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कक्षा-10 (हिन्दी) - काव्य खण्ड : Chapter-6 - भारतमाता का मंदिर यह - मैथिलीशरण गुप्त

UP BOARD CLASS 10 HINDI

भारतमाता का मंदिर यह

काव्य खंड — अध्याय 6

कवि — मैथिलीशरण गुप्त

सत्र 2026–27

📚 अध्याय परिचय

“भारतमाता का मंदिर यह” राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रीय एकता की भावना से ओत-प्रोत कविता है। इसके कवि मैथिलीशरण गुप्त हैं। कवि भारतभूमि को अत्यंत पवित्र मानते हुए देशवासियों के मन में राष्ट्रभक्ति, त्याग, सेवा, एकता और सामाजिक समरसता की भावना जाग्रत करते हैं।

कविता में भारत को केवल भूमि का एक टुकड़ा नहीं माना गया है, बल्कि ऐसी पवित्र मातृभूमि के रूप में प्रस्तुत किया गया है जिसके प्रति प्रत्येक भारतीय का कर्तव्य, सम्मान और प्रेम होना चाहिए।

✍️ कवि का जीवन-परिचय — मैथिलीशरण गुप्त

🔹 जन्म एवं माता-पिता

मैथिलीशरण गुप्त का जन्म 3 अगस्त 1886 को उत्तर प्रदेश के झाँसी जिले के चिरगाँव में हुआ था। उनके पिता सेठ रामचरण गुप्त साहित्य और काव्य के प्रति रुचि रखने वाले व्यक्ति थे। उनकी माता का नाम काशीबाई था।

🔹 शिक्षा-दीक्षा

मैथिलीशरण गुप्त की प्रारम्भिक शिक्षा घर पर ही हुई। उन्होंने हिंदी के साथ संस्कृत और बंगला आदि भाषाओं का अध्ययन किया। औपचारिक शिक्षा की अपेक्षा उनका साहित्यिक और स्वाध्याय अधिक महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने स्वयं के अध्ययन और साहित्यकारों के संपर्क से अपने ज्ञान का विस्तार किया।

🔹 साहित्यिक जीवन

मैथिलीशरण गुप्त आधुनिक हिन्दी कविता के प्रमुख कवियों में गिने जाते हैं। उन्होंने अपनी रचनाओं में भारतीय संस्कृति, राष्ट्रप्रेम, सामाजिक चेतना, नारी-जीवन, धार्मिक एवं नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं को प्रमुखता दी। उनकी कविता में राष्ट्रीय जागरण की विशेष भावना दिखाई देती है।

🔹 प्रमुख रचनाएँ

  • भारत-भारती
  • साकेत
  • यशोधरा
  • पंचवटी
  • जयद्रथ-वध
  • द्वापर
  • नहुष
  • विष्णुप्रिया

🔹 साहित्य में स्थान

मैथिलीशरण गुप्त को हिन्दी साहित्य में राष्ट्रीय चेतना के प्रमुख कवि के रूप में विशेष सम्मान प्राप्त है। महात्मा गांधी ने उन्हें “राष्ट्रकवि” की उपाधि से संबोधित किया था।

🔹 भाषा-शैली

गुप्त जी की भाषा मुख्यतः खड़ी बोली हिन्दी है। उनकी भाषा सरल, प्रवाहपूर्ण, प्रभावशाली, भावपूर्ण और संस्कृतनिष्ठ शब्दावली से युक्त है। उनकी रचनाओं में राष्ट्रप्रेम, नीति, आदर्शवाद और सामाजिक चेतना का सुंदर समन्वय मिलता है।

🔹 सम्मान

मैथिलीशरण गुप्त को हिन्दी साहित्य में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए अनेक सम्मान प्राप्त हुए। भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया। वे राज्यसभा के सदस्य भी रहे।

🔹 निधन

मैथिलीशरण गुप्त का निधन 12 दिसम्बर 1964 को हुआ। हिन्दी साहित्य में उनकी राष्ट्रवादी और सांस्कृतिक चेतना आज भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

