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Class 12th Chemistry Chapter-10 : जैव-अणु (Biomolecules)

🧪 NCERT कक्षा 12 रसायन विज्ञान • सत्र 2026-27 (हिंदी माध्यम)
⚗️ अध्याय - 10 (CHAPTER 10) 🧬

जैव-अणु
(Biomolecules)

🔬 मुख्य बोर्ड टॉपिक्स व संरचनाएँ (Key Topics)
🌾 कार्बोहाइड्रेट व ग्लूकोज 🥩 प्रोटीन व पेप्टाइड आबंध 🧬 DNA एवं RNA संरचना 💊 विटामिन व एंजाइम
🧬 C₆H₁₂O₆ (ग्लूकोज)  |  🟣 ऐमीनो अम्ल  |  🔬 न्यूक्लिक अम्ल  |  🧲 ज़्विटर आयन
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🌾 टॉपिक 1: कार्बोहाइड्रेट एवं ग्लूकोज (संरचना व अभिक्रियाएँ)

📌 1. कार्बोहाइड्रेट - परिभाषा एवं वर्गीकरण

वे ध्रुवण घूर्णक (Optically Active) पॉलीहाइड्रॉक्सी ऐल्डिहाइड या कीटोन अथवा वे पदार्थ जो जल-अपघटित होकर ऐसा यौगिक देते हैं, कार्बोहाइड्रेट कहलाते हैं।

जल-अपघटन के आधार पर वर्गीकरण:
मोनोसैकेराइड (Monosaccharides): सरलतम कार्बोहाइड्रेट जिनका जल-अपघटन नहीं होता (उदा. ग्लूकोज, फ्रक्टोज, राइबोज)।
ओलिगोसैकेराइड (Oligosaccharides): जल-अपघटन पर 2 से 10 मोनोसैकेराइड अणु देते हैं। उदा. डाइसैकेराइड (सुक्रोज, माल्टोज, लैक्टोज)।
पॉलीसैकेराइड (Polysaccharides): जल-अपघटन पर अत्यधिक संख्या में मोनोसैकेराइड देते हैं (उदा. स्टार्च, सेलुलोज, ग्लाइकोजन)।

🔥 अपचायी व अनपचायी शर्करा (Reducing vs Non-Reducing Sugars):
अपचायी शर्करा (Reducing): जिनमें मुक्त ऐल्डिहाइड (-CHO) या कीटोन (>C=O) समूह उपस्थित होता है तथा जो टॉलेन व फेलिंग अभिकर्मक को अपचयित करती हैं (उदा. सभी मोनोसैकेराइड, माल्टोज, लैक्टोज)।
अनपचायी शर्करा (Non-reducing): जिनमें ऐल्डिहाइड/कीटोन समूह आबंधित रहते हैं (उदा. सुक्रोज / Cane Sugar)।

🧪 2. ग्लूकोज (C₆H₁₂O₆) की विवृत (खुली) श्रृंखला संरचना सिद्ध करने वाली अभिक्रियाएँ

ग्लूकोज एक **ऐल्डोहेक्सोस (Aldohexose)** है। इसकी संरचना निम्न रासायनिक अभिक्रियाओं द्वारा सिद्ध की जाती है:

1. HI के साथ लम्बे समय तक गर्म करना:
ग्लूकोज + HI (Δ)n-हेक्सेन (CH₃-CH₂-CH₂-CH₂-CH₂-CH₃)
(यह सिद्ध करता है कि सभी 6 कार्बन सीधे एक सीधी श्रृंखला में जुड़े हैं।)
2. ब्रोमीन जल (Br₂ water) द्वारा ऑक्सीकरण:
ग्लूकोज + Br₂/H₂O → ग्लूकोनिक अम्ल (Gluconic Acid)
(यह सिद्ध करता है कि ग्लूकोज में एक -CHO (ऐल्डिहाइड) समूह उपस्थित है।)
3. सांद्र HNO₃ द्वारा ऑक्सीकरण:
ग्लूकोज + HNO₃ → सैकैरिक अम्ल (Saccharic Acid / dicarboxylic acid)
(यह सिद्ध करता है कि इसमें 1° ऐल्कोहॉलिक (-CH₂OH) समूह उपस्थित है।)
4. ऐसीटिक एनहाइड्राइड से क्रिया:
ग्लूकोज + 5(CH₃CO)₂O → ग्लूकोज पेंटाऐसीटेट
(यह सिद्ध करता है कि ग्लूकोज में 5 अलग-अलग कार्बनों पर 5 -OH समूह उपस्थित हैं।)

