Home गीता सार गीता श्लोक अनुवाद Jakhai Baba UP Board Material GS Kitaab

Ads Area

कक्षा-10 (हिन्दी) - गद्य खण्ड : Chapter-5 (क्या लिखूँ) : पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी

📚 UP BOARD • कक्षा 10 • हिन्दी

अध्याय — “क्या लिखूँ?”

✍️ पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी

गद्य-खण्ड | सम्पूर्ण अध्याय समाधान

🎯 सत्र 2026–27 | बोर्ड परीक्षा 2027
📖 विषयहिन्दी
🎓 कक्षा10वीं
📕 पाठक्या लिखूँ?
✍️ लेखकपदुमलाल पुन्नालाल बख्शी

📖 पाठ-परिचय

‘क्या लिखूँ?’ पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का एक प्रसिद्ध ललित निबन्ध है। इसमें लेखक लेखन की उस स्थिति का रोचक और आत्मीय चित्रण करते हैं, जब लेखक के सामने कागज और कलम तो होते हैं, लेकिन मन में यह प्रश्न उठता रहता है कि “क्या लिखूँ?”

लेखक अपने अनुभवों और विचारों के माध्यम से बताते हैं कि लेखन केवल विषय खोज लेने का नाम नहीं है। लेखक के भीतर एक विशेष मानसिक स्थिति, उमंग, स्फूर्ति और विचारों का आवेग होना भी आवश्यक है।

निबन्ध में लेखक संभावित विषयों पर विचार करते हुए यह स्पष्ट करते हैं कि किसी विषय पर लिखना तभी सार्थक होता है जब लेखक के मन में उसके प्रति वास्तविक विचार और अनुभूति हो।

🎯 पाठ का केंद्रीय विचार:
सच्चा लेखन बाहरी दबाव से नहीं, बल्कि लेखक के मन में उत्पन्न विचार, अनुभूति, संवेदना और सृजनात्मक प्रेरणा से जन्म लेता है।

✍️ पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी — पूर्ण जीवन-परिचय

🌟 जन्म एवं परिवार

पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का जन्म 27 मई 1894 ई. को खैरागढ़ में हुआ था।

उनके पिता का नाम श्री पुन्नालाल बख्शी था। उनकी माता का नाम श्रीमती मनोरमा देवी था। उनका पारिवारिक वातावरण साहित्यिक रुचियों से प्रभावित था।

🎓 शिक्षा-दीक्षा

उनकी प्रारम्भिक शिक्षा खैरागढ़ में हुई। प्रारम्भिक शिक्षा के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा की ओर कदम बढ़ाया। उन्होंने बनारस के सेंट्रल हिन्दू कॉलेज में अध्ययन किया और बी.ए. की शिक्षा पूर्ण की।

💍 वैवाहिक जीवन

सन् 1913 में उनका विवाह लक्ष्मी देवी के साथ हुआ।

📚 साहित्यिक जीवन

बख्शी जी ने कविता, कहानी, निबन्ध और आलोचना आदि विधाओं में साहित्य-सृजन किया। आगे चलकर निबन्ध और आलोचना के क्षेत्र में उन्हें विशेष प्रसिद्धि प्राप्त हुई।

🏫 अध्यापन कार्य

उन्होंने अध्यापन के क्षेत्र में भी कार्य किया। सन् 1916 से 1919 तक उन्होंने राजनांदगाँव में संस्कृत शिक्षक के रूप में कार्य किया।

📰 ‘सरस्वती’ का संपादन

बख्शी जी हिन्दी पत्रकारिता और संपादन के क्षेत्र में भी महत्त्वपूर्ण स्थान रखते हैं। वे सन् 1920 में ‘सरस्वती’ के सहायक संपादक बने और सन् 1921 में इसके प्रधान संपादक का दायित्व संभाला।

उन्होंने ‘छाया’ पत्रिका का संपादन भी किया। संपादन के माध्यम से उन्होंने हिन्दी साहित्य के विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।

