🧪 टॉपिक 1: ऐल्डीहाइड एवं कीटोन - परिचय, IUPAC नामकरण व विरचन की विधियाँ
📌 1. परिचय एवं कार्बोनिल समूह (>C=O) की प्रकृति
वे कार्बनिक यौगिक जिनमें कार्बोनिल समूह (>C=O) उपस्थित होता है, कार्बोनिल यौगिक कहलाते हैं। यदि कार्बोनिल कार्बन से कम से कम एक H जुड़ा हो तो उसे ऐल्डीहाइड (R-CHO) तथा यदि दोनों संयोजकताएँ ऐल्किल/एराइल समूहों से संतुष्ट हों तो उसे कीटोन (R-CO-R') कहते हैं।
⚡ कार्बोनिल समूह की ध्रुवीय प्रकृति (Polar Nature of >C=O):
• कार्बोनिल कार्बन sp² संकरित तथा समतलीय (Planar) होता है।
• ऑक्सीजन की उच्च विद्युत-ऋणात्मकता के कारण C=O आबंध **अत्यधिक ध्रुवीय (Polar)** होता है। कार्बन पर आंशिक धनावेश (Cδ+) तथा ऑक्सीजन पर आंशिक ऋणावेश (Oδ-) होता है।
• अतः कार्बोनिल कार्बन इलेक्ट्रॉनरागी केन्द्र (Electrophilic Center) की भाँति व्यवहार करता है।
• कार्बोनिल कार्बन sp² संकरित तथा समतलीय (Planar) होता है।
• ऑक्सीजन की उच्च विद्युत-ऋणात्मकता के कारण C=O आबंध **अत्यधिक ध्रुवीय (Polar)** होता है। कार्बन पर आंशिक धनावेश (Cδ+) तथा ऑक्सीजन पर आंशिक ऋणावेश (Oδ-) होता है।
• अतः कार्बोनिल कार्बन इलेक्ट्रॉनरागी केन्द्र (Electrophilic Center) की भाँति व्यवहार करता है।
⚙️ 2. ऐल्डीहाइड एवं कीटोन दोनों के निर्माण की सामान्य विधियाँ
1. ऐल्कोहॉल के ऑक्सीकरण से:
• 1° ऐल्कोहॉल + PCC → R-CHO (ऐल्डीहाइड)
• 2° ऐल्कोहॉल + CrO₃ / K₂Cr₂O₇ → R-CO-R' (कीटोन)
• 1° ऐल्कोहॉल + PCC → R-CHO (ऐल्डीहाइड)
• 2° ऐल्कोहॉल + CrO₃ / K₂Cr₂O₇ → R-CO-R' (कीटोन)
2. ऐल्कोहॉल के विहाइड्रोजनीकरण (Cu, 573 K) से:
• 1° ऐल्कोहॉल + Cu/573 K → R-CHO + H₂↑
• 2° ऐल्कोहॉल + Cu/573 K → R-CO-R' + H₂↑
• 1° ऐल्कोहॉल + Cu/573 K → R-CHO + H₂↑
• 2° ऐल्कोहॉल + Cu/573 K → R-CO-R' + H₂↑
3. ऐल्काइन के जल-योजन से (Kucherov Reaction):
एथाइन (CH≡CH) + H₂O (HgSO₄/H₂SO₄) → CH₃CHO (ऐसीटैल्डिहाइड)
अन्य ऐल्काइन से **कीटोन** प्राप्त होता है।
एथाइन (CH≡CH) + H₂O (HgSO₄/H₂SO₄) → CH₃CHO (ऐसीटैल्डिहाइड)
अन्य ऐल्काइन से **कीटोन** प्राप्त होता है।
🔥 3. बोर्ड स्पेशल: केवल ऐल्डीहाइड/कीटोन बनाने की नाम वाली अभिक्रियाएँ
1. रोजेनमुंड अपचयन (Rosenmund Reduction):
ऐसिड क्लोराइड (R-COCl) का H₂ द्वारा Pd-BaSO₄ उत्प्रेरक की उपस्थिति में अपचयन कराने पर ऐल्डीहाइड बनता है:
