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कक्षा-10 (हिन्दी) - गद्य खण्ड : Chapter-2 (ममता) : जयशंकर प्रसाद

📚 UP BOARD • कक्षा 10 • हिन्दी

अध्याय 2 — “ममता”

जयशंकर प्रसाद

गद्य-खण्ड | सम्पूर्ण पाठ समाधान

🎯 सत्र 2026–27 | Board Exam 2027
📖 विषयहिन्दी
🎓 कक्षा10वीं
📕 अध्यायममता
✍️ लेखकजयशंकर प्रसाद

📖 अध्याय परिचय

‘ममता’ जयशंकर प्रसाद की प्रसिद्ध ऐतिहासिक कहानी है। कहानी में रोहतास दुर्ग, ममता, उसके पिता चूड़ामणि और मुगल बादशाह हुमायूँ के प्रसंग के माध्यम से मानवीय करुणा, कर्तव्य, अतिथि-सत्कार, स्वाभिमान तथा त्याग की भावना को प्रस्तुत किया गया है।

ममता विधवा ब्राह्मणी है। उसके पिता चूड़ामणि रोहतास दुर्ग में महत्वपूर्ण पद पर हैं। सत्ता और धन के मोह में चूड़ामणि को रिश्वत स्वीकार करने का विचार आता है, परन्तु ममता इसका विरोध करती है।

बाद में परिस्थितियाँ बदलती हैं और ममता अपने छोटे-से आश्रय में एक अजनबी मुगल पथिक को शरण देती है। वह व्यक्ति हुमायूँ होता है। ममता धर्म और मानवीय कर्तव्य के बीच उत्पन्न द्वंद्व के बावजूद उसकी सहायता करती है।

कहानी के अंत में ममता के त्याग, मानवता और निष्काम सेवा की महत्ता सामने आती है।

✍️ जयशंकर प्रसाद — विस्तृत जीवन-परिचय

🌟 जीवन-परिचय

जयशंकर प्रसाद आधुनिक हिन्दी साहित्य के महान कवि, नाटककार, कहानीकार, उपन्यासकार और निबन्धकार थे। वे हिन्दी साहित्य के छायावादी युग के प्रमुख स्तम्भों में गिने जाते हैं।

उनका जन्म 30 जनवरी 1889 ई. को काशी के सरायगोवर्धन में एक प्रसिद्ध वैश्य परिवार में हुआ था। उनका परिवार ‘सुंघनी साहू’ के नाम से प्रसिद्ध था।

👨‍👩‍👦 माता-पिता एवं परिवार

उनके पिता का नाम देवीप्रसाद साहू था। उनके परिवार का काशी में तम्बाकू के व्यापार के कारण विशेष सम्मान था। प्रसाद जी का पारिवारिक वातावरण समृद्ध तथा साहित्य और संस्कृति के प्रति रुचिपूर्ण था।

बाल्यावस्था में ही माता-पिता और बड़े भाई के निधन के कारण उन्हें कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। इन परिस्थितियों ने उनके व्यक्तित्व को गंभीर और संवेदनशील बनाया।

🎓 शिक्षा-दीक्षा

जयशंकर प्रसाद की प्रारम्भिक शिक्षा काशी में हुई। उन्होंने क्वींस कॉलेज में शिक्षा प्राप्त की, परन्तु पारिवारिक परिस्थितियों के कारण उनकी औपचारिक शिक्षा आगे जारी नहीं रह सकी।

इसके बाद उन्होंने घर पर ही स्वाध्याय के माध्यम से हिन्दी, संस्कृत, उर्दू, फारसी और अंग्रेजी का ज्ञान प्राप्त किया। भारतीय इतिहास, दर्शन और साहित्य का भी उन्होंने गहरा अध्ययन किया।

📚 साहित्यिक परिचय

प्रसाद जी बहुमुखी प्रतिभा के साहित्यकार थे। उन्होंने कविता, कहानी, नाटक, उपन्यास और निबन्ध सभी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण रचनाएँ कीं।

उनकी रचनाओं में भारतीय संस्कृति, इतिहास, राष्ट्रीय चेतना, मानवीय संवेदना, प्रकृति-प्रेम और दार्शनिक चिंतन का सुंदर समन्वय मिलता है।