🔄 3. ग्लूकोज की चक्रीय संरचना, एनोमर (Anomers) एवं परिवर्ती घूर्णन

ग्लूकोज की खुली संरचना Schiff परीक्षण तथा NaHSO₃ के साथ योगात्मक यौगिक न बनना स्पष्ट नहीं कर पाती। C-5 पर उपस्थित -OH समूह C-1 कार्बोनिल समूह के साथ आंतरिक **हेमीऐसीटैल (Hemiacetal)** बनाकर 6-सदस्यीय चक्रीय पायरेनोस वलय (Pyranose Ring) बनाता है।

🔥 एनोमर (Anomers - α-ग्लूकोज एवं β-ग्लूकोज):
• C-1 (एनोमेरी कार्बन) पर -OH समूह के विन्यास में भिन्नता रखने वाले स्टीरियोआइसोमर **एनोमर** कहलाते हैं।
α-D-ग्लूकोज: C-1 पर -OH समूह दाईं ओर (हॉवर्थ सूत्र में नीचे की तरफ) होता है।
β-D-ग्लूकोज: C-1 पर -OH समूह बाईं ओर (हॉवर्थ सूत्र में ऊपर की तरफ) होता है।
परिवर्ती ध्रुवण घूर्णन (Mutarotation): ताजे बने α-ग्लूकोज (+112°) या β-ग्लूकोज (+19°) के जलीय विलयन का विशिष्ट घूर्णन समय के साथ परिवर्तित होकर साम्यावस्था मान (+52.7°) पर स्थिर हो जाना परिवर्ती घूर्णन कहलाता है।

🔥 बोर्ड परीक्षा विशेष प्रश्न (Board Important Questions)

प्रश्न 1: सुक्रोज (C₁₂H₂₂O₁₁) एक अनपचायी शर्करा (Non-reducing Sugar) क्यों है?
उत्तर: क्योंकि सुक्रोज में α-D-ग्लूकोज का C-1 तथा β-D-फ्रक्टोज का C-2 (दोनों के अपचायी ऐल्डिहाइड व कीटोन केंद्र) आपस में **ग्लाइकोसाइडी आबंध (Glycosidic linkage)** द्वारा जुड़े रहते हैं, जिससे कोई मुक्त कार्बोनिल समूह शेष नहीं रहता।
प्रश्न 2: अपभ्रष्ट या प्रतीप शर्करा (Invert Sugar) क्या है?
उत्तर: सुक्रोज स्वयं दक्षिण ध्रुवण घूर्णक (+66.5°) होता है, किन्तु जल-अपघटन के बाद प्राप्त मिश्रण [ग्लूकोज (+52.5°) + फ्रक्टोज (-92.4°)] वाम ध्रुवण घूर्णक (-39.9°) हो जाता है। घूर्णन का चिन्ह (+ से -) बदल जाने के कारण इस मिश्रण को **प्रतीप/अपभ्रष्ट शर्करा** कहते हैं।
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🥩 टॉपिक 2: प्रोटीन एवं ऐमीनो अम्ल - संरचना, ज़्विटर आयन व विकृतीकरण

📌 1. α-ऐमीनो अम्ल एवं ज़्विटर आयन (Zwitter Ion)

प्रोटीन α-ऐमीनो अम्लों के बहुलक (Polymers) होते हैं। α-ऐमीनो अम्ल में एक ही कार्बन पर ऐमीनो (-NH₂) तथा कार्बोक्सिलिक (-COOH) दोनों समूह उपस्थित रहते हैं।

🔥 ज़्विटर आयन (Zwitter Ion):
जलीय विलयन में -COOH समूह एक प्रोटॉन (H⁺) त्यागता है तथा -NH₂ समूह उस प्रोटॉन को ग्रहण कर लेता है, जिससे एक ही अणु पर धनावेश तथा ऋणावेश दोनों आ जाते हैं। इस द्विध्रुवीय आयन को ज़्विटर आयन (H₃N⁺-CHR-COO⁻) कहते हैं। ज़्विटर आयन प्रकृति में उभयधर्मी (Amphoteric) होते हैं।