📖 प्रमुख साहित्यिक विधाएँ

बख्शी जी ने कविता, कहानी, निबन्ध, आलोचना और संपादन आदि अनेक क्षेत्रों में कार्य किया। उनकी विशेष पहचान निबन्धकार एवं आलोचक के रूप में हुई।

🏆 सम्मान एवं उपाधियाँ

सन् 1949 में हिन्दी साहित्य सम्मेलन ने उन्हें ‘साहित्य वाचस्पति’ की उपाधि से सम्मानित किया।

सन् 1969 में उन्हें डी.लिट्. की मानद उपाधि भी प्रदान की गई।

📚 प्रमुख रचनाएँ

  • निबन्ध: पंचपात्र, पद्मवन, तीर्थरेणु, मकरन्द-बिन्दु आदि।
  • काव्य: शतदल, अश्रुदल।
  • कहानी: झलमला, अंजलि आदि।
  • आलोचना: हिन्दी साहित्य-विमर्श आदि।

🖋️ भाषा-शैली

बख्शी जी की भाषा सरल, साहित्यिक, प्रवाहपूर्ण और प्रभावशाली है। उनकी रचनाओं में विचार और भाव दोनों का सुंदर समन्वय दिखाई देता है।

उनकी निबन्ध-शैली में ललित, भावात्मक, विचारात्मक, व्यंग्य-विनोदपूर्ण तथा व्याख्यात्मक तत्व मिलते हैं।

🕯️ निधन

पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का निधन 18 दिसंबर 1971 को हुआ। हिन्दी निबन्ध और आलोचना के क्षेत्र में उनका योगदान आज भी महत्त्वपूर्ण माना जाता है।

🎯 बोर्ड परीक्षा के लिए जीवन-परिचय के मुख्य तथ्य:
  • जन्म — 27 मई 1894
  • जन्म-स्थान — खैरागढ़
  • पिता — पुन्नालाल बख्शी
  • माता — मनोरमा देवी
  • शिक्षा — सेंट्रल हिन्दू कॉलेज, बनारस; बी.ए.
  • पत्नी — लक्ष्मी देवी
  • प्रमुख कार्य — अध्यापन एवं संपादन
  • ‘सरस्वती’ — सहायक संपादक तथा प्रधान संपादक
  • प्रमुख पहचान — निबन्धकार एवं आलोचक
  • उपाधि — साहित्य वाचस्पति
  • निधन — 18 दिसंबर 1971

📝 ‘क्या लिखूँ?’ का विस्तृत सारांश

‘क्या लिखूँ?’ में लेखक ने लेखन की उस मानसिक स्थिति का चित्रण किया है, जिसमें लेखक लिखना तो चाहता है, लेकिन उसके सामने यह समस्या होती है कि वह क्या लिखे।

लेखक बताते हैं कि लिखने के लिए केवल कागज और कलम पर्याप्त नहीं हैं। लेखक के भीतर उमंग, स्फूर्ति और विचारों का आवेग होना चाहिए। तभी लेखन सहज और प्रभावशाली बन सकता है।

लेखक संभावित विषयों पर विचार करते हैं और अनुभव करते हैं कि किसी विषय का नाम सामने होना और उस विषय पर प्रभावशाली ढंग से लिख पाना दो अलग बातें हैं।

लेखक यह भी स्पष्ट करते हैं कि व्यक्ति की आयु और अनुभव उसके दृष्टिकोण को प्रभावित करते हैं। युवाओं को भविष्य आकर्षक दिखाई दे सकता है, जबकि वृद्धों को अपना अतीत सुखद लगता है।

समाज-सुधार जैसे गंभीर विषय पर लिखने के लिए केवल सामान्य ज्ञान पर्याप्त नहीं है। विषय की गहराई को समझना, विचारों को व्यवस्थित करना और उन्हें प्रभावशाली भाषा में व्यक्त करना आवश्यक है।

🌟 निष्कर्ष:
‘क्या लिखूँ?’ निबन्ध का मूल संदेश है कि श्रेष्ठ लेखन के लिए विषय के साथ-साथ विचार, अनुभव, अनुभूति, मानसिक स्फूर्ति और सृजनात्मक प्रेरणा आवश्यक है।

