अध्याय 2 — “ममता”
जयशंकर प्रसाद
गद्य-खण्ड | सम्पूर्ण पाठ समाधान
📖 अध्याय परिचय
‘ममता’ जयशंकर प्रसाद की प्रसिद्ध ऐतिहासिक कहानी है। कहानी में रोहतास दुर्ग, ममता, उसके पिता चूड़ामणि और मुगल बादशाह हुमायूँ के प्रसंग के माध्यम से मानवीय करुणा, कर्तव्य, अतिथि-सत्कार, स्वाभिमान तथा त्याग की भावना को प्रस्तुत किया गया है।
ममता विधवा ब्राह्मणी है। उसके पिता चूड़ामणि रोहतास दुर्ग में महत्वपूर्ण पद पर हैं। सत्ता और धन के मोह में चूड़ामणि को रिश्वत स्वीकार करने का विचार आता है, परन्तु ममता इसका विरोध करती है।
बाद में परिस्थितियाँ बदलती हैं और ममता अपने छोटे-से आश्रय में एक अजनबी मुगल पथिक को शरण देती है। वह व्यक्ति हुमायूँ होता है। ममता धर्म और मानवीय कर्तव्य के बीच उत्पन्न द्वंद्व के बावजूद उसकी सहायता करती है।
कहानी के अंत में ममता के त्याग, मानवता और निष्काम सेवा की महत्ता सामने आती है।
✍️ जयशंकर प्रसाद — विस्तृत जीवन-परिचय
- जन्म — 30 जनवरी 1889 ई.
- जन्म-स्थान — सरायगोवर्धन, काशी
- पिता — देवीप्रसाद
- परिवार — ‘सुंघनी साहू’ वैश्य परिवार
- युग — छायावादी युग
- प्रमुख विधाएँ — कविता, कहानी, नाटक, उपन्यास
- प्रमुख महाकाव्य — कामायनी
- प्रमुख नाटक — स्कन्दगुप्त, चन्द्रगुप्त, ध्रुवस्वामिनी
- प्रमुख उपन्यास — कंकाल, तितली, इरावती
- निधन — 15 नवम्बर 1937 ई.
📝 ‘ममता’ का विस्तृत सरल सारांश
कहानी का आरम्भ रोहतास दुर्ग के वातावरण से होता है। दुर्ग में ममता नाम की एक युवा विधवा रहती है। वह अपने जीवन की परिस्थितियों के कारण दुःखी है और सोन नदी के प्रवाह को देख रही है।
ममता के पिता चूड़ामणि दुर्ग के महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं। वे भविष्य की विपत्तियों से बचने के लिए धन इकट्ठा करने के बारे में सोचते हैं। उन्हें रिश्वत के रूप में बहुत-सा सोना मिलता है। ममता उस सोने को देखकर दुखी और चिंतित हो जाती है।
ममता अपने पिता को समझाती है कि इतना धन लेकर भविष्य सुरक्षित करने का प्रयास उचित नहीं है। वह धार्मिक और नैतिक दृष्टि से इस धन को स्वीकार करने का विरोध करती है।
समय बीतता है और परिस्थितियाँ बदलती हैं। ममता सारनाथ के निकट एक छोटी-सी झोपड़ी में रहने लगती है। वह अपने जीवन में संघर्ष करते हुए भी आत्मसम्मान और अपने धर्म का पालन करती है।
एक रात एक थका हुआ मुगल पथिक उसकी झोपड़ी में पहुँचता है। वह सहायता चाहता है। ममता के मन में द्वंद्व उत्पन्न होता है। वह जानती है कि वह व्यक्ति उसके धर्म और समुदाय से अलग है, फिर भी उसके भीतर की मानवता और अतिथि-सत्कार की भावना उसे उसकी सहायता करने के लिए प्रेरित करती है।
ममता उस अजनबी को आश्रय देती है और उसकी सहायता करती है। वह व्यक्ति वास्तव में हुमायूँ होता है। ममता उससे किसी प्रकार का पुरस्कार या धन नहीं चाहती।
हुमायूँ बाद में अपने सैनिकों को उस महिला को खोजने का आदेश देता है जिसने संकट की घड़ी में उसकी सहायता की थी। लेकिन ममता ने सेवा के बदले किसी प्रतिफल की इच्छा नहीं रखी।
कहानी के अंतिम भाग में ममता वृद्धावस्था में अपने जीवन के अंतिम क्षणों में पहुँचती है। उसके जीवन में त्याग, करुणा और मानवता की भावना ही सबसे बड़ी संपत्ति रही।
इस प्रकार कहानी यह संदेश देती है कि मानवता, कर्तव्य और निष्काम सेवा किसी भी जाति, धर्म अथवा सत्ता से ऊपर हैं।