ऐमीनो अम्लों का वर्गीकरण:
आवश्यक ऐमीनो अम्ल (Essential Amino Acids): जिनका संश्लेषण मानव शरीर में नहीं होता और इन्हें भोजन द्वारा लेना आवश्यक है (उदा. वेलीन, ल्यूसीन, लाइसिन)।
अनावश्य​क ऐमीनो अम्ल (Non-Essential): इनका निर्माण शरीर में ही हो जाता है (उदा. ग्लाइसीन, एलानीन)।
(नोट: ग्लाइसीन को छोड़कर सभी प्राकृतिक α-ऐमीनो अम्ल प्रकाशिक सक्रिय / Optically Active होते हैं।)

🔗 2. पेप्टाइड आबंध एवं प्रोटीन का वर्गीकरण

पेप्टाइड आबंध (Peptide Linkage): दो ऐमीनो अम्ल अणुओं के मध्य एक के -COOH समूह तथा दूसरे के -NH₂ समूह में से जल (H₂O) का अणु निकलने पर बना -CO-NH- आबंध पेप्टाइड आबंध कहलाता है।

1. रेशेदार प्रोटीन (Fibrous Proteins):
• पोलिपैप्टाइड श्रृंखलाएँ समानान्तर होती हैं और हाइड्रोजन तथा डाइसल्फ़ाइड आबंधों द्वारा जुड़ी रहती हैं।
• ये जल में **अघुलनशील** होते हैं (उदा. किरेटिन - बाल/ऊन में, मायोसिन - मांसपेशियों में)।
2. गोलिकाकार प्रोटीन (Globular Proteins):
• पोलिपैप्टाइड श्रृंखलाएँ आपस में कुण्डलित होकर गोलीय रूप धारण कर लेती हैं।
• ये सामान्यतः जल में **घुलनशील** होते हैं (उदा. इंसुलिन, एल्ब्यूमिन)।

🧪 3. प्रोटीन की संरचना का स्तर एवं विकृतीकरण (Denaturation)

  • प्राथमिक संरचना (1°): ऐमीनो अम्लों का एक निश्चित विशिष्ट क्रम।
  • द्वितीयक संरचना (2°): पोलिपैप्टाइड श्रृंखला का मोड़ या कुण्डल (α-हेलिक्स तथा β-प्लीटेड शीट संरचनाएँ)।
  • तृतीयक संरचना (3°): द्वितीयक संरचना का समग्र त्रिविम वलयन (रेशेदार व गोलिकाकार रूप)।
  • चतुर्थक संरचना (4°): दो या अधिक पॉलीपेप्टाइड उप-इकाइयों का आपेक्षिक स्थान सम्बन्धी विन्यास।
🔥 प्रोटीन का विकृतीकरण (Denaturation of Proteins):
भौतिक परिवर्तन (जैसे ताप बढ़ाना) या रासायनिक परिवर्तन (जैसे pH बदलना) करने पर हाइड्रोजन आबंध टूट जाते हैं, कुण्डली खुल जाती है और प्रोटीन अपनी जैविक सक्रियता खो देता है।
विशेष नोट: विकृतीकरण में 2° तथा 3° संरचनाएँ नष्ट हो जाती हैं, परन्तु प्राथमिक संरचना (1°) अपरिवर्तित रहती है
उदाहरण: उबलने पर अंडे की सफेदी का जमना (Coagulation), दूध का दही में जमना।

🔥 बोर्ड परीक्षा विशेष प्रश्न (Board Hot Conceptual Questions)

प्रश्न 1: ग्लाइसीन (Glycine) को छोड़कर अन्य सभी प्राकृतिक α-ऐमीनो अम्ल प्रकाशिक सक्रिय क्यों होते हैं?
उत्तर: क्योंकि ग्लाइसीन (H₂N-CH₂-COOH) में α-कार्बन पर दो H जुड़े होने के कारण असममित (Chiral) कार्बन अनुपस्थित होता है, जबकि अन्य सभी ऐमीनो अम्लों में α-कार्बन पर चार भिन्न समूह जुड़े होने से असममित कार्बन उपस्थित रहता है।
प्रश्न 2: प्रोटीन के विकृतीकरण से क्या अभिप्राय है? विकृतीकरण होने पर प्रोटीन की कौन सी संरचना सुरक्षित रहती है?
उत्तर: ताप या pH में परिवर्तन के कारण प्रोटीन का अपनी प्राकृतिक जैविक सक्रियता खो देना विकृतीकरण कहलाता है। विकृतीकरण के दौरान **प्राथमिक संरचना (Primary Structure)** पूर्णतः सुरक्षित रहती है।
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🧬 टॉपिक 3: न्यूक्लिक अम्ल (DNA व RNA), विटामिन एवं एंजाइम