R-COCl + H₂ (Pd-BaSO₄/ज़ाइलीन) → R-CHO + HCl
(BaSO₄ उत्प्रेरक विष का कार्य करता है जो आगे ऐल्कोहॉल में अपचयन रोकता है।)
ऐसिड क्लोराइड (R-COCl) का H₂ द्वारा Pd-BaSO₄ उत्प्रेरक की उपस्थिति में अपचयन कराने पर ऐल्डीहाइड बनता है:
R-COCl + H₂ (Pd-BaSO₄/ज़ाइलीन) → R-CHO + HCl
(BaSO₄ उत्प्रेरक विष का कार्य करता है जो आगे ऐल्कोहॉल में अपचयन रोकता है।)
2. स्टीफन अभिक्रिया (Stephen Reaction):
ऐल्किल नाइट्राइल (R-CN) का SnCl₂ + HCl द्वारा अपचयन कराने पर ऐमीन लवण बनता है, जो जल-अपघटन द्वारा ऐल्डीहाइड देता है:
R-CN + SnCl₂ + HCl → R-CH=NH·HCl (H₃O⁺) → R-CHO + NH₄Cl
ऐल्किल नाइट्राइल (R-CN) का SnCl₂ + HCl द्वारा अपचयन कराने पर ऐमीन लवण बनता है, जो जल-अपघटन द्वारा ऐल्डीहाइड देता है:
R-CN + SnCl₂ + HCl → R-CH=NH·HCl (H₃O⁺) → R-CHO + NH₄Cl
3. इटार्ड अभिक्रिया (Etard Reaction):
टॉल्यूइन का क्रोमिल क्लोराइड (CrO₂Cl₂/CS₂) द्वारा ऑक्सीकरण कराने पर क्रोमियम संकुल बनता है, जो जल-अपघटित होकर **बेन्ज़ैल्डिहाइड (C₆H₅CHO)** देता है।
टॉल्यूइन का क्रोमिल क्लोराइड (CrO₂Cl₂/CS₂) द्वारा ऑक्सीकरण कराने पर क्रोमियम संकुल बनता है, जो जल-अपघटित होकर **बेन्ज़ैल्डिहाइड (C₆H₅CHO)** देता है।
4. गाटरमान-कोख अभिक्रिया (Gattermann-Koch):
बेंजीन की निर्जल AlCl₃ / CuCl की उपस्थिति में CO तथा HCl के साथ उच्च दाब पर क्रिया कराने पर **बेन्ज़ैल्डिहाइड** बनता है।
बेंजीन की निर्जल AlCl₃ / CuCl की उपस्थिति में CO तथा HCl के साथ उच्च दाब पर क्रिया कराने पर **बेन्ज़ैल्डिहाइड** बनता है।
🔥 बोर्ड परीक्षा विशेष प्रश्न (Board Important Conceptual Questions)
प्रश्न 1: रोजेनमुंड अपचयन में BaSO₄ का क्या कार्य है?
• उत्तर: BaSO₄ एक **उत्प्रेरक विष (Catalytic Poison)** की भांति कार्य करता है। यह Pd उत्प्रेरक की सक्रियता को कम कर देता है ताकि बना हुआ ऐल्डीहाइड आगे ऐल्कोहॉल में अपचयित न होने पाए।
• उत्तर: BaSO₄ एक **उत्प्रेरक विष (Catalytic Poison)** की भांति कार्य करता है। यह Pd उत्प्रेरक की सक्रियता को कम कर देता है ताकि बना हुआ ऐल्डीहाइड आगे ऐल्कोहॉल में अपचयित न होने पाए।
प्रश्न 2: क्या फॉर्मैल्डिहाइड (HCHO) रोजेनमुंड अपचयन द्वारा बनाया जा सकता है?
