1. अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग (Alpha-Particle Scattering Experiment)
रदरफोर्ड और उनके सहयोगियों (गीजर और मार्सडेन) ने रेडियोएक्टिव स्रोत से उत्सर्जित तीव्रगामी α-कणों को सोने की अति पतली पन्नी (~100 nm) पर आपतित कराया। इस प्रयोग के मुख्य प्रेक्षण निम्नलिखित थे:
• अधिकांश α-कण बिना किसी विक्षेपण के सीधे पन्नी को पार करके निकल जाते हैं।
• बहुत कम α-कण छोटे कोणों पर विक्षेपित होते हैं।
• लगभग 8000 कणों में से केवल 1 कण लगभग 90° या उससे बड़े (180°) कोण पर वापस लौटता है।
2. रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल (Rutherford's Nuclear Model of Atom)
अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग के निष्कर्षों के आधार पर रदरफोर्ड ने परमाणु का यह मॉडल प्रस्तुत किया:
• परमाणु का समस्त धनावेश तथा संपूर्ण द्रव्यमान उसके केंद्र में अत्यंत सूक्ष्म स्थान पर केंद्रित होता है, जिसे नाभिक (Nucleus) कहते हैं।
• नाभिक का आकार (~10-15 m) परमाणु के कुल आकार (~10-10 m) की तुलना में बहुत छोटा होता है।
• इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर विभिन्न वृत्ताकार कक्षाओं में उच्च चाल से चक्कर लगाते हैं (सौर्य मंडल के समान), और आवश्यक अभिकेंद्र बल इन्हें कूलामी आकर्षण बल से प्राप्त होता है।
3. बोर का परमाणु मॉडल (Bohr's Model of Atom)
रदरफोर्ड मॉडल की कमियों को दूर करने के लिए नील बोर ने 1913 में क्वांटम संकल्पनाओं पर आधारित अपना मॉडल प्रस्तुत किया:
• स्थिर कक्षाएँ: इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर केवल उन्हीं निश्चित वृत्ताकार कक्षाओं में चक्कर लगा सकते हैं जिनके लिए उनका कोणीय संवेग (L), h / 2π का पूर्ण गुणज होता है:
• ऊर्जा संक्रमण: जब कोई इलेक्ट्रॉन उच्च ऊर्जा स्तर (E2) से निम्न ऊर्जा स्तर (E1) में कूदता है, तो दोनों ऊर्जाओं के अंतर के बराबर फोटोन ऊर्जा उत्सर्जित होती है: hν = E2 - E1।
4. हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम (Hydrogen Spectrum Series)
जब हाइड्रोजन परमाणु के इलेक्ट्रॉन उच्च ऊर्जा स्तर से निचले ऊर्जा स्तर में लौटते हैं, तो विभिन्न श्रेणियों की स्पेक्ट्रमी रेखाएँ प्राप्त होती हैं:
• लाइमन श्रेणी (Lyman Series): यह पराबैंगनी (Ultraviolet) क्षेत्र में मिलती है (n1 = 1, n2 = 2, 3, 4...).
• बामर श्रेणी (Balmer Series): यह दृश्य (Visible) क्षेत्र में पाई जाने वाली एकमात्र श्रेणी है (n1 = 2, n2 = 3, 4, 5...).
• पाश्चन श्रेणी (Paschen Series): यह अवरक्त (Infrared) क्षेत्र में प्राप्त होती है (n1 = 3, n2 = 4, 5, 6...).
• (अन्य श्रेणियाँ: ब्रैकेट श्रेणी और ब्रैकेट के बाद फुंड श्रेणी भी अवरक्त क्षेत्र में ही आती हैं।)

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