📌 1. न्यूक्लिक अम्ल (Nucleic Acids) - DNA एवं RNA

न्यूक्लिक अम्ल **न्यूक्लियोटाइड्स के बहुलक (Polynucleotides)** होते हैं जो आनुवंशिक सूचनाओं के संवहन व प्रोटीन संश्लेषण का कार्य करते हैं।

🔥 न्यूक्लियोसाइड एवं न्यूक्लियोटाइड में अंतर:
न्यूक्लियोसाइड (Nucleoside): शर्करा (Pentose Sugar) + नाइट्रोजन क्षारक (Nitrogenous Base)
न्यूक्लियोटाइड (Nucleotide): न्यूक्लियोसाइड + फॉस्फेट समूह (Phosphoric Acid)
आबंध: न्यूक्लियोटाइड इकाइयाँ आपस में 3'-5' फॉस्फोडाइएस्टर आबंध (Phosphodiester linkage) द्वारा जुड़ी रहती हैं।
लक्षण DNA (डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल) RNA (राइबोन्यूक्लिक अम्ल)
शर्करा (Sugar) D-2-डीऑक्सीराइबोज शर्करा D-राइबोज शर्करा
नाइट्रोजनी क्षारक एडेनिन (A), ग्वानिन (G), साइटोसिन (C) व थाइमिन (T) एडेनिन (A), ग्वानिन (G), साइटोसिन (C) व युरेसिल (U)
संरचना द्विकुण्डलित (Double Stranded Helix - वाटसन व क्रिक) एकल कुण्डलित (Single Stranded)
मुख्य कार्य आनुवंशिक गुणों का संचरण करना। प्रोटीन का संश्लेषण करना।

💊 2. विटामिन (Vitamins) - वर्गीकरण एवं कमी से होने वाले रोग

1. वसा में घुलनशील विटामिन (Fat Soluble):
विटामिन A, D, E एवं K: ये यकृत व वसीय ऊतकों में संचित रहते हैं।
Vit A: रतौंधी (Night Blindness)
Vit D: रिकेट्स (सूखा रोग)
Vit K: रक्त का थक्का न जमना
2. जल में घुलनशील विटामिन (Water Soluble):
विटामिन B-कॉम्प्लेक्स एवं C: ये मूत्र के साथ उत्सर्जित हो जाते हैं, अतः इन्हें नियमित भोजन में लेना आवश्यक है।
Vit B₁: बेरी-बेरी रोग
Vit C (एस्कॉर्बिक अम्ल): स्कर्वी रोग (मसूड़ों से खून आना)

⚙️ 3. एंजाइम (Enzymes - जैविक उत्प्रेरक)

एंजाइम उच्च अणुभार वाले **गोलिकाकार प्रोटीन (Globular Proteins)** होते हैं, जो जीवधारियों में होने वाली जैव-रासायनिक अभिक्रियाओं की दर को बढ़ाते हैं।

मुख्य विशेषताएँ एवं उदाहरण:
अत्यधिक विशिष्टता (High Specificity): एक एंजाइम केवल एक विशिष्ट अभिक्रिया को ही उत्प्रेरित करता है (ताला-चाबी सिद्धांत / Lock and Key Mechanism)।
इन्वर्टेस (Invertase): सुक्रोज को ग्लूकोज + फ्रक्टोज में बदलता है।
जाइमेस (Zymase): ग्लूकोज को एथिल ऐल्कोहॉल में बदलता है।
यूरिएस (Urease): यूरिया को अमोनिया + CO₂ में अपघटित करता है।

🔥 बोर्ड परीक्षा विशेष प्रश्न (Board Important Questions)

प्रश्न 1: विटामिन C को हमारे शरीर में संचित क्यों नहीं रखा जा सकता?
उत्तर: क्योंकि विटामिन C जल में घुलनशील (Water Soluble) होता है। जल में अत्यधिक घुलनशीलता के कारण यह मूत्र के साथ शरीर से बाहर उत्सर्जित होता रहता है, इसलिए इसे शरीर में संचित नहीं रखा जा सकता और भोजन में नियमित लेना पड़ता है।
प्रश्न 2: DNA में थाइमिन (T) का पूरक (Complementary) क्षारक कौन सा है?
उत्तर: **एडेनिन (A)** थाइमिन का पूरक क्षारक होता है जो दो हाइड्रोजन आबंधों (A=T) द्वारा जुड़ा रहता है, जबकि ग्वानिन (G) साइटोसिन (C) के साथ तीन हाइड्रोजन आबंधों (G≡C) द्वारा जुड़ा रहता है।
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