📖 प्रमुख रचनाएँ

  • काव्य: कामायनी, आँसू, झरना, लहर
  • नाटक: स्कन्दगुप्त, चन्द्रगुप्त, ध्रुवस्वामिनी
  • कहानी-संग्रह: छाया, प्रतिध्वनि, आकाशदीप, आँधी, इन्द्रजाल
  • उपन्यास: कंकाल, तितली, इरावती

🖋️ भाषा-शैली

प्रसाद जी की भाषा साहित्यिक, संस्कृतनिष्ठ, भावपूर्ण और प्रभावशाली है। उनकी रचनाओं में चित्रात्मकता, भावुकता, काव्यात्मकता तथा ऐतिहासिक वातावरण का सुंदर प्रयोग मिलता है।

🏆 साहित्य में स्थान

जयशंकर प्रसाद को हिन्दी साहित्य के छायावादी युग के प्रमुख साहित्यकारों में स्थान प्राप्त है। उनकी रचना ‘कामायनी’ हिन्दी का महत्वपूर्ण महाकाव्य मानी जाती है। उन्होंने हिन्दी कहानी और ऐतिहासिक नाटक को भी समृद्ध किया।

🕯️ निधन

जयशंकर प्रसाद का निधन 15 नवम्बर 1937 ई. को काशी में हुआ।

🎯 बोर्ड परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
  • जन्म — 30 जनवरी 1889 ई.
  • जन्म-स्थान — सरायगोवर्धन, काशी
  • पिता — देवीप्रसाद
  • परिवार — ‘सुंघनी साहू’ वैश्य परिवार
  • युग — छायावादी युग
  • प्रमुख विधाएँ — कविता, कहानी, नाटक, उपन्यास
  • प्रमुख महाकाव्य — कामायनी
  • प्रमुख नाटक — स्कन्दगुप्त, चन्द्रगुप्त, ध्रुवस्वामिनी
  • प्रमुख उपन्यास — कंकाल, तितली, इरावती
  • निधन — 15 नवम्बर 1937 ई.

📝 ‘ममता’ का विस्तृत सरल सारांश

कहानी का आरम्भ रोहतास दुर्ग के वातावरण से होता है। दुर्ग में ममता नाम की एक युवा विधवा रहती है। वह अपने जीवन की परिस्थितियों के कारण दुःखी है और सोन नदी के प्रवाह को देख रही है।

ममता के पिता चूड़ामणि दुर्ग के महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं। वे भविष्य की विपत्तियों से बचने के लिए धन इकट्ठा करने के बारे में सोचते हैं। उन्हें रिश्वत के रूप में बहुत-सा सोना मिलता है। ममता उस सोने को देखकर दुखी और चिंतित हो जाती है।

ममता अपने पिता को समझाती है कि इतना धन लेकर भविष्य सुरक्षित करने का प्रयास उचित नहीं है। वह धार्मिक और नैतिक दृष्टि से इस धन को स्वीकार करने का विरोध करती है।

समय बीतता है और परिस्थितियाँ बदलती हैं। ममता सारनाथ के निकट एक छोटी-सी झोपड़ी में रहने लगती है। वह अपने जीवन में संघर्ष करते हुए भी आत्मसम्मान और अपने धर्म का पालन करती है।

एक रात एक थका हुआ मुगल पथिक उसकी झोपड़ी में पहुँचता है। वह सहायता चाहता है। ममता के मन में द्वंद्व उत्पन्न होता है। वह जानती है कि वह व्यक्ति उसके धर्म और समुदाय से अलग है, फिर भी उसके भीतर की मानवता और अतिथि-सत्कार की भावना उसे उसकी सहायता करने के लिए प्रेरित करती है।

ममता उस अजनबी को आश्रय देती है और उसकी सहायता करती है। वह व्यक्ति वास्तव में हुमायूँ होता है। ममता उससे किसी प्रकार का पुरस्कार या धन नहीं चाहती।

हुमायूँ बाद में अपने सैनिकों को उस महिला को खोजने का आदेश देता है जिसने संकट की घड़ी में उसकी सहायता की थी। लेकिन ममता ने सेवा के बदले किसी प्रतिफल की इच्छा नहीं रखी।

