Home गीता सार गीता श्लोक अनुवाद Jakhai Baba UP Board Material GS Kitaab

Ads Area

Class 12th Chemistry Chapter-9 : ऐमीन (Amines)

🧪 NCERT कक्षा 12 रसायन विज्ञान • सत्र 2026-27 (हिंदी माध्यम)
⚗️ अध्याय - 9 (CHAPTER 9) 🧪

ऐमीन
(Amines)

🔬 मुख्य बोर्ड अभिक्रियाएँ व परीक्षण (Key Topics)
🧪 1°, 2°, 3° ऐमीन व IUPAC नामकरण 🔥 हॉफमान ब्रोमामाइड अभिक्रिया ⚙️ गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण ⚗️ ऐमीन की क्षारीय प्रकृति व हिंसबर्ग परीक्षण
⚗️ R-NH₂  |  🟣 R₂NH  |  🔬 R₃N  |  🧲 C₆H₅NH₂ (ऐनिलीन)
📝 100% बोर्ड स्पेशल हिंदी हस्तलिखित नोट्स 🌐 Sunil Learning Point

🧪 टॉपिक 1: ऐमीन - परिचय, वर्गीकरण, IUPAC नामकरण व विरचन की विधियाँ

📌 1. परिचय एवं वर्गीकरण (Classification & Structure)

अमोनिया (NH₃) के एक या अधिक हाइड्रोजन परमाणुओं को ऐल्किल या एराइल समूहों द्वारा प्रतिस्थापित करने पर प्राप्त कार्बनिक यौगिक ऐमीन (Amines) कहलाते हैं। नाइट्रोजन पर एक **एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (Lone Pair)** उपस्थित रहता है।

प्रतिस्थापित H परमाणुओं की संख्या के आधार पर वर्गीकरण:
प्राथमिक ऐमीन (1°): R-NH₂ (उदा. CH₃NH₂ - मेथेनामीन / मेथिल ऐमीन)
द्वितीयक ऐमीन (2°): R₂NH (उदा. (CH₃)₂NH - N-मेथिलमेथेनामीन)
तृतीयक ऐमीन (3°): R₃N (उदा. (CH₃)₃N - N,N-डाइमेथिलमेथेनामीन)
ऐरोमैटिक ऐमीन: C₆H₅NH₂ (एनिलीन / बेन्ज़ेनामीन)।

⚙️ 2. ऐमीन के निर्माण की सामान्य विधियाँ

1. नाइट्री यौगिकों के अपचयन से:
R-NO₂ + 3H₂ (Ni/Pd या Fe + HCl)R-NH₂ + 2H₂O
(ऐरोमैटिक ऐमीन/एनिलीन बनाने हेतु Fe + HCl सबसे उपयुक्त है।)
2. नाइट्राइल (R-CN) के अपचयन से:
R-CN + 4[H] (LiAlH₄ या Na/C₂H₅OH)R-CH₂-NH₂
3. ऐमाइड के अपचयन से:
R-CONH₂ + 4[H] (LiAlH₄ / H₂O)R-CH₂-NH₂ + H₂O

🔥 3. बोर्ड स्पेशल: शुद्ध 1° ऐमीन बनाने की नाम वाली अभिक्रियाएँ

1. गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण (Gabriel Phthalimide):
• थैलिमाइड की KOH से क्रिया कराकर पोटैशियम थैलिमाइड बनाते हैं, जो ऐल्किल हैलाइड (R-X) से क्रिया कर N-ऐल्किल थैलिमाइड देता है। क्षारीय जल-अपघटन करने पर **शुद्ध प्राथमिक ऐलिफैटिक ऐमीन (R-NH₂)** प्राप्त होती है।
(नोट: इस विधि द्वारा ऐरोमैटिक 1° ऐमीन जैसे एनिलीन नहीं बनाई जा सकती!)
2. हॉफमान ब्रोमामाइड निम्नीकरण (Hoffmann Bromamide Degradation):
• जब एसिड ऐमाइड (R-CONH₂) को ब्रोमीन (Br₂) तथा जलीय/ऐल्कोहॉलीय NaOH के साथ गर्म किया जाता है, तो एक कार्बन कम वाला 1° ऐमीन बनता है:
R-CONH₂ + Br₂ + 4NaOH → R-NH₂ + Na₂CO₃ + 2NaBr + 2H₂O

🔥 बोर्ड परीक्षा विशेष प्रश्न (Board Hot Conceptual Questions)

प्रश्न 1: गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण द्वारा ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन (उदा. एनिलीन) क्यों नहीं बनाई जा सकती?
उत्तर: क्योंकि एराइल हैलाइड (Ar-X) में C-X आबंध में अनुनाद के कारण आंशिक द्विआबंध लक्षण होता है, जिससे यह थैलिमाइड ऋणायन के साथ आसानी से नाभिकरागी प्रतिस्थापन (SN2) अभिक्रिया नहीं करता।
प्रश्न 2: हॉफमान ब्रोमामाइड अभिक्रिया को "निम्नीकरण (Degradation)" अभिक्रिया क्यों कहते हैं?
उत्तर: क्योंकि इस अभिक्रिया में प्राप्त होने वाली प्राथमिक ऐमीन (R-NH₂) में अभिकर्मक ऐमाइड (R-CONH₂) की तुलना में **एक कार्बन परमाणु कम** होता है।
🎓 Complete Chemistry Notes & Board Special Numericals | Sunil Learning Point