💡 पाठ के प्रमुख विचार

1️⃣ लेखन की विशेष मानसिक स्थिति
अच्छा लेखन तब संभव होता है जब लेखक के भीतर लिखने की उमंग, मानसिक स्फूर्ति और विचारों का प्रवाह हो।
2️⃣ विषय से अधिक महत्त्व विचार का
सिर्फ विषय मिल जाना पर्याप्त नहीं है। लेखक के पास उस विषय के संबंध में स्वतंत्र और स्पष्ट विचार होना आवश्यक है।
3️⃣ अनुभव और अनुभूति
लेखन में लेखक के व्यक्तिगत अनुभव और अनुभूतियाँ रचना को जीवंत और प्रभावशाली बनाती हैं।
4️⃣ दृष्टिकोण का अंतर
युवा भविष्य को लेकर आशावान हो सकते हैं, जबकि वृद्ध अपने अतीत की स्मृतियों को अधिक सुखद अनुभव कर सकते हैं।
5️⃣ साहित्य में नवीन विचार
साहित्य को समाज और समय के बदलते विचारों से जुड़ना चाहिए। नवीन विचारधाराएँ साहित्य को नई दिशा प्रदान करती हैं।

📚 कठिन शब्द एवं शब्दार्थ

शब्द अर्थ
मानसिक स्थितिमन की विशेष अवस्था
उमंगउत्साह, उल्लास
स्फूर्तिताजगी एवं सक्रियता
आवेगतीव्र मानसिक भावना
मनोभावमन में उत्पन्न भावना
अतीतबीता हुआ समय
तरुणयुवा
वृद्धबूढ़ा व्यक्ति
विचारधाराविचारों की विशेष दिशा
सृजनरचना करना
असमंजसदुविधा
यथार्थवास्तविकता
अभिव्यक्तिभाव या विचार प्रकट करना
समन्वयमेल या सामंजस्य

❓ महत्वपूर्ण लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. ‘क्या लिखूँ?’ पाठ के लेखक कौन हैं?
उत्तर: ‘क्या लिखूँ?’ पाठ के लेखक पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी हैं।
प्रश्न 2. लेखक को लिखना क्यों आवश्यक लगा?
उत्तर: लेखक के मन में लेखन की विशेष मानसिक स्थिति उत्पन्न हो गई थी। उमंग और विचारों का आवेग होने के कारण उन्हें लिखने की प्रेरणा हुई।
प्रश्न 3. लिखने की विशेष मानसिक स्थिति से क्या आशय है?
उत्तर: इसका आशय उस मानसिक अवस्था से है जिसमें लेखक के भीतर लिखने की तीव्र इच्छा, स्फूर्ति, उमंग और विचारों का प्रवाह उत्पन्न हो जाता है।
प्रश्न 4. लेखक के अनुसार लेखन के लिए क्या आवश्यक है?
उत्तर: लेखन के लिए विषय के साथ-साथ स्पष्ट विचार, अनुभूति, मानसिक स्फूर्ति और उसे प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करने की क्षमता आवश्यक है।
प्रश्न 5. ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ का आशय क्या है?
उत्तर: इसका आशय है कि जो वस्तु या स्थिति हमें दूर से दिखाई देती है, वह अधिक आकर्षक लगती है; निकट जाकर उसकी वास्तविक कठिनाइयों का पता चलता है।
प्रश्न 6. तरुणों को संसार कैसा दिखाई देता है?
उत्तर: तरुणों को संसार और भविष्य आकर्षक तथा संभावनाओं से भरा हुआ दिखाई देता है।
प्रश्न 7. वृद्धों को अतीत क्यों सुखद लगता है?
उत्तर: वृद्ध अपनी बाल्यावस्था और युवावस्था से दूर हो चुके होते हैं। इसलिए उन्हें अपने बीते जीवन की स्मृतियाँ सुखद लगती हैं।
प्रश्न 8. लेखक ने ए. जी. गार्डिनर का उल्लेख क्यों किया है?
उत्तर: लेखक ने उनके विचार का सहारा लेकर यह स्पष्ट किया है कि लेखन के लिए एक विशेष मानसिक स्थिति और आंतरिक प्रेरणा आवश्यक होती है।
प्रश्न 9. लेखक को समाज-सुधार विषय कठिन क्यों लगा?
उत्तर: समाज-सुधार एक गंभीर और व्यापक विषय है। इस पर प्रभावशाली लेखन के लिए विषय के विभिन्न पक्षों का ज्ञान तथा स्पष्ट विचार आवश्यक है।
प्रश्न 10. ‘क्या लिखूँ?’ निबन्ध की प्रमुख विशेषता क्या है?
उत्तर: इसकी प्रमुख विशेषता यह है कि लेखक ने अपनी लेखन-दुविधा को आत्मीय, रोचक और विनोदपूर्ण शैली में प्रस्तुत किया है।