🎯 कविता का मुख्य भाव

इस कविता का मूल भाव राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रीय एकता है। कवि भारतभूमि को पवित्र मानते हैं और देशवासियों को उसके प्रति श्रद्धा, प्रेम तथा कर्तव्य का भाव रखने की प्रेरणा देते हैं।

कवि के अनुसार भारत की वास्तविक शक्ति केवल उसकी भूमि या प्राकृतिक संपदा में नहीं, बल्कि उसके नागरिकों की एकता, त्याग, सेवा और भाईचारे में निहित है।

💡 कविता का केंद्रीय विचार

कविता में भारत को माता के समान पूजनीय और पवित्र माना गया है। कवि चाहते हैं कि भारतीय अपने देश के प्रति सच्ची श्रद्धा रखें और जाति, धर्म, भाषा, क्षेत्र तथा अन्य भेदभावों से ऊपर उठकर एकता की भावना विकसित करें।

कविता में राष्ट्र के प्रति समर्पण और देशहित को व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर रखने का संदेश मिलता है।

📖 काव्यांश 1 — संदर्भ, प्रसंग एवं व्याख्या

📌 काव्यांश का संकेत:
कवि भारतभूमि को मंदिर के समान पवित्र मानते हुए उसके प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हैं।

संदर्भ

प्रस्तुत भाव मैथिलीशरण गुप्त की राष्ट्रप्रेम से ओत-प्रोत कविता “भारतमाता का मंदिर यह” से संबंधित है।

प्रसंग

इस भाग में कवि भारतभूमि की पवित्रता और उसके प्रति भारतीयों की श्रद्धा का वर्णन करते हैं।

सरल व्याख्या

कवि भारत को एक पवित्र मंदिर के रूप में देखते हैं। उनके लिए भारतभूमि साधारण भूमि नहीं, बल्कि श्रद्धा और सम्मान का केंद्र है। जिस प्रकार मंदिर में मनुष्य श्रद्धा के साथ प्रवेश करता है, उसी प्रकार उसे अपनी मातृभूमि के प्रति भी प्रेम, सम्मान और समर्पण का भाव रखना चाहिए।

भावार्थ

भारत हमारी पवित्र मातृभूमि है। प्रत्येक भारतीय को उसके प्रति गर्व, प्रेम और श्रद्धा रखनी चाहिए।

📖 काव्यांश 2 — संदर्भ, प्रसंग एवं व्याख्या

संदर्भ

यह भाव मैथिलीशरण गुप्त की कविता में भारतमाता के प्रति श्रद्धा और राष्ट्रीय चेतना की अभिव्यक्ति से संबंधित है।

प्रसंग

कवि भारतभूमि की महानता और उसके प्रति नागरिकों के कर्तव्य को स्पष्ट करते हैं।

सरल व्याख्या

कवि के अनुसार देश केवल अपनी सुविधाओं के लिए उपयोग करने की वस्तु नहीं है। देश ने हमें जन्मभूमि, संस्कृति, भाषा, परंपराएँ और पहचान प्रदान की है। इसलिए देश के प्रति हमारा भी कर्तव्य है कि हम उसकी उन्नति और सम्मान के लिए कार्य करें।

भावार्थ

सच्ची राष्ट्रभक्ति केवल देश की प्रशंसा करने में नहीं, बल्कि देश के हित में कार्य करने और उसके प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करने में है।

📖 काव्यांश 3 — संदर्भ, प्रसंग एवं व्याख्या

संदर्भ

प्रस्तुत भाव राष्ट्र की एकता और भारतीय समाज की समरसता से संबंधित है।

प्रसंग

कवि देशवासियों को संकीर्ण भेदभाव से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में एकजुट होने की प्रेरणा देते हैं।

सरल व्याख्या

भारत अनेक जातियों, भाषाओं, धर्मों और संस्कृतियों वाला देश है। इतनी विविधता के बावजूद भारत की मूल शक्ति उसकी एकता है। यदि देशवासी आपसी भेदभाव छोड़कर एक-दूसरे के सुख-दुःख में सहभागी बनें, तो राष्ट्र अधिक मजबूत होगा।