टॉपिक 2: ऐमीन की क्षारीय प्रकृति, पहचान परीक्षण एवं रासायनिक गुणधर्म

📌 1. ऐमीन की क्षारीय सामर्थ्य (Basic Character of Amines)

नाइट्रोजन परमाणु पर उपस्थित एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (Lone Pair) के कारण ऐमीन लुईस क्षार (Lewis Base) की भाँति व्यवहार करते हैं।

🔥 बोर्ड स्पेशल: क्षारीय सामर्थ्य का क्रम (Order of Basicity):
1. ऐलिफैटिक ऐमीन vs अमोनिया vs एनिलीन:
  • ऐलिफैटिक ऐमीन (+I प्रभाव के कारण) > अमोनिया (NH₃) > एनिलीन (ऐरोमैटिक ऐमीन)।
  (एनिलीन में N का एकाकी युग्म बेंजीन वलय के साथ अनुनाद में भाग लेता है, अतः यह सबसे कम क्षारीय है।)

2. जलीय विलयन में ऐलिफैटिक ऐमीन की क्षारीयता का क्रम:
  • मेथिल श्रेणी (-CH₃): 2° > 1° > 3° > NH₃   (CH₃)₂NH > CH₃NH₂ > (CH₃)₃N > NH₃
  • एथिल श्रेणी (-C₂H₅): 2° > 3° > 1° > NH₃   (C₂H₅)₂NH > (C₂H₅)₃N > C₂H₅NH₂ > NH₃

🧪 2. 1°, 2° एवं 3° ऐमीन में विभेद हेतु पहचान परीक्षण

1. कार्बिलऐमीन परीक्षण (Carbylamine / Isocyanide Test):
केवल 1° ऐमीन (ऐलिफैटिक व ऐरोमैटिक) CHCl₃ तथा ऐल्कोहॉलीय KOH के साथ गर्म करने पर **अत्यंत दुर्गन्धयुक्त आइसोसायनाइड (R-NC)** बनाते हैं:
R-NH₂ + CHCl₃ + 3KOH (Alc.) → R-NC + 3KCl + 3H₂O
(2° एवं 3° ऐमीन यह परीक्षण नहीं देते हैं।)
2. हिंसबर्ग परीक्षण (Hinsberg Test):
हिंसबर्ग अभिकर्मक: बेंजीन सल्फ़ोनिल क्लोराइड (C₆H₅SO₂Cl)
1° ऐमीन: उत्पाद बनाता है जो NaOH में घुलनशील होता है।
2° ऐमीन: उत्पाद बनाता है जो NaOH में अघुलनशील होता है।
3° ऐमीन: कोई अभिक्रिया नहीं करता।

⚡ 3. एनिलीन (C₆H₅NH₂) की इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ

1. ब्रोमीनीकरण (Bromination):
एनिलीन ब्रोमीन जल (Br₂ water) के साथ तुरंत अभिक्रिया करके **2,4,6-ट्राइब्रोमोएनिलीन का सफेद अवक्षेप (White Ppt)** देती है।
2. नाइट्रीकरण (Nitration):
प्रबल अम्लीय माध्यम (HNO₃/H₂SO₄) में एनिलीन प्रोटॉन ग्रहण करके एनिलीनियम आयन (मेटा-निर्देशक) बना लेती है, जिससे **51% पैरा, 47% मेटा तथा 2% ऑर्थो** उत्पाद का अनोखा मिश्रण प्राप्त होता है।

🔥 बोर्ड परीक्षा विशेष प्रश्न (Board Important Conceptual Questions)

प्रश्न 1: एनिलीन (Aniline) अमोनिया (NH₃) से कम क्षारीय क्यों होती है?
उत्तर: एनिलीन में नाइट्रोजन पर उपस्थित एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (Lone Pair) बेंजीन वलय के साथ अनुनाद (Resonance) में भाग लेता है, जिससे वह प्रोटॉन ग्रहण करने के लिए आसानी से उपलब्ध नहीं होता।
प्रश्न 2: एनिलीन के केवल पैरा-नाइट्रोएनिलीन उत्पाद बनाने हेतु -NH₂ समूह का रक्षण (Protection) कैसे करते हैं?
उत्तर: एनिलीन की पाइरीडीन की उपस्थिति में ऐसीटिक एनहाइड्राइड [(CH₃CO)₂O] से क्रिया कराकर **ऐसीटैनिलाइड** बनाकर -NH₂ समूह को सुरक्षित करते हैं, तत्पश्चात नाइट्रीकरण करके जल-अपघटन करते हैं।
🎓 Complete Chemistry Notes & Board Special Numericals | Sunil Learning Point