• उत्तर: नहीं, क्योंकि फॉर्मिल क्लोराइड (HCOCl) कमरे के ताप पर अत्यधिक अस्थायी होता है और तुरंत decompose होकर CO तथा HCl बना लेता है।
• उत्तर: नहीं, क्योंकि फॉर्मिल क्लोराइड (HCOCl) कमरे के ताप पर अत्यधिक अस्थायी होता है और तुरंत decompose होकर CO तथा HCl बना लेता है।
🎓 Complete Chemistry Notes & Board Special Numericals | Sunil Learning Point
🌐 Website Link:
www.sunillearningpoint.blogspot.com
⚡ टॉपिक 2: ऐल्डीहाइड एवं कीटोन के रासायनिक गुणधर्म (परीक्षण व नाम वाली अभिक्रियाएँ)
📌 1. नाभिकरागी योगात्मक अभिक्रियाएँ (Nucleophilic Addition)
कार्बोनिल समूह (>C=O) की ध्रुवीयता के कारण नाभिकरागी (Nu⁻) धनावेशित कार्बन पर आक्रमण करता है। त्रिद्विम बाधा (Steric Hindrance) तथा +I प्रभाव के कारण ऐल्डीहाइड, कीटोन की तुलना में अधिक क्रियाशील होते हैं।
1. HCN का योग (साइनोहाइड्रिन निर्माण):
>C=O + HCN → >C(OH)(CN) (साइनोहाइड्रिन)
(साइनोहाइड्रिन के जल-अपघटन से α-हाइड्रॉक्सी अम्ल प्राप्त होते हैं।)
>C=O + HCN → >C(OH)(CN) (साइनोहाइड्रिन)
(साइनोहाइड्रिन के जल-अपघटन से α-हाइड्रॉक्सी अम्ल प्राप्त होते हैं।)
2. NaHSO₃ का योग (शोधन परीक्षण):
>C=O + NaHSO₃ → श्वेत क्रिस्टलीय बाइसल्फाइट यौगिक
(ऐल्डीहाइड व कीटोन के पृथक्करण एवं शोधन में प्रयुक्त)
>C=O + NaHSO₃ → श्वेत क्रिस्टलीय बाइसल्फाइट यौगिक
(ऐल्डीहाइड व कीटोन के पृथक्करण एवं शोधन में प्रयुक्त)
3. अमोनिया व्युत्पन्नों (NH₂-Z) से क्रिया:
>C=O + H₂N-Z → >C=N-Z + H₂O
• हाइड्रैज़ीन (NH₂NH₂) → **हाइड्रैज़ोन**
• 2,4-DNP → **2,4-डाइनाइट्रोफ़ेनिलहाइड्रैज़ोन (नारंगी अवक्षेप)**
>C=O + H₂N-Z → >C=N-Z + H₂O
• हाइड्रैज़ीन (NH₂NH₂) → **हाइड्रैज़ोन**
• 2,4-DNP → **2,4-डाइनाइट्रोफ़ेनिलहाइड्रैज़ोन (नारंगी अवक्षेप)**
🔬 2. अपचयन एवं पहचान परीक्षण (Reduction & Distinguishing Tests)
1. क्लेमेंसन अपचयन (Clemmensen Reduction):
>C=O + 4[H] (Zn-Hg / सांद्र HCl) → >CH₂ (ऐल्केन) + H₂O
>C=O + 4[H] (Zn-Hg / सांद्र HCl) → >CH₂ (ऐल्केन) + H₂O
2. वुल्फ-किश्नर अपचयन (Wolff-Kishner):
>C=O + NH₂NH₂ (KOH / एथिलीन ग्लाइकोल, Δ) → >CH₂ (ऐल्केन) + N₂↑
>C=O + NH₂NH₂ (KOH / एथिलीन ग्लाइकोल, Δ) → >CH₂ (ऐल्केन) + N₂↑
🧪 ऐल्डीहाइड एवं कीटोन में विभेद हेतु परीक्षण:
• टॉलेन परीक्षण (Tollens' Test / रजत दर्पण परीक्षण): अमोनियामय सिल्वर नाइट्रेट [Ag(NH₃)₂]⁺ के साथ ऐल्डीहाइड को गर्म करने पर **चमकदार रजत दर्पण (Ag Mirror)** बनता है। (कीटोन यह परीक्षण नहीं देते)।