भावार्थ

विविधता के बीच एकता ही भारत की सबसे बड़ी शक्ति है। देश की उन्नति के लिए सभी भारतीयों को मिल-जुलकर रहना चाहिए।

📖 काव्यांश 4 — संदर्भ, प्रसंग एवं व्याख्या

संदर्भ

यह भाव कविता में राष्ट्र के प्रति त्याग और सेवा की भावना से संबंधित है।

प्रसंग

कवि देशवासियों को व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर मातृभूमि के लिए समर्पित होने का संदेश देते हैं।

सरल व्याख्या

कवि बताते हैं कि सच्चे देशप्रेमी अपने निजी हितों से पहले देश के हित को महत्व देते हैं। राष्ट्र की रक्षा, सेवा और उन्नति में योगदान देना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।

भावार्थ

देश के प्रति सच्ची श्रद्धा तभी सिद्ध होती है जब व्यक्ति आवश्यकता पड़ने पर अपने स्वार्थ का त्याग करके राष्ट्रहित को प्राथमिकता दे।

📖 काव्यांश 5 — संदर्भ, प्रसंग एवं व्याख्या

संदर्भ

प्रस्तुत भाव भारत की गौरवपूर्ण संस्कृति और उसके प्रति गर्व की भावना से संबंधित है।

प्रसंग

कवि भारतीयों को अपनी संस्कृति और मातृभूमि के गौरव को समझने की प्रेरणा देते हैं।

सरल व्याख्या

भारत की संस्कृति अत्यंत प्राचीन और विविधतापूर्ण है। यहाँ अनेक महान परंपराएँ, विचारधाराएँ और जीवन-मूल्य विकसित हुए हैं। कवि चाहते हैं कि भारतीय अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझें और उसके श्रेष्ठ मूल्यों को अपने जीवन में अपनाएँ।

भावार्थ

हमें अपनी मातृभूमि और उसकी गौरवशाली संस्कृति पर गर्व करना चाहिए तथा उसके श्रेष्ठ आदर्शों को जीवन में उतारना चाहिए।

🌟 कविता का संदेश

  • भारत हमारी पवित्र मातृभूमि है।
  • देश के प्रति प्रेम और सम्मान रखना चाहिए।
  • जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्र के भेदभाव से ऊपर उठना चाहिए।
  • राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना चाहिए।
  • व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर राष्ट्रहित को महत्व देना चाहिए।
  • भारतीय संस्कृति के श्रेष्ठ मूल्यों का सम्मान करना चाहिए।
  • देश की उन्नति के लिए प्रत्येक नागरिक को अपना योगदान देना चाहिए।

📘 महत्वपूर्ण शब्दार्थ

शब्द अर्थ
मातृभूमि जन्मभूमि / अपना देश
राष्ट्र देश
श्रद्धा आदर एवं विश्वास
समर्पण पूर्ण रूप से अर्पित करना
समरसता आपसी मेल-जोल एवं समानता
त्याग अपने हित का परित्याग
विरासत पूर्वजों से प्राप्त धरोहर

❓ लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. 'भारतमाता का मंदिर यह' कविता के कवि कौन हैं?

उत्तर: 'भारतमाता का मंदिर यह' कविता के कवि मैथिलीशरण गुप्त हैं।

प्रश्न 2. कविता का मुख्य भाव क्या है?

उत्तर: कविता का मुख्य भाव राष्ट्रप्रेम, राष्ट्रीय एकता, मातृभूमि के प्रति श्रद्धा और देशसेवा की भावना है।

प्रश्न 3. कवि भारत को किस रूप में देखते हैं?

उत्तर: कवि भारत को पवित्र मातृभूमि और श्रद्धा के योग्य स्थान के रूप में देखते हैं।

प्रश्न 4. देशवासियों को किस भावना से रहने की प्रेरणा दी गई है?