✍️ महत्वपूर्ण दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. ‘क्या लिखूँ?’ पाठ का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।

‘क्या लिखूँ?’ पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का ललित निबन्ध है। इसमें लेखक ने लेखन की मानसिक प्रक्रिया और लेखक के सामने उत्पन्न होने वाली विषय-चयन की समस्या को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया है।

लेखक बताते हैं कि लिखने के लिए केवल कागज और कलम पर्याप्त नहीं हैं। लेखक के भीतर उमंग, स्फूर्ति और विचारों का आवेग होना चाहिए। इसी मानसिक स्थिति में लेखन सहज और प्रभावशाली बनता है।

लेखक विभिन्न संभावित विषयों पर विचार करते हैं और यह अनुभव करते हैं कि विषय सामने होने पर भी उसके बारे में सार्थक विचार प्रस्तुत करना सरल नहीं है।

इस प्रकार निबन्ध का मूल संदेश है कि श्रेष्ठ लेखन के लिए विचार, अनुभव, अनुभूति और सृजनात्मक प्रेरणा आवश्यक हैं।

प्रश्न 2. ‘क्या लिखूँ?’ शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।

निबन्ध का पूरा कथ्य लेखक की उस स्थिति के इर्द-गिर्द घूमता है जिसमें उन्हें लिखना तो है, लेकिन विषय को लेकर दुविधा बनी हुई है।

लेखक अलग-अलग संभावित विषयों पर विचार करते हैं और यह अनुभव करते हैं कि केवल विषय मिल जाने से लेखन सफल नहीं हो जाता। उसके लिए मन में विचार और अनुभूति होनी चाहिए।

इस प्रकार ‘क्या लिखूँ?’ प्रश्न निबन्ध की केंद्रीय समस्या और लेखक की मानसिक स्थिति दोनों को व्यक्त करता है। अतः शीर्षक अत्यंत उपयुक्त और सार्थक है।

प्रश्न 3. बख्शी जी की भाषा-शैली की विशेषताएँ लिखिए।

बख्शी जी की भाषा सरल, साहित्यिक, प्रवाहपूर्ण और प्रभावशाली है। वे कठिन विचारों को भी सहज ढंग से प्रस्तुत करते हैं।

उनकी शैली में ललित, भावात्मक और विचारात्मक तत्वों का सुंदर समन्वय मिलता है। गंभीर विषयों के बीच व्यंग्य और विनोद का प्रयोग उनकी रचना को रोचक बना देता है।

वे उदाहरणों और आत्मीय ढंग से विचारों को स्पष्ट करते हैं। इसी कारण पाठक निबन्ध से सहज रूप से जुड़ जाता है।

प्रश्न 4. बख्शी जी का जीवन-परिचय एवं साहित्यिक परिचय दीजिए।

पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का जन्म 27 मई 1894 को खैरागढ़ में हुआ। उनके पिता पुन्नालाल बख्शी तथा माता मनोरमा देवी थीं। उनकी प्रारम्भिक शिक्षा खैरागढ़ में हुई और आगे उन्होंने बनारस के सेंट्रल हिन्दू कॉलेज से बी.ए. किया।

उन्होंने अध्यापन और संपादन दोनों क्षेत्रों में कार्य किया। वे ‘सरस्वती’ के सहायक तथा बाद में प्रधान संपादक रहे। ‘छाया’ पत्रिका का संपादन भी उन्होंने किया।