🧪 टॉपिक 3: डाइऐज़ोनियम लवण - विरचन, अभिक्रियाएँ एवं युग्मन (Coupling Reaction)

📌 1. डायऐज़ोटीकरण (Diazotisation Reaction) एवं स्थायित्व

प्राथमिक ऐरोमैटिक ऐमीन (एनिलीन) की NaNO₂ + HCl (HNO₂) के साथ 273 - 278 K (0° - 5°C) ताप पर अभिक्रिया कराने पर **बेंजीन डाइऐजोनियम क्लोराइड (C₆H₅N₂⁺Cl⁻)** बनता है। इस प्रक्रिया को डायऐज़ोटीकरण कहते हैं।

समीकरण: C₆H₅NH₂ + NaNO₂ + 2HCl (273-278 K) → C₆H₅N₂⁺Cl⁻ + NaCl + 2H₂O

🔥 स्थायित्व (Stability):
ऐरोमैटिक डाइऐज़ोनियम लवण: बेंजीन वलय के साथ अनुनाद (Resonance) के कारण 0°–5°C ताप पर विलयन में स्थायी रहते हैं।
ऐलिफैटिक डाइऐज़ोनियम लवण: अत्यंत अस्थायी होते हैं और तुरंत टूटकर N₂ gas निकालते हैं तथा ऐल्कोहॉल बनाते हैं।

⚙️ 2. डाइऐज़ोनियम समूह (-N₂⁺Cl⁻) के प्रतिस्थापन की अभिक्रियाएँ

1. सैंडमायर अभिक्रिया (Sandmeyer):
Cu₂Cl₂/HCl या Cu₂Br₂/HBr या CuCN/KCN से क्रिया द्वारा क्रमशः **क्लोरोबेंजीन, ब्रोमोबेंजीन या साइनोबेंजीन** प्राप्त होता है।
2. गटरमान अभिक्रिया (Gattermann):
कॉपर चूर्ण (Cu dust) तथा HCl / HBr की उपस्थिति में गर्म करने पर **क्लोरोबेंजीन या ब्रोमोबेंजीन** बनता है।
3. बलज़-शीमान अभिक्रिया (Balz-Schiemann):
HBF₄ (फ्लोरोबोराइक अम्ल) से क्रिया कराकर बने अवक्षेप को गर्म करने पर **फ्लोरोबेंजीन (C₆H₅F)** बनता है।
4. बेंजीन में अपचयन:
H₃PO₂ (हाइपोफॉस्फोरस अम्ल) या C₂H₅OH के साथ अभिक्रिया कराने पर डाइऐजोनियम लवण अपचयित होकर **बेंजीन (C₆H₆)** देता है।

🎨 3. युग्मन अभिक्रियाएँ (Coupling Reactions - ऐज़ो रंजक)

डाइऐज़ोनियम लवण फिनॉल या एनिलीन जैसे इलेक्ट्रॉन धनी यौगिकों के साथ क्रिया करके **ऐज़ो यौगिक (-N=N-)** बनाते हैं, जो तीव्र रंगीन रंजक (Dyes) होते हैं।

1. फिनॉल के साथ युग्मन (pH 9-10):
C₆H₅N₂⁺Cl⁻ + C₆H₅OH (OH⁻, pH 9-10)p-हाइड्रॉक्सीऐज़ोबेंजीन (नारंगी रंजक / Orange Dye)
2. एनिलीन के साथ युग्मन (pH 4-5):
C₆H₅N₂⁺Cl⁻ + C₆H₅NH₂ (H⁺, pH 4-5)p-ऐमीनोऐज़ोबेंजीन (पीला रंजक / Yellow Dye)

🔥 बोर्ड परीक्षा विशेष प्रश्न (Board Hot Conceptual Questions)

प्रश्न 1: डायऐज़ोटीकरण (Diazotisation) में तापमान 0°–5°C (273–278 K) ही क्यों रखा जाता है?
उत्तर: क्योंकि बेंजीन डाइऐजोनियम क्लोराइड उच्च तापमान पर अस्थायी होता है और जल से क्रिया करके तुरंत **फिनॉल (C₆H₅OH)** तथा N₂ गैस में अपघटित हो जाता है।
प्रश्न 2: एरोमैटिक संश्लेषण में डाइऐज़ोनियम लवणों का क्या महत्व है?
उत्तर: फ्लोरोबेंजीन, आयडोबेंजीन, साइनोबेंजीन तथा फिनॉल आदि यौगिकों को बेंजीन वलय पर सीधे प्रतिस्थापित करना अत्यंत कठिन होता है, किन्तु डाइऐज़ोनियम लवण के माध्यम से इन्हें आसानी से तथा उच्च लब्धि (yield) में बनाया जा सकता है।
🎓 Complete Chemistry Notes & Board Special Numericals | Sunil Learning Point

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

Top Post Ad

Below Post Ad

Ads Area