👥 प्रमुख पात्रों का चरित्र-चित्रण
ममता कहानी की मुख्य पात्र है। वह युवा विधवा ब्राह्मणी है। उसके जीवन में अनेक कठिनाइयाँ आती हैं, लेकिन वह अपने आत्मसम्मान, धर्म, कर्तव्य और मानवता को नहीं छोड़ती।
वह धन के मोह का विरोध करती है और संकट में पड़े अजनबी की जाति या धर्म देखकर उसकी सहायता से पीछे नहीं हटती। वह सेवा के बदले पुरस्कार की इच्छा भी नहीं रखती। इसलिए ममता का चरित्र त्याग, करुणा, साहस और निष्काम मानवता का प्रतीक है।
चूड़ामणि ममता के पिता हैं। वे रोहतास दुर्ग से जुड़े महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं। भविष्य की चिंता के कारण वे धन एकत्र करना चाहते हैं। उनका चरित्र उस समय के सत्ता-संबंधों और व्यक्तिगत सुरक्षा की चिंताओं को भी सामने लाता है।
हुमायूँ कहानी में एक थके हुए मुगल पथिक के रूप में आता है। संकट में ममता द्वारा उसे आश्रय दिया जाता है। बाद में उसकी पहचान स्पष्ट होती है। ममता की मानवतापूर्ण सहायता उसके मन पर गहरा प्रभाव डालती है।
📚 कठिन शब्द एवं शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| प्रकोष्ठ | कमरा / कक्ष |
| शोण | सोन नदी |
| वेदना | दुःख / पीड़ा |
| दुहिता | पुत्री |
| निराश्रय | जिसका कोई आश्रय न हो |
| विकल | व्याकुल / दुःखी |
| विपद | संकट / आपत्ति |
| आयोजन | व्यवस्था / प्रबंध |
| विधर्मी | दूसरे धर्म का व्यक्ति |
| आततायी | अत्याचारी |
| अतिथि | घर आने वाला मेहमान |
| आश्रय | शरण / सहारा |
| चन्द्रिका | चाँदनी |
| प्रासाद | महल |
| मरणासन्न | मृत्यु के निकट |
| निष्काम | बिना स्वार्थ के |
❓ महत्वपूर्ण लघु उत्तरीय प्रश्न
✍️ दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
उत्तर: ‘ममता’ जयशंकर प्रसाद की ऐतिहासिक कहानी है। इसमें ममता नामक विधवा ब्राह्मणी के जीवन के माध्यम से मानवता, कर्तव्य और त्याग को प्रस्तुत किया गया है।
ममता के पिता चूड़ामणि रोहतास दुर्ग से जुड़े हुए व्यक्ति हैं। वे भविष्य की सुरक्षा के लिए धन इकट्ठा करना चाहते हैं और उन्हें बहुत-सा सोना प्राप्त होता है। ममता इस धन का विरोध करती है।
बाद में ममता सारनाथ के निकट अपनी झोपड़ी में रहती है। एक रात एक थका हुआ मुगल पथिक उसकी झोपड़ी में आता है। ममता अपने मन के द्वंद्व के बावजूद उसकी सहायता करती है। वह पथिक हुमायूँ होता है।
ममता सहायता के बदले कोई पुरस्कार नहीं चाहती। कहानी के माध्यम से लेखक बताते हैं कि मानवता और निष्काम सेवा किसी भी सांसारिक लाभ से अधिक महान हैं।
उत्तर: ममता कहानी की मुख्य पात्र है। वह युवा विधवा ब्राह्मणी है। उसके जीवन में दुःख और संघर्ष है, फिर भी उसका आत्मसम्मान और मानवीय संवेदना जीवित रहती है।
वह धन के लोभ का विरोध करती है। वह धार्मिक और नैतिक मूल्यों को महत्व देती है। जब एक अजनबी संकट में उसके पास आता है, तो वह उसके धर्म और पहचान की चिंता किए बिना उसकी सहायता करती है।
ममता सेवा के बदले किसी पुरस्कार की अपेक्षा नहीं रखती। इसलिए उसका चरित्र त्याग, साहस, करुणा, कर्तव्य और निष्काम मानवता का आदर्श प्रस्तुत करता है।
उत्तर: ममता और हुमायूँ का प्रसंग कहानी का सबसे महत्वपूर्ण मानवीय पक्ष प्रस्तुत करता है। ममता जानती है कि सामने वाला व्यक्ति उसके धर्म और समुदाय से अलग है, फिर भी वह संकट में पड़े व्यक्ति की सहायता करती है।