कहानी के अंतिम भाग में ममता वृद्धावस्था में अपने जीवन के अंतिम क्षणों में पहुँचती है। उसके जीवन में त्याग, करुणा और मानवता की भावना ही सबसे बड़ी संपत्ति रही।

इस प्रकार कहानी यह संदेश देती है कि मानवता, कर्तव्य और निष्काम सेवा किसी भी जाति, धर्म अथवा सत्ता से ऊपर हैं।

👥 प्रमुख पात्रों का चरित्र-चित्रण

🌸 1. ममता

ममता कहानी की मुख्य पात्र है। वह युवा विधवा ब्राह्मणी है। उसके जीवन में अनेक कठिनाइयाँ आती हैं, लेकिन वह अपने आत्मसम्मान, धर्म, कर्तव्य और मानवता को नहीं छोड़ती।

वह धन के मोह का विरोध करती है और संकट में पड़े अजनबी की जाति या धर्म देखकर उसकी सहायता से पीछे नहीं हटती। वह सेवा के बदले पुरस्कार की इच्छा भी नहीं रखती। इसलिए ममता का चरित्र त्याग, करुणा, साहस और निष्काम मानवता का प्रतीक है।

👤 2. चूड़ामणि

चूड़ामणि ममता के पिता हैं। वे रोहतास दुर्ग से जुड़े महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं। भविष्य की चिंता के कारण वे धन एकत्र करना चाहते हैं। उनका चरित्र उस समय के सत्ता-संबंधों और व्यक्तिगत सुरक्षा की चिंताओं को भी सामने लाता है।

👑 3. हुमायूँ

हुमायूँ कहानी में एक थके हुए मुगल पथिक के रूप में आता है। संकट में ममता द्वारा उसे आश्रय दिया जाता है। बाद में उसकी पहचान स्पष्ट होती है। ममता की मानवतापूर्ण सहायता उसके मन पर गहरा प्रभाव डालती है।

📚 कठिन शब्द एवं शब्दार्थ

शब्दअर्थ
प्रकोष्ठकमरा / कक्ष
शोणसोन नदी
वेदनादुःख / पीड़ा
दुहितापुत्री
निराश्रयजिसका कोई आश्रय न हो
विकलव्याकुल / दुःखी
विपदसंकट / आपत्ति
आयोजनव्यवस्था / प्रबंध
विधर्मीदूसरे धर्म का व्यक्ति
आततायीअत्याचारी
अतिथिघर आने वाला मेहमान
आश्रयशरण / सहारा
चन्द्रिकाचाँदनी
प्रासादमहल
मरणासन्नमृत्यु के निकट
निष्कामबिना स्वार्थ के

❓ महत्वपूर्ण लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. ममता कौन थी?
उत्तर: ममता एक युवा विधवा ब्राह्मणी थी। वह चूड़ामणि की पुत्री थी और कहानी की मुख्य पात्र थी।
प्रश्न 2. ममता क्या देख रही थी?
उत्तर: रोहतास दुर्ग के प्रकोष्ठ में बैठी ममता सोन नदी के तीव्र और गंभीर प्रवाह को देख रही थी।
प्रश्न 3. ममता ने सोने को देखकर क्या प्रतिक्रिया व्यक्त की?
उत्तर: ममता बहुत-सा सोना देखकर चिंतित हो गई। उसने इसे भविष्य की विपत्तियों के लिए धन जमा करने का अनुचित प्रयास माना और अपने पिता को इसे स्वीकार न करने के लिए कहा।
प्रश्न 4. ममता ने हुमायूँ की सहायता क्यों की?
उत्तर: ममता के मन में अतिथि-सत्कार और मानवता की भावना प्रबल थी। इसलिए उसने संकट में पड़े अजनबी की सहायता उसके धर्म या पहचान की परवाह किए बिना की।
प्रश्न 5. ममता के झोपड़े में कौन आया था?
उत्तर: एक थका हुआ मुगल पथिक ममता की झोपड़ी में आया था। बाद में पता चलता है कि वह हुमायूँ था।
प्रश्न 6. ममता के चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: ममता के चरित्र में त्याग, आत्मसम्मान, करुणा, कर्तव्यनिष्ठा, अतिथि-सत्कार, धार्मिक भावना और निष्काम सेवा जैसे गुण दिखाई देते हैं।
प्रश्न 7. कहानी में अतिथि-सत्कार की भावना कैसे दिखाई देती है?
उत्तर: ममता अपने धर्म और उस समय की परिस्थितियों के कारण मन में द्वंद्व होने के बावजूद थके हुए अजनबी को आश्रय देती है और उसकी सहायता करती है। इससे उसकी अतिथि-सत्कार और मानवीय संवेदना स्पष्ट होती है।
प्रश्न 8. ममता पुरस्कार क्यों नहीं चाहती थी?
उत्तर: ममता ने सहायता किसी स्वार्थ या पुरस्कार के लिए नहीं की थी। उसके लिए संकट में पड़े व्यक्ति की सहायता करना मानवीय और नैतिक कर्तव्य था।
प्रश्न 9. ‘ममता’ कहानी का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: कहानी का मुख्य संदेश है कि सच्ची मानवता जाति, धर्म, सत्ता और स्वार्थ से ऊपर होती है। संकट में पड़े व्यक्ति की निस्वार्थ सहायता करना महान मानवीय गुण है।