• फेलिंग परीक्षण (Fehling's Test): फेलिंग विलयन (A + B) के साथ ऐलिफैटिक ऐल्डीहाइड को गर्म करने पर **लाल-भूरा अवक्षेप (Cu₂O)** प्राप्त होता है। (एरोमैटिक ऐल्डीहाइड व कीटोन यह परीक्षण नहीं देते)।
• टॉलेन परीक्षण (Tollens' Test / रजत दर्पण परीक्षण): अमोनियामय सिल्वर नाइट्रेट [Ag(NH₃)₂]⁺ के साथ ऐल्डीहाइड को गर्म करने पर **चमकदार रजत दर्पण (Ag Mirror)** बनता है। (कीटोन यह परीक्षण नहीं देते)।
• फेलिंग परीक्षण (Fehling's Test): फेलिंग विलयन (A + B) के साथ ऐलिफैटिक ऐल्डीहाइड को गर्म करने पर **लाल-भूरा अवक्षेप (Cu₂O)** प्राप्त होता है। (एरोमैटिक ऐल्डीहाइड व कीटोन यह परीक्षण नहीं देते)।
🔥 3. बोर्ड स्पेशल: ऐल्डोल संघनन एवं कैनिज़ारो अभिक्रिया
1. ऐल्डोल संघनन (Aldol Condensation):
• शर्त: कम से कम **एक α-हाइड्रोजन परमाणु** उपस्थित होना चाहिए।
• अभिक्रिया: तनु क्षार (Dil. NaOH) की उपस्थिति में 2 अणु आपस में जुड़कर β-हाइड्रॉक्सी ऐल्डीहाइड/कीटोन बनाते हैं, जो गर्म करने पर जल निकालकर **α,β-असंतृप्त कार्बोनिल (उदा. ब्यूट-2-ईनल)** देते हैं।
• उदाहरण: 2CH₃CHO (Dil. NaOH) → CH₃-CH(OH)-CH₂-CHO (Δ, -H₂O) → CH₃-CH=CH-CHO
• शर्त: कम से कम **एक α-हाइड्रोजन परमाणु** उपस्थित होना चाहिए।
• अभिक्रिया: तनु क्षार (Dil. NaOH) की उपस्थिति में 2 अणु आपस में जुड़कर β-हाइड्रॉक्सी ऐल्डीहाइड/कीटोन बनाते हैं, जो गर्म करने पर जल निकालकर **α,β-असंतृप्त कार्बोनिल (उदा. ब्यूट-2-ईनल)** देते हैं।
• उदाहरण: 2CH₃CHO (Dil. NaOH) → CH₃-CH(OH)-CH₂-CHO (Δ, -H₂O) → CH₃-CH=CH-CHO
2. कैनिज़ारो अभिक्रिया (Cannizzaro Reaction):
• शर्त: **α-हाइड्रोजन परमाणु अनुपस्थित** होना चाहिए (उदा. HCHO, C₆H₅CHO)।
• अभिक्रिया: सांद्र क्षार (50% NaOH) की उपस्थिति में **असमानुपातन (Disproportionation)** होता है—एक अणु ऐल्कोहॉल में अपचयित तथा दूसरा अणु कार्बोक्सिलेट लवण में ऑक्सीकृत होता है।
• उदाहरण: 2HCHO + 50% NaOH → CH₃OH (मेथेनॉल) + HCOONa (सोडियम फ़ॉर्मेट)
• शर्त: **α-हाइड्रोजन परमाणु अनुपस्थित** होना चाहिए (उदा. HCHO, C₆H₅CHO)।
• अभिक्रिया: सांद्र क्षार (50% NaOH) की उपस्थिति में **असमानुपातन (Disproportionation)** होता है—एक अणु ऐल्कोहॉल में अपचयित तथा दूसरा अणु कार्बोक्सिलेट लवण में ऑक्सीकृत होता है।
• उदाहरण: 2HCHO + 50% NaOH → CH₃OH (मेथेनॉल) + HCOONa (सोडियम फ़ॉर्मेट)
🔥 बोर्ड परीक्षा विशेष प्रश्न (Board Hot Conceptual Questions)
प्रश्न 1: ऐसीटैल्डिहाइड (CH₃CHO) तथा बेन्ज़ैल्डिहाइड (C₆H₅CHO) में कौन ऐल्डोल तथा कौन कैनिज़ारो अभिक्रिया देगा?