कविता, कहानी, निबन्ध और आलोचना के क्षेत्र में उन्होंने लेखन किया, लेकिन निबन्ध और आलोचना के कारण उन्हें विशेष ख्याति मिली।

सन् 1949 में हिन्दी साहित्य सम्मेलन ने उन्हें ‘साहित्य वाचस्पति’ की उपाधि से सम्मानित किया। सन् 1969 में उन्हें डी.लिट्. की मानद उपाधि मिली। उनका निधन 18 दिसंबर 1971 को हुआ।

प्रश्न 5. तरुण और वृद्ध के दृष्टिकोण में क्या अंतर है?

लेखक के अनुसार तरुणों ने अभी संसार के संघर्षों का पूरा अनुभव नहीं किया होता, इसलिए उन्हें संसार का जीवन सुंदर और आकर्षक दिखाई देता है। उनके सामने भविष्य की संभावनाएँ होती हैं।

इसके विपरीत वृद्ध व्यक्ति अपनी युवावस्था और बाल्यावस्था से दूर हो चुका होता है। इसलिए उसे अपने अतीत की स्मृतियाँ सुखद लगती हैं।

इस प्रकार तरुण भविष्य को लेकर आकर्षित होता है, जबकि वृद्ध अपने अतीत को लेकर भावुक होता है।

प्रश्न 6. लेखक के अनुसार अच्छा साहित्य कैसे जन्म लेता है?

अच्छा साहित्य तभी जन्म लेता है जब लेखक के भीतर किसी विषय के प्रति वास्तविक अनुभूति और विचार हो। केवल बाहरी आदेश या विषय मिलने से उत्कृष्ट रचना नहीं बनती।

लेखक में मानसिक स्फूर्ति, कल्पना, अनुभव, संवेदना और विचारों को भाषा में व्यक्त करने की क्षमता होनी चाहिए। इन सबके समन्वय से प्रभावशाली साहित्य की रचना होती है।

📜 गद्यांश-आधारित महत्वपूर्ण प्रश्न

परीक्षा-टिप: मूल पाठ से गद्यांश दिए जाने पर उत्तर लिखते समय सन्दर्भ → प्रसंग → व्याख्या → विशेष/संदेश का क्रम अपनाएँ।
गद्यांश अभ्यास 1 — लेखन की मानसिक स्थिति

सन्दर्भ: प्रस्तुत भाव ‘क्या लिखूँ?’ नामक ललित निबन्ध से संबंधित है, जिसके लेखक पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी हैं।

प्रसंग: लेखक लेखन के लिए आवश्यक मानसिक स्थिति का वर्णन करते हैं।

व्याख्या: लेखक का आशय है कि लेखन तभी सहज रूप से होता है जब मन में लिखने की तीव्र इच्छा और विचारों का प्रवाह उत्पन्न हो। ऐसी अवस्था में लेखक अपने विचारों को स्वाभाविक रूप से शब्दों में व्यक्त कर सकता है।

संदेश: श्रेष्ठ लेखन के लिए आंतरिक प्रेरणा आवश्यक है।

गद्यांश अभ्यास 2 — तरुण और वृद्ध

सन्दर्भ: प्रस्तुत भाव ‘क्या लिखूँ?’ निबन्ध से संबंधित है।

प्रसंग: लेखक ने तरुण और वृद्ध की मानसिक दृष्टि का अंतर स्पष्ट किया है।

व्याख्या: तरुणों ने संसार के संघर्षों का पूरा अनुभव नहीं किया होता, इसलिए उन्हें संसार और भविष्य आकर्षक दिखाई देते हैं। वृद्ध अपने बीते जीवन को याद करते हैं, इसलिए उन्हें अतीत सुखद लगता है।

निष्कर्ष: व्यक्ति की आयु और अनुभव उसके दृष्टिकोण को प्रभावित करते हैं।

गद्यांश अभ्यास 3 — विषय और विचार

सन्दर्भ: यह भाव पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी के ‘क्या लिखूँ?’ निबन्ध से संबंधित है।

प्रसंग: लेखक विषय मिलने और उस पर अच्छा लिख पाने के अंतर को स्पष्ट करते हैं।

व्याख्या: किसी विषय का केवल नाम जान लेना पर्याप्त नहीं है। लेखक के मन में उस विषय के संबंध में विचार, अनुभव और अनुभूति होनी चाहिए। तभी वह विषय प्रभावशाली रचना का रूप ले सकता है।

🎯 महत्वपूर्ण MCQ — Board Exam 2027

1. ‘क्या लिखूँ?’ के लेखक कौन हैं?