✍️ दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. ‘ममता’ कहानी का सारांश लिखिए।

उत्तर: ‘ममता’ जयशंकर प्रसाद की ऐतिहासिक कहानी है। इसमें ममता नामक विधवा ब्राह्मणी के जीवन के माध्यम से मानवता, कर्तव्य और त्याग को प्रस्तुत किया गया है।

ममता के पिता चूड़ामणि रोहतास दुर्ग से जुड़े हुए व्यक्ति हैं। वे भविष्य की सुरक्षा के लिए धन इकट्ठा करना चाहते हैं और उन्हें बहुत-सा सोना प्राप्त होता है। ममता इस धन का विरोध करती है।

बाद में ममता सारनाथ के निकट अपनी झोपड़ी में रहती है। एक रात एक थका हुआ मुगल पथिक उसकी झोपड़ी में आता है। ममता अपने मन के द्वंद्व के बावजूद उसकी सहायता करती है। वह पथिक हुमायूँ होता है।

ममता सहायता के बदले कोई पुरस्कार नहीं चाहती। कहानी के माध्यम से लेखक बताते हैं कि मानवता और निष्काम सेवा किसी भी सांसारिक लाभ से अधिक महान हैं।

प्रश्न 2. ममता का चरित्र-चित्रण कीजिए।

उत्तर: ममता कहानी की मुख्य पात्र है। वह युवा विधवा ब्राह्मणी है। उसके जीवन में दुःख और संघर्ष है, फिर भी उसका आत्मसम्मान और मानवीय संवेदना जीवित रहती है।

वह धन के लोभ का विरोध करती है। वह धार्मिक और नैतिक मूल्यों को महत्व देती है। जब एक अजनबी संकट में उसके पास आता है, तो वह उसके धर्म और पहचान की चिंता किए बिना उसकी सहायता करती है।

ममता सेवा के बदले किसी पुरस्कार की अपेक्षा नहीं रखती। इसलिए उसका चरित्र त्याग, साहस, करुणा, कर्तव्य और निष्काम मानवता का आदर्श प्रस्तुत करता है।

प्रश्न 3. ममता और हुमायूँ के प्रसंग से लेखक क्या संदेश देना चाहते हैं?

उत्तर: ममता और हुमायूँ का प्रसंग कहानी का सबसे महत्वपूर्ण मानवीय पक्ष प्रस्तुत करता है। ममता जानती है कि सामने वाला व्यक्ति उसके धर्म और समुदाय से अलग है, फिर भी वह संकट में पड़े व्यक्ति की सहायता करती है।

इससे लेखक यह संदेश देते हैं कि सच्ची मानवता किसी जाति, धर्म, राजनीतिक सत्ता या व्यक्तिगत स्वार्थ की सीमा में बँधी नहीं होती। संकट के समय दूसरे मनुष्य की सहायता करना ही सबसे बड़ा धर्म है।