• CH₃CHO: इसमें α-H उपस्थित है, अतः यह ऐल्डोल संघनन देगा।
• C₆H₅CHO: इसमें α-H अनुपस्थित है, अतः यह कैनिज़ारो अभिक्रिया देगा।
• CH₃CHO: इसमें α-H उपस्थित है, अतः यह ऐल्डोल संघनन देगा।
• C₆H₅CHO: इसमें α-H अनुपस्थित है, अतः यह कैनिज़ारो अभिक्रिया देगा।
प्रश्न 2: फॉर्मैल्डिहाइड (HCHO) तथा ऐसीटोन (CH₃COCH₃) में विभेद हेतु रासायनिक परीक्षण लिखिए।
• उत्तर: **टॉलेन परीक्षण** द्वारा। फॉर्मैल्डिहाइड (ऐल्डीहाइड) टॉलेन अभिकर्मक के साथ गर्म करने पर रजत दर्पण (Ag) देता है, जबकि ऐसीटोन (कीटोन) कोई प्रतिक्रिया नहीं देता।
• उत्तर: **टॉलेन परीक्षण** द्वारा। फॉर्मैल्डिहाइड (ऐल्डीहाइड) टॉलेन अभिकर्मक के साथ गर्म करने पर रजत दर्पण (Ag) देता है, जबकि ऐसीटोन (कीटोन) कोई प्रतिक्रिया नहीं देता।
🎓 Complete Chemistry Notes & Board Special Numericals | Sunil Learning Point
🌐 Website Link:
www.sunillearningpoint.blogspot.com
🧪 टॉपिक 3: कार्बोक्सिलिक अम्ल - विरचन, अम्लीयता एवं HVZ अभिक्रिया
📌 1. परिचय एवं कार्बोक्सिलिक अम्लों की अम्लीय प्रकृति
वे कार्बनिक यौगिक जिनमें कार्बोक्सिल समूह (-COOH) उपस्थित होता है, कार्बोक्सिलिक अम्ल (R-COOH) कहलाते हैं। ये फिनॉल तथा ऐल्कोहॉल की तुलना में अधिक प्रबल अम्लीय होते हैं।
🔥 अम्लीयता एवं प्रतिस्थापियों का प्रभाव (Effect of Substituents on Acidity):
1. प्रोटॉन (H⁺) त्यागने के बाद बना कार्बोक्सिलेट आयन (R-COO⁻) अनुनाद द्वारा अत्यधिक स्थाई हो जाता है (ऋणावेश दो अधिक विद्युत-ऋणात्मक ऑक्सीजन परमाणुओं पर वितरित रहता है)।
2. इलेक्ट्रॉन आकर्षित करने वाले समूह (-I प्रभाव: -F, -Cl, -NO₂): ऋणावेश को घटाकर कार्बोक्सिलेट आयन को स्थाई बनाते हैं तथा अम्लीयता बढ़ाते हैं।
3. इलेक्ट्रॉन दाता समूह (+I प्रभाव: -CH₃, -C₂H₅): ऋणावेश बढ़ाकर कार्बोक्सिलेट आयन को अस्थायी बनाते हैं तथा अम्लीयता घटाते हैं।
• अम्लीयता का क्रम: CF₃COOH > CCl₃COOH > CHCl₂COOH > CH₂ClCOOH > HCOOH > CH₃COOH
1. प्रोटॉन (H⁺) त्यागने के बाद बना कार्बोक्सिलेट आयन (R-COO⁻) अनुनाद द्वारा अत्यधिक स्थाई हो जाता है (ऋणावेश दो अधिक विद्युत-ऋणात्मक ऑक्सीजन परमाणुओं पर वितरित रहता है)।