(क) रामचन्द्र शुक्ल
(ख) जयशंकर प्रसाद
(ग) पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी
(घ) राजेन्द्र प्रसाद
✅ सही उत्तर — (ग)
2. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का जन्म कब हुआ?

(क) 27 मई 1894
(ख) 15 अगस्त 1895
(ग) 12 जनवरी 1900
(घ) 18 दिसंबर 1894
✅ सही उत्तर — (क)
3. बख्शी जी का जन्म कहाँ हुआ था?

(क) वाराणसी
(ख) खैरागढ़
(ग) प्रयागराज
(घ) लखनऊ
✅ सही उत्तर — (ख)
4. बख्शी जी के पिता का नाम क्या था?

(क) पुन्नालाल बख्शी
(ख) रघुनन्दन बख्शी
(ग) उमराव बख्शी
(घ) रविशंकर बख्शी
✅ सही उत्तर — (क)
5. बख्शी जी की माता का नाम क्या था?

(क) महादेवी
(ख) मनोरमा देवी
(ग) लक्ष्मी देवी
(घ) सरस्वती देवी
✅ सही उत्तर — (ख)
6. बख्शी जी ने उच्च शिक्षा कहाँ प्राप्त की?

(क) सेंट्रल हिन्दू कॉलेज, बनारस
(ख) इलाहाबाद विश्वविद्यालय
(ग) अलीगढ़ विश्वविद्यालय
(घ) कलकत्ता विश्वविद्यालय
✅ सही उत्तर — (क)
7. बख्शी जी किस पत्रिका के संपादक रहे?

(क) सरस्वती
(ख) हंस
(ग) माधुरी
(घ) ज्ञानोदय
✅ सही उत्तर — (क)
8. बख्शी जी को कौन-सी उपाधि मिली?

(क) राष्ट्रकवि
(ख) साहित्य वाचस्पति
(ग) भारतेंदु
(घ) महाकवि
✅ सही उत्तर — (ख)
9. ‘क्या लिखूँ?’ किस विधा की रचना है?

(क) कहानी
(ख) नाटक
(ग) ललित निबन्ध
(घ) उपन्यास
✅ सही उत्तर — (ग)
10. लेखन के लिए क्या आवश्यक है?

(क) केवल कागज
(ख) केवल कलम
(ग) मानसिक स्फूर्ति और विचार
(घ) केवल विषय
✅ सही उत्तर — (ग)
11. ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ का संबंध किससे है?

(क) दूर की वस्तु आकर्षक लगने से
(ख) संगीत से
(ग) खेल से
(घ) यात्रा से
✅ सही उत्तर — (क)
12. ‘क्या लिखूँ?’ पाठ की प्रमुख विशेषता क्या है?

(क) आत्मीयता और विनोदपूर्ण प्रस्तुति
(ख) केवल वैज्ञानिक भाषा
(ग) केवल संवाद
(घ) केवल कविता
✅ सही उत्तर — (क)
13. बख्शी जी की प्रमुख पहचान क्या थी?

(क) वैज्ञानिक
(ख) निबन्धकार और आलोचक
(ग) अभिनेता
(घ) चित्रकार
✅ सही उत्तर — (ख)
14. बख्शी जी का निधन कब हुआ?