प्रश्न 4. ‘ममता’ कहानी में कर्तव्य और मानवता का संघर्ष स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: जब मुगल पथिक ममता की झोपड़ी में आता है, तब ममता के मन में द्वंद्व उत्पन्न होता है। एक ओर वह अपने धार्मिक और सामाजिक विचारों से प्रभावित है, दूसरी ओर उसके सामने एक थका और संकटग्रस्त मनुष्य है।

अंततः उसकी मानवीय संवेदना अधिक प्रभावशाली होती है और वह अजनबी की सहायता करती है। इस प्रकार कहानी में यह दिखाया गया है कि सच्ची मानवता संकीर्ण भेदभाव से ऊपर होती है।

प्रश्न 5. ‘ममता’ शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: कहानी का मुख्य केंद्र ममता का चरित्र है। कहानी की घटनाएँ उसके जीवन, विचार, संघर्ष, त्याग और मानवतापूर्ण व्यवहार के आसपास विकसित होती हैं।

वह संकट में पड़े व्यक्ति के प्रति करुणा और ममता का व्यवहार करती है और सहायता के बदले कुछ नहीं चाहती। इसलिए कहानी का शीर्षक ‘ममता’ पूरी तरह सार्थक है।

📜 गद्यांश-आधारित प्रश्नोत्तर

सन्दर्भ लिखने का बोर्ड-फॉर्मेट:
प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक के गद्य-खण्ड में संकलित ‘ममता’ नामक कहानी से लिया गया है। इसके लेखक जयशंकर प्रसाद हैं।
गद्यांश 1 — रोहतास दुर्ग और ममता

मुख्य भाव: कहानी के आरम्भ में ममता को रोहतास दुर्ग के प्रकोष्ठ में बैठकर सोन नदी के तीव्र प्रवाह को देखते हुए दिखाया गया है। उसके भीतर भी दुःख और भावनाओं का उफान है।

व्याख्या: लेखक ने सोन नदी के तेज प्रवाह और ममता के उमड़ते यौवन तथा मन की वेदना के बीच सुंदर साम्य स्थापित किया है। बाहरी प्रकृति और ममता की आंतरिक मनःस्थिति एक-दूसरे से जुड़ जाती हैं।
गद्यांश 2 — सोने के थाल और ममता का विरोध

मुख्य भाव: चूड़ामणि द्वारा प्राप्त धन को देखकर ममता प्रसन्न होने के बजाय चिंतित हो जाती है।

व्याख्या: ममता को लगता है कि संकट के समय के लिए अनुचित ढंग से धन इकट्ठा करना उचित नहीं है। उसकी दृष्टि में धन से अधिक महत्वपूर्ण नैतिकता और धर्म है।
गद्यांश 3 — सारनाथ और ममता की झोपड़ी

मुख्य भाव: कहानी का एक महत्वपूर्ण भाग सारनाथ के ऐतिहासिक वातावरण में घटित होता है।

व्याख्या: लेखक ऐतिहासिक स्मारकों और खण्डहरों के माध्यम से प्राचीन भारतीय संस्कृति की झलक प्रस्तुत करते हैं। इसी वातावरण में ममता का सरल और संघर्षपूर्ण जीवन दिखाई देता है।
गद्यांश 4 — ममता और थका हुआ मुगल पथिक

मुख्य भाव: एक थका हुआ मुगल पथिक ममता की झोपड़ी में आश्रय चाहता है। ममता के मन में धर्म और मानवता के बीच द्वंद्व उत्पन्न होता है।

व्याख्या: ममता अंततः मानवीय कर्तव्य को महत्व देती है और उस पथिक की सहायता करती है। इस प्रसंग से स्पष्ट होता है कि संकट में पड़े मनुष्य की सहायता करना मानवता का श्रेष्ठ रूप है।
गद्यांश 5 — हुमायूँ और ममता

मुख्य भाव: जिस पथिक की ममता ने सहायता की थी, वह हुमायूँ था। वह ममता की सहायता का मूल्य समझता है।

व्याख्या: ममता ने हुमायूँ की सहायता किसी स्वार्थ या पुरस्कार के लिए नहीं की थी। उसकी सेवा निष्काम थी। यही कारण है कि कहानी ममता को मानवीय आदर्श के रूप में प्रस्तुत करती है।
गद्यांश 6 — ममता के जीवन का अंतिम समय

मुख्य भाव: जीवन के अंतिम समय में भी ममता अपने बीते जीवन और अपनी झोपड़ी से जुड़ी स्मृतियों को याद करती है।

व्याख्या: ममता ने जीवनभर भौतिक संपत्ति की अपेक्षा अपने आत्मसम्मान और मानवीय मूल्यों को महत्व दिया। उसका जीवन त्याग और निष्काम सेवा का उदाहरण बन जाता है।

🎯 महत्वपूर्ण MCQ — Board Exam 2027

1. ‘ममता’ कहानी के लेखक कौन हैं?