2. इलेक्ट्रॉन आकर्षित करने वाले समूह (-I प्रभाव: -F, -Cl, -NO₂): ऋणावेश को घटाकर कार्बोक्सिलेट आयन को स्थाई बनाते हैं तथा अम्लीयता बढ़ाते हैं।
3. इलेक्ट्रॉन दाता समूह (+I प्रभाव: -CH₃, -C₂H₅): ऋणावेश बढ़ाकर कार्बोक्सिलेट आयन को अस्थायी बनाते हैं तथा अम्लीयता घटाते हैं।
• अम्लीयता का क्रम: CF₃COOH > CCl₃COOH > CHCl₂COOH > CH₂ClCOOH > HCOOH > CH₃COOH
⚙️ 2. कार्बोक्सिलिक अम्ल के विरचन (निर्माण) की प्रमुख विधियाँ
1. प्राथमिक ऐल्कोहॉल व ऐल्डीहाइड के ऑक्सीकरण से:
R-CH₂OH (KMnO₄ / K₂Cr₂O₇ / H⁺) → R-COOH
(प्रबल ऑक्सीकारक ऐल्कोहॉल को सीधे कार्बोक्सिलिक अम्ल में बदल देते हैं।)
R-CH₂OH (KMnO₄ / K₂Cr₂O₇ / H⁺) → R-COOH
(प्रबल ऑक्सीकारक ऐल्कोहॉल को सीधे कार्बोक्सिलिक अम्ल में बदल देते हैं।)
2. नाइट्राइल एवं एमाइड के जल-अपघटन से:
R-CN (H₂O / H⁺) → R-CONH₂ (H₂O / H⁺, Δ) → R-COOH + NH₃↑
R-CN (H₂O / H⁺) → R-CONH₂ (H₂O / H⁺, Δ) → R-COOH + NH₃↑
3. ग्रिग्नार्ड अभिकर्मक से (कार्बोनीकरण):
R-MgX + O=C=O (शुष्क बर्फ) → [R-COOMgX] (H₃O⁺) → R-COOH + Mg(OH)X
R-MgX + O=C=O (शुष्क बर्फ) → [R-COOMgX] (H₃O⁺) → R-COOH + Mg(OH)X
4. ऐल्किल बेंजीन के ऑक्सीकरण से:
टॉल्यूइन (C₆H₅-CH₃) को क्षारीय KMnO₄ के साथ उबालने पर **बेंजोइक अम्ल (C₆H₅COOH)** प्राप्त होता है।
टॉल्यूइन (C₆H₅-CH₃) को क्षारीय KMnO₄ के साथ उबालने पर **बेंजोइक अम्ल (C₆H₅COOH)** प्राप्त होता है।
⚡ 3. बोर्ड स्पेशल नाम वाली अभिक्रियाएँ (Name Reactions)
1. हेल-वोलहार्ड-ज़ेलिंस्की (HVZ) अभिक्रिया:
• शर्त: α-हाइड्रोजन युक्त कार्बोक्सिलिक अम्ल।
• अभिक्रिया: लाल फास्फोरस (Red P) की उपस्थिति में हैलोजन (Cl₂/Br₂) से क्रिया कराने पर α-हाइड्रोजन हैलोजन द्वारा प्रतिस्थापित होकर **α-हैलो कार्बोक्सिलिक अम्ल** बनता है:
R-CH₂-COOH + X₂ (Red P / H₂O) → R-CH(X)-COOH + HX
• शर्त: α-हाइड्रोजन युक्त कार्बोक्सिलिक अम्ल।
• अभिक्रिया: लाल फास्फोरस (Red P) की उपस्थिति में हैलोजन (Cl₂/Br₂) से क्रिया कराने पर α-हाइड्रोजन हैलोजन द्वारा प्रतिस्थापित होकर **α-हैलो कार्बोक्सिलिक अम्ल** बनता है:
R-CH₂-COOH + X₂ (Red P / H₂O) → R-CH(X)-COOH + HX
2. विकार्बोक्सिलीकरण (Decarboxylation):
कार्बोक्सिलिक अम्ल के सोडियम लवण को सोडा-लाइम (NaOH + CaO) के साथ गर्म करने पर CO₂ गैस निकलती है तथा एक कम कार्बन वाला **ऐल्केन** बनता है:
