोध:
9. सेल का विद्युत वाहक बल, आंतरिक प्रतिरोध तथा टर्मिनल विभवांतर (EMF & Internal Resistance)
विद्युत वाहक बल (EMF - E): एकांक आवेश को पूरे परिपथ (सेल के भीतर सहित) में प्रवाहित करने में सेल द्वारा दी गई ऊर्जा या किया गया कार्य सेल का विद्युत वाहक बल कहलाता है。
आंतरिक प्रतिरोध (r): सेल के भीतर उसके घोल (इलेक्ट्रोलाइट) द्वारा धारा के मार्ग में उत्पन्न अवरोध को सेल का आंतरिक प्रतिरोध कहते हैं。
टर्मिनल विभवांतर (V): जब सेल से धारा ली जा रही हो, तो उसके दोनों टर्मिनलों के बीच का विभवांतर:
10. किर्चहॉफ के नियम (Kirchhoff's Rules)
(क) प्रथम नियम (धारा नियम / संधि नियम): किसी संधि पर मिलने वाली सभी धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है (अर्थात् ∑I = 0)। यह आवेश संरक्षण के नियम पर आधारित है。
(ख) द्वितीय नियम (वोल्टेज नियम / पाश नियम): किसी बंद परिपथ के प्रत्येक भाग में बहने वाली धाराओं तथा संगत प्रतिरोधों के गुणनफल का बीजगणितीय योग उस पाश में उपस्थित कुल विद्युत वाहक बलों के बीजगणितीय योग के बराबर होता है (अर्थात् ∑IR = ∑E)। यह ऊर्जा संरक्षण के नियम पर आधारित है।
11. व्हीटस्टोन सेतु (Wheatstone Bridge) एवं मीटर सेतु
व्हीटस्टोन सेतु: यह चार प्रतिरोधों का एक ऐसा विशेष संयोजन है जिसकी सहायता से किसी अज्ञात प्रतिरोध का मान ज्ञात किया जाता है। संतुलन की स्थिति में गैल्वेनोमीटर में कोई विक्षेप नहीं होता:
मीटर सेतु (Meter Bridge): यह व्हीटस्टोन सेतु के सिद्धांत पर ही कार्य करने वाला एक व्यावहारिक उपकरण है, जिसका उपयोग अज्ञात प्रतिरोध ज्ञात करने में किया जाता है।
12. विभवमापी (Potentiometer)
विभवमापी एक ऐसा उपकरण है जिसकी सहायता से किसी सेल का विद्युत वाहक बल, दो सेलों के विद्युत वाहक बलों की तुलना तथा किसी परिपथ का अज्ञात विभवांतर अत्यंत यथार्थता से ज्ञात किया जाता है। यह शून्य विक्षेप विधि पर कार्य करता है, अतः यह परिपथ से कोई धारा नहीं खींचता (आदर्श वोल्टमीटर की भाँति)।

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