(क) प्रेमचन्द
(ख) जयशंकर प्रसाद
(ग) रामधारी सिंह दिनकर
(घ) भगवतशरण उपाध्याय
✅ सही उत्तर — (ख) जयशंकर प्रसाद
2. जयशंकर प्रसाद का जन्म कहाँ हुआ था?

(क) प्रयागराज
(ख) लखनऊ
(ग) सरायगोवर्धन, काशी
(घ) मिर्जापुर
✅ सही उत्तर — (ग)
3. जयशंकर प्रसाद के पिता का नाम क्या था?

(क) देवीप्रसाद
(ख) चन्द्रबली
(ग) रामदास
(घ) हरिप्रसाद
✅ सही उत्तर — (क)
4. ‘ममता’ की मुख्य पात्र कौन है?

(क) ममता
(ख) चूड़ामणि
(ग) हुमायूँ
(घ) रानी
✅ सही उत्तर — (क)
5. ममता के पिता का नाम क्या था?

(क) चन्द्रगुप्त
(ख) चूड़ामणि
(ग) हुमायूँ
(घ) बाबर
✅ सही उत्तर — (ख)
6. ममता किस नदी के प्रवाह को देख रही थी?

(क) गंगा
(ख) यमुना
(ग) सोन
(घ) नर्मदा
✅ सही उत्तर — (ग)
7. ममता का वैवाहिक जीवन कैसा था?

(क) वह विवाहित थी
(ख) वह विधवा थी
(ग) वह अविवाहित थी
(घ) वह संन्यासिनी थी
✅ सही उत्तर — (ख)
8. ममता ने किसके धन का विरोध किया?

(क) हुमायूँ
(ख) अपने पिता चूड़ामणि
(ग) सैनिक
(घ) पथिक
✅ सही उत्तर — (ख)
9. ममता की झोपड़ी में कौन आया था?

(क) सैनिक
(ख) साधु
(ग) थका हुआ मुगल पथिक
(घ) व्यापारी
✅ सही उत्तर — (ग)
10. वह मुगल पथिक वास्तव में कौन था?

(क) बाबर
(ख) हुमायूँ
(ग) अकबर
(घ) शाहजहाँ
✅ सही उत्तर — (ख)
11. ममता के चरित्र की प्रमुख विशेषता क्या है?

(क) स्वार्थ
(ख) लालच
(ग) निष्काम मानवता
(घ) क्रोध
✅ सही उत्तर — (ग)
12. ‘कामायनी’ के रचनाकार कौन हैं?

(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) प्रेमचन्द
(ग) निराला
(घ) दिनकर
✅ सही उत्तर — (क)
13. जयशंकर प्रसाद किस साहित्यिक युग के प्रमुख स्तम्भ हैं?

(क) भक्तिकाल
(ख) रीतिकाल
(ग) छायावाद
(घ) आदिकाल
✅ सही उत्तर — (ग)
14. ‘कंकाल’ क्या है?

(क) नाटक
(ख) उपन्यास
(ग) कविता
(घ) निबन्ध
✅ सही उत्तर — (ख)
15. ‘स्कन्दगुप्त’ किस विधा की रचना है?

(क) नाटक
(ख) उपन्यास
(ग) कहानी
(घ) निबन्ध
✅ सही उत्तर — (क)
16. ‘ममता’ कहानी का प्रमुख संदेश क्या है?

(क) धन-संग्रह
(ख) सत्ता प्राप्ति
(ग) मानवता और निष्काम सेवा
(घ) युद्ध
✅ सही उत्तर — (ग)
17. ‘ममता’ में किस भावना को सर्वोच्च महत्व दिया गया है?