R-COONa + NaOH (CaO, Δ) → R-H (ऐल्केन) + Na₂CO₃
कार्बोक्सिलिक अम्ल के सोडियम लवण को सोडा-लाइम (NaOH + CaO) के साथ गर्म करने पर CO₂ गैस निकलती है तथा एक कम कार्बन वाला **ऐल्केन** बनता है:
R-COONa + NaOH (CaO, Δ) → R-H (ऐल्केन) + Na₂CO₃
3. एस्टरीकरण (Esterification):
कार्बोक्सिलिक अम्ल एवं ऐल्कोहॉल को सांद्र H₂SO₄ की उपस्थिति में गर्म करने पर फलों जैसी मीठी गंध वाला **एस्टर (R-COOR')** बनता है।
कार्बोक्सिलिक अम्ल एवं ऐल्कोहॉल को सांद्र H₂SO₄ की उपस्थिति में गर्म करने पर फलों जैसी मीठी गंध वाला **एस्टर (R-COOR')** बनता है।
🔥 बोर्ड परीक्षा विशेष प्रश्न (Board Important Conceptual Questions)
प्रश्न 1: कार्बोक्सिलिक अम्ल, फिनॉल से अधिक अम्लीय क्यों होते हैं?
• उत्तर: क्योंकि कार्बोक्सिलेट आयन (R-COO⁻) में ऋणावेश दो अत्यधिक विद्युत-ऋणात्मक ऑक्सीजन परमाणुओं पर विस्थापित (Delocalised) रहता है, जबकि फिनॉक्साइड आयन में ऋणावेश कम विद्युत-ऋणात्मक कार्बन परमाणुओं पर घूमता है। अतः कार्बोक्सिलेट आयन, फिनॉक्साइड आयन से अधिक स्थाई होता है।
• उत्तर: क्योंकि कार्बोक्सिलेट आयन (R-COO⁻) में ऋणावेश दो अत्यधिक विद्युत-ऋणात्मक ऑक्सीजन परमाणुओं पर विस्थापित (Delocalised) रहता है, जबकि फिनॉक्साइड आयन में ऋणावेश कम विद्युत-ऋणात्मक कार्बन परमाणुओं पर घूमता है। अतः कार्बोक्सिलेट आयन, फिनॉक्साइड आयन से अधिक स्थाई होता है।
प्रश्न 2: फॉर्मिक अम्ल (HCOOH) तथा ऐसीटिक अम्ल (CH₃COOH) में कौन अधिक अम्लीय है और क्यों?
• उत्तर: **फॉर्मिक अम्ल (HCOOH) अधिक अम्लीय है।** ऐसीटिक अम्ल में उपस्थित मेथिल समूह (-CH₃) का **+I प्रभाव** होता है, जो कार्बोक्सिलेट आयन के ऋणावेश को बढ़ाकर उसे अस्थायी बनाता है और अम्लीयता घटा देता है।
• उत्तर: **फॉर्मिक अम्ल (HCOOH) अधिक अम्लीय है।** ऐसीटिक अम्ल में उपस्थित मेथिल समूह (-CH₃) का **+I प्रभाव** होता है, जो कार्बोक्सिलेट आयन के ऋणावेश को बढ़ाकर उसे अस्थायी बनाता है और अम्लीयता घटा देता है।
🎓 Complete Chemistry Notes & Board Special Numericals | Sunil Learning Point
🌐 Website Link:
www.sunillearningpoint.blogspot.com

Do not spam here. All the comments are reviewed by admin.