(क) 18 दिसंबर 1971
(ख) 27 मई 1971
(ग) 15 अगस्त 1970
(घ) 18 दिसंबर 1969
✅ सही उत्तर — (क)

⚡ अति लघु उत्तरीय प्रश्न

1. ‘क्या लिखूँ?’ के लेखक कौन हैं?
उत्तर: पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी।
2. बख्शी जी का जन्म कब हुआ?
उत्तर: 27 मई 1894 को।
3. बख्शी जी का जन्मस्थान क्या है?
उत्तर: खैरागढ़।
4. बख्शी जी की माता का नाम क्या था?
उत्तर: मनोरमा देवी।
5. बख्शी जी के पिता का नाम क्या था?
उत्तर: पुन्नालाल बख्शी।
6. बख्शी जी की पत्नी का नाम क्या था?
उत्तर: लक्ष्मी देवी।
7. बख्शी जी की प्रमुख पहचान क्या थी?
उत्तर: निबन्धकार और आलोचक।
8. ‘क्या लिखूँ?’ किस प्रकार का निबन्ध है?
उत्तर: ललित निबन्ध।
9. बख्शी जी को ‘साहित्य वाचस्पति’ की उपाधि कब मिली?
उत्तर: 1949 ई. में।
10. बख्शी जी का निधन कब हुआ?
उत्तर: 18 दिसंबर 1971 को।

🔥 Board Exam 2027 — Most Important Questions

⭐ परीक्षा के लिए विशेष रूप से तैयार करें

  1. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का जीवन-परिचय एवं साहित्यिक परिचय लिखिए।
  2. बख्शी जी की भाषा-शैली की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
  3. ‘क्या लिखूँ?’ पाठ का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
  4. ‘क्या लिखूँ?’ शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
  5. लेखक के अनुसार लिखने की विशेष मानसिक स्थिति क्या है?
  6. लेखन में अनुभूति और विचारों का क्या महत्व है?
  7. ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ का आशय स्पष्ट कीजिए।
  8. तरुण और वृद्ध के दृष्टिकोण में क्या अंतर है?
  9. लेखक को समाज-सुधार विषय पर लिखने में क्या कठिनाई आती है?
  10. ‘क्या लिखूँ?’ निबन्ध की भाषा-शैली की विशेषताएँ बताइए।
  11. बख्शी जी के साहित्यिक योगदान पर प्रकाश डालिए।
  12. लेखक ने विषय और मनोभावों के संबंध को किस प्रकार स्पष्ट किया है?

📌 Quick Revision — एक नजर में

क्या लिखूँ? पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी ललित निबन्ध लेखन की मानसिक स्थिति उमंग स्फूर्ति विचार अनुभूति सरस्वती साहित्य वाचस्पति

🎯 30 सेकंड Revision:
  • पाठ — ‘क्या लिखूँ?’
  • लेखक — पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी
  • विधा — ललित निबन्ध
  • जन्म — 27 मई 1894
  • जन्मस्थान — खैरागढ़
  • पिता — पुन्नालाल बख्शी
  • माता — मनोरमा देवी
  • शिक्षा — बी.ए., सेंट्रल हिन्दू कॉलेज, बनारस
  • प्रमुख कार्य — अध्यापन एवं संपादन
  • पत्रिका — सरस्वती
  • उपाधि — साहित्य वाचस्पति
  • निधन — 18 दिसंबर 1971
  • केंद्रीय विचार — श्रेष्ठ लेखन के लिए मानसिक स्फूर्ति, विचार और अनुभूति आवश्यक हैं।

✅ अध्याय का निष्कर्ष

‘क्या लिखूँ?’ एक ऐसा ललित निबन्ध है जिसमें लेखक ने लेखन की प्रक्रिया को अपने अनुभवों और विचारों के माध्यम से रोचक बनाया है।

पाठ हमें यह समझाता है कि केवल विषय मिलने से अच्छा लेखक नहीं बना जा सकता। लेखन के लिए मन में विचारों की स्पष्टता, अनुभूति, संवेदना, स्फूर्ति और सृजनात्मक प्रेरणा आवश्यक है।

अतः अच्छे साहित्य का आधार केवल विषय नहीं, बल्कि लेखक की विचारशीलता और उसकी अनुभूति है।

📚 UP Board Class 10 Hindi | Session 2026–27
“क्या लिखूँ?” — पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी
🎯 Board Exam 2027 Preparation
Tags

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

Top Post Ad

Below Post Ad

Ads Area