Home गीता सार गीता श्लोक अनुवाद Jakhai Baba UP Board Material GS Kitaab

Ads Area

कक्षा 12 भौतिक विज्ञान अध्याय 13: नाभिक (महत्वपूर्ण नोट्स)

1. नाभिकीय संरचना तथा नाभिकों के प्रकार (Nuclear Structure & Types)

प्रत्येक परमाणु का नाभिक प्रोटॉनों (p) और न्यूट्रॉनों (n) से मिलकर बना होता है, जिन्हें सामूहिक रूप से नुकियान (Nucleons) कहते हैं। नाभिक को ZXA द्वारा प्रदर्शित किया जाता है (जहाँ Z परमाणु क्रमांक तथा A द्रव्यमान संख्या है)।

समस्थानिक (Isotopes): वे नाभिक जिनमें प्रोटॉनों की संख्या (Z) समान होती है लेकिन द्रव्यमान संख्या (A) भिन्न होती है (जैसे: 1H1, 1H2)।
समभारिक (Isobars): वे नाभिक जिनकी द्रव्यमान संख्या (A) समान होती है लेकिन परमाणु क्रमांक (Z) भिन्न होते हैं (जैसे: 1H3 और 2He3)।
समन्यूट्रॉनिक (Isotones): वे नाभिक जिनमें न्यूट्रॉनों की संख्या (A - Z) समान होती है (जैसे: 1H3 और 2He4 दोनों में 2 न्यूट्रॉन हैं)।

2. द्रव्यमान क्षति (Mass Defect - Δm)

किसी नाभिक का वास्तविक कुल द्रव्यमान, उसमें उपस्थित स्वतंत्र न्यूक्लियनों (प्रोटॉनों व न्यूट्रॉनों) के कुल द्रव्यमान से हमेशा कुछ कम होता है। द्रव्यमान के इस अंतर को ही द्रव्यमान क्षति कहते हैं:

Δm = [Z mp + (A - Z)mn] - M

(जहाँ mp प्रोटॉन का द्रव्यमान, mn न्यूट्रॉन का द्रव्यमान तथा M नाभिक का वास्तविक द्रव्यमान है।) यह लुप्त हुआ द्रव्यमान ही आइंस्टीन के संबंध (E = Δmc2) के अनुसार बंधन ऊर्जा के रूप में बाहर निकलता है।

3. बंधन ऊर्जा (Binding Energy)

किसी नाभिक को उसके न्यूक्लियनों (प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों) में अलग-अलग करने के लिए जितनी बाहरी ऊर्जा की आवश्यकता होती है, उसे उस नाभिक की बंधन ऊर्जा कहते हैं।
प्रति न्यूक्लियन बंधन ऊर्जा: कुल बंधन ऊर्जा और नाभिक में उपस्थित न्यूक्लियनों की कुल संख्या (A) के अनुपात को प्रति न्यूक्लियन बंधन ऊर्जा कहते हैं। यह मान जितना अधिक होता है, नाभिक उतना ही अधिक स्थायी (Stable) होता है।

4. नाभिकीय संलयन तथा नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fusion & Fission)

नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission): जब एक भारी नाभिक (जैसे यूरेनियम) पर मंद गति के न्यूट्रॉनों की बौछार की जाती है, तो वह लगभग समान आकार के दो हल्के नाभिकों में टूट जाता है और अत्यधिक मात्रा में ऊर्जा मुक्त होती है (जैसे परमाणु बम का सिद्धांत)।
नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion): जब दो या दो से अधिक हल्के नाभिक मिलकर एक भारी नाभिक का निर्माण करते हैं, तो इस प्रक्रिया को नाभिकीय संलयन कहते हैं (जैसे सूर्य और तारों में ऊर्जा का मुख्य स्रोत)।

5. रेडियोधर्मिता (Radioactivity)

कुछ भारी और अस्थिर नाभिकों से स्वतः ही अदृश्य किरणें (α, β, γ किरणें) उत्सर्जित होती रहती हैं। इस स्वतः होने वाली घटना को रेडियोधर्मिता (या रेडियोएक्टिवता) कहते हैं।
• रेडियोएक्टिव क्षय नियमानुसार, किसी क्षण सक्रिय परमाणुओं की संख्या घटने की दर उस क्षण उपस्थित परमाणुओं की संख्या के अनुक्रमानुपाती होती है: N = N0e-λt

Sunil Learning Point • अध्याय 13 समाप्त अगला अध्याय (अध्याय 14) ➔
Tags

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

Top Post Ad

Below Post Ad

Ads Area