(क) स्वार्थ
(ख) मानवता
(ग) लोभ
(घ) अहंकार
✅ सही उत्तर — (ख)
18. जयशंकर प्रसाद का निधन कब हुआ?

(क) 15 नवम्बर 1937
(ख) 30 जनवरी 1937
(ग) 2 फरवरी 1941
(घ) 15 अगस्त 1947
✅ सही उत्तर — (क)

⚡ अति लघु उत्तरीय प्रश्न

1. ‘ममता’ के लेखक कौन हैं?
उत्तर — जयशंकर प्रसाद।
2. ममता के पिता का नाम क्या था?
उत्तर — चूड़ामणि।
3. ममता किस नदी को देख रही थी?
उत्तर — सोन नदी।
4. ममता का धर्म क्या था?
उत्तर — वह ब्राह्मणी थी।
5. ममता की झोपड़ी में कौन आया था?
उत्तर — एक थका हुआ मुगल पथिक।
6. मुगल पथिक कौन था?
उत्तर — हुमायूँ।
7. ‘कामायनी’ किसकी रचना है?
उत्तर — जयशंकर प्रसाद।
8. जयशंकर प्रसाद किस युग के प्रमुख साहित्यकार हैं?
उत्तर — छायावादी युग।
9. ‘कंकाल’ क्या है?
उत्तर — उपन्यास।
10. ममता ने पथिक की सहायता किस भावना से की?
उत्तर — मानवता और अतिथि-सत्कार की भावना से।

🔥 Board Exam 2027 — Most Important Questions

⭐ इन प्रश्नों की तैयारी अवश्य करें

  1. जयशंकर प्रसाद का जीवन-परिचय एवं साहित्यिक परिचय लिखिए।
  2. ‘ममता’ कहानी का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
  3. ममता का चरित्र-चित्रण कीजिए।
  4. ‘ममता’ शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
  5. ममता ने चूड़ामणि के धन का विरोध क्यों किया?
  6. ममता और हुमायूँ के प्रसंग से क्या शिक्षा मिलती है?
  7. कहानी में मानवता की भावना किस प्रकार प्रकट हुई है?
  8. कर्तव्य और मानवता के संघर्ष को स्पष्ट कीजिए।
  9. ममता की अतिथि-सत्कार भावना पर प्रकाश डालिए।
  10. जयशंकर प्रसाद की भाषा-शैली की विशेषताएँ लिखिए।
  11. जयशंकर प्रसाद की प्रमुख रचनाएँ लिखिए।
  12. ममता कहानी का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।

📌 Quick Revision — एक नजर में

ममता जयशंकर प्रसाद चूड़ामणि हुमायूँ रोहतास दुर्ग सारनाथ सोन नदी मानवता अतिथि-सत्कार त्याग निष्काम सेवा Board Exam 2027

🎯 याद रखने योग्य मुख्य बातें
  • ‘ममता’ के लेखक — जयशंकर प्रसाद।
  • ममता — युवा विधवा ब्राह्मणी और कहानी की मुख्य पात्र।
  • ममता के पिता — चूड़ामणि।
  • कहानी में रोहतास दुर्ग और सारनाथ का ऐतिहासिक वातावरण है।
  • ममता ने संकटग्रस्त मुगल पथिक को आश्रय दिया।
  • वह पथिक हुमायूँ था।
  • ममता ने सहायता के बदले पुरस्कार की इच्छा नहीं रखी।
  • कहानी का केंद्रीय संदेश — मानवता और निष्काम सेवा।

✅ अध्याय का निष्कर्ष

‘ममता’ कहानी केवल ऐतिहासिक घटनाओं का वर्णन नहीं करती, बल्कि मानवता के सार्वभौमिक मूल्य को सामने रखती है। ममता कठिन परिस्थितियों में भी अपने आत्मसम्मान और मानवीय कर्तव्य से समझौता नहीं करती।

कहानी हमें सिखाती है कि संकट में पड़े मनुष्य की सहायता करना, बिना किसी स्वार्थ के सेवा करना और मानवता को संकीर्ण भेदभाव से ऊपर रखना ही सच्चे मनुष्य की पहचान है।

📚 UP Board Class 10 Hindi | Session 2026–27
अध्याय 2 — ममता
✍️ जयशंकर प्रसाद
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