उत्तर: देशवासियों को आपसी प्रेम, भाईचारे, एकता और राष्ट्रीय समरसता की भावना से रहने की प्रेरणा दी गई है।

प्रश्न 5. सच्ची राष्ट्रभक्ति क्या है?

उत्तर: सच्ची राष्ट्रभक्ति देश के प्रति प्रेम रखने के साथ उसकी सेवा, सुरक्षा, उन्नति और सम्मान के लिए कार्य करने में है।

प्रश्न 6. कविता में राष्ट्रीय एकता का क्या महत्व है?

उत्तर: राष्ट्रीय एकता देश की शक्ति का आधार है। आपसी भेदभाव छोड़कर एकजुट रहने से राष्ट्र मजबूत और प्रगतिशील बनता है।

📝 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. 'भारतमाता का मंदिर यह' कविता का सारांश लिखिए।

उत्तर: मैथिलीशरण गुप्त की यह कविता राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रीय चेतना की भावना से परिपूर्ण है। कवि भारत को पवित्र मातृभूमि के रूप में देखते हैं और देशवासियों के मन में उसके प्रति श्रद्धा तथा सम्मान उत्पन्न करना चाहते हैं।

कवि का विचार है कि भारत की शक्ति उसकी विविधता के साथ-साथ उसकी एकता में निहित है। देशवासियों को जाति, धर्म, भाषा और अन्य संकीर्ण भेदभावों से ऊपर उठकर एक-दूसरे के साथ प्रेम और भाईचारे से रहना चाहिए।

कविता में देश के प्रति सेवा, त्याग और समर्पण का संदेश दिया गया है। कवि चाहते हैं कि भारतीय अपने व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को महत्व दें और देश की उन्नति में अपना योगदान करें।

प्रश्न 2. मैथिलीशरण गुप्त की काव्यगत विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर: मैथिलीशरण गुप्त की कविता में राष्ट्रीय चेतना, भारतीय संस्कृति, नैतिक आदर्श, सामाजिक सुधार और मानवीय संवेदना प्रमुख हैं। उनकी भाषा सरल, प्रवाहपूर्ण तथा खड़ी बोली हिन्दी है। उन्होंने संस्कृतनिष्ठ शब्दावली का भी प्रभावशाली प्रयोग किया है। उनकी रचनाओं में देशप्रेम और भारतीय संस्कृति के प्रति गौरव की भावना विशेष रूप से दिखाई देती है।

प्रश्न 3. कविता में राष्ट्रप्रेम की भावना स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: कवि भारत को अपनी पवित्र मातृभूमि मानते हैं। उनके लिए देश केवल भूमि नहीं, बल्कि भावनात्मक और सांस्कृतिक पहचान का आधार है। वे चाहते हैं कि प्रत्येक नागरिक देश के प्रति श्रद्धा रखे, उसकी उन्नति के लिए कार्य करे तथा आवश्यकता पड़ने पर राष्ट्रहित में त्याग करने के लिए तैयार रहे। इसी कारण कविता में राष्ट्रप्रेम की भावना अत्यंत प्रभावशाली रूप में प्रकट होती है।

प्रश्न 4. कविता में राष्ट्रीय एकता का महत्व बताइए।

उत्तर: भारत अनेक धर्मों, भाषाओं, जातियों और संस्कृतियों वाला देश है। इतनी विविधता के बीच एकता बनाए रखना राष्ट्र की मजबूती के लिए आवश्यक है। कवि चाहते हैं कि भारतीय आपसी भेदभाव भूलकर भाईचारे के साथ रहें। राष्ट्रीय एकता से देश की शक्ति बढ़ती है और राष्ट्र प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ता है।

✅ बहुविकल्पीय प्रश्न

1. 'भारतमाता का मंदिर यह' के कवि कौन हैं?
(क) रामधारी सिंह 'दिनकर'
(ख) मैथिलीशरण गुप्त
(ग) सुमित्रानंदन पंत
(घ) माखनलाल चतुर्वेदी
उत्तर — (ख)

2. मैथिलीशरण गुप्त को किस नाम से प्रसिद्धि मिली?
(क) राष्ट्रकवि
(ख) जनकवि
(ग) लोककवि
(घ) प्रकृति कवि
उत्तर — (क)

3. कविता का प्रमुख विषय क्या है?
(क) प्रकृति-सौंदर्य
(ख) हास्य
(ग) राष्ट्रप्रेम
(घ) प्रेम-विरह
उत्तर — (ग)

4. कवि देशवासियों को किस भावना से रहने की प्रेरणा देते हैं?
(क) ईर्ष्या
(ख) एकता और भाईचारा
(ग) स्वार्थ
(घ) संघर्ष
उत्तर — (ख)

5. मैथिलीशरण गुप्त की भाषा मुख्यतः कौन-सी है?
(क) ब्रजभाषा
(ख) अवधी
(ग) खड़ी बोली हिन्दी
(घ) भोजपुरी
उत्तर — (ग)

6. 'साकेत' किसकी रचना है?
(क) मैथिलीशरण गुप्त
(ख) तुलसीदास
(ग) सूरदास
(घ) बिहारी
उत्तर — (क)

🔥 बोर्ड परीक्षा के लिए अति महत्वपूर्ण

  • कविता — भारतमाता का मंदिर यह
  • कवि — मैथिलीशरण गुप्त
  • मुख्य भाव — राष्ट्रप्रेम एवं राष्ट्रीय एकता
  • काव्य का आधार — मातृभूमि के प्रति श्रद्धा और समर्पण
  • प्रमुख संदेश — देशहित को व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर रखना
  • भाषा — खड़ी बोली हिन्दी
  • शैली — सरल, प्रवाहपूर्ण, भावपूर्ण एवं राष्ट्रवादी
  • कवि का प्रसिद्ध संबोधन — राष्ट्रकवि

⚡ एक मिनट में Chapter 6 की Revision

भारत → मातृभूमि → श्रद्धा → राष्ट्रप्रेम → एकता → त्याग → सेवा → राष्ट्र की उन्नति

याद रखें: मैथिलीशरण गुप्त की कविता का मूल संदेश यह है कि भारत हमारी पवित्र मातृभूमि है। हमें उसके प्रति प्रेम और सम्मान रखना चाहिए तथा जाति, धर्म और अन्य भेदभावों से ऊपर उठकर राष्ट्रीय एकता, भाईचारे और देशसेवा की भावना अपनानी चाहिए।

⭐ परीक्षा में पूछे जा सकने वाले महत्वपूर्ण प्रश्न

  1. मैथिलीशरण गुप्त का जीवन-परिचय लिखिए।
  2. मैथिलीशरण गुप्त की प्रमुख रचनाएँ लिखिए।
  3. मैथिलीशरण गुप्त की भाषा-शैली की विशेषताएँ बताइए।
  4. 'भारतमाता का मंदिर यह' कविता का सारांश लिखिए।
  5. कविता का केंद्रीय भाव स्पष्ट कीजिए।
  6. कविता में राष्ट्रप्रेम की भावना स्पष्ट कीजिए।
  7. कविता में राष्ट्रीय एकता का महत्व बताइए।
  8. कवि भारत को किस दृष्टि से देखते हैं?
  9. कविता का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।
  10. कविता से मिलने वाली शिक्षा लिखिए।
📌 अध्ययन-सूचना: यह सामग्री UP Board कक्षा 10 हिन्दी की परीक्षा तैयारी के लिए मौलिक अध्ययन-सहायिका के रूप में तैयार की गई है। इसमें पाठ की मूल पुस्तक की पूरी कविता को हूबहू पुनरुत्पादित नहीं किया गया है। काव्यांशों के स्थान पर उनके संदर्भ, प्रसंग, भावार्थ एवं व्याख्या परीक्षा की दृष्टि से समझाई गई है।

📚 UP Board Class 10 Hindi

काव्य खंड | अध्याय 6 | भारतमाता का मंदिर यह

सत्र 2026–27

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