इससे लेखक यह संदेश देते हैं कि सच्ची मानवता किसी जाति, धर्म, राजनीतिक सत्ता या व्यक्तिगत स्वार्थ की सीमा में बँधी नहीं होती। संकट के समय दूसरे मनुष्य की सहायता करना ही सबसे बड़ा धर्म है।
उत्तर: जब मुगल पथिक ममता की झोपड़ी में आता है, तब ममता के मन में द्वंद्व उत्पन्न होता है। एक ओर वह अपने धार्मिक और सामाजिक विचारों से प्रभावित है, दूसरी ओर उसके सामने एक थका और संकटग्रस्त मनुष्य है।
अंततः उसकी मानवीय संवेदना अधिक प्रभावशाली होती है और वह अजनबी की सहायता करती है। इस प्रकार कहानी में यह दिखाया गया है कि सच्ची मानवता संकीर्ण भेदभाव से ऊपर होती है।
उत्तर: कहानी का मुख्य केंद्र ममता का चरित्र है। कहानी की घटनाएँ उसके जीवन, विचार, संघर्ष, त्याग और मानवतापूर्ण व्यवहार के आसपास विकसित होती हैं।
वह संकट में पड़े व्यक्ति के प्रति करुणा और ममता का व्यवहार करती है और सहायता के बदले कुछ नहीं चाहती। इसलिए कहानी का शीर्षक ‘ममता’ पूरी तरह सार्थक है।
📜 गद्यांश-आधारित प्रश्नोत्तर
प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक के गद्य-खण्ड में संकलित ‘ममता’ नामक कहानी से लिया गया है। इसके लेखक जयशंकर प्रसाद हैं।
मुख्य भाव: कहानी के आरम्भ में ममता को रोहतास दुर्ग के प्रकोष्ठ में बैठकर सोन नदी के तीव्र प्रवाह को देखते हुए दिखाया गया है। उसके भीतर भी दुःख और भावनाओं का उफान है।
मुख्य भाव: चूड़ामणि द्वारा प्राप्त धन को देखकर ममता प्रसन्न होने के बजाय चिंतित हो जाती है।
मुख्य भाव: कहानी का एक महत्वपूर्ण भाग सारनाथ के ऐतिहासिक वातावरण में घटित होता है।
मुख्य भाव: एक थका हुआ मुगल पथिक ममता की झोपड़ी में आश्रय चाहता है। ममता के मन में धर्म और मानवता के बीच द्वंद्व उत्पन्न होता है।
मुख्य भाव: जिस पथिक की ममता ने सहायता की थी, वह हुमायूँ था। वह ममता की सहायता का मूल्य समझता है।
मुख्य भाव: जीवन के अंतिम समय में भी ममता अपने बीते जीवन और अपनी झोपड़ी से जुड़ी स्मृतियों को याद करती है।
🎯 महत्वपूर्ण MCQ — Board Exam 2027
(क) प्रेमचन्द
(ख) जयशंकर प्रसाद
(ग) रामधारी सिंह दिनकर
(घ) भगवतशरण उपाध्याय
(क) प्रयागराज
(ख) लखनऊ
(ग) सरायगोवर्धन, काशी
(घ) मिर्जापुर
(क) देवीप्रसाद
(ख) चन्द्रबली
(ग) रामदास
(घ) हरिप्रसाद
(क) ममता
(ख) चूड़ामणि
(ग) हुमायूँ
(घ) रानी
(क) चन्द्रगुप्त
(ख) चूड़ामणि
(ग) हुमायूँ
(घ) बाबर
(क) गंगा
(ख) यमुना
(ग) सोन
(घ) नर्मदा
(क) वह विवाहित थी
(ख) वह विधवा थी
(ग) वह अविवाहित थी
(घ) वह संन्यासिनी थी
(क) हुमायूँ
(ख) अपने पिता चूड़ामणि
(ग) सैनिक
(घ) पथिक
(क) सैनिक
(ख) साधु
(ग) थका हुआ मुगल पथिक
(घ) व्यापारी
(क) बाबर
(ख) हुमायूँ
(ग) अकबर
(घ) शाहजहाँ
(क) स्वार्थ
(ख) लालच
(ग) निष्काम मानवता
(घ) क्रोध
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) प्रेमचन्द
(ग) निराला
(घ) दिनकर
(क) भक्तिकाल
(ख) रीतिकाल
(ग) छायावाद
(घ) आदिकाल
(क) नाटक
(ख) उपन्यास
(ग) कविता
(घ) निबन्ध
(क) नाटक
(ख) उपन्यास
(ग) कहानी
(घ) निबन्ध
(क) धन-संग्रह
(ख) सत्ता प्राप्ति
(ग) मानवता और निष्काम सेवा
(घ) युद्ध
(क) स्वार्थ
(ख) मानवता
(ग) लोभ
(घ) अहंकार
(क) 15 नवम्बर 1937
(ख) 30 जनवरी 1937
(ग) 2 फरवरी 1941
(घ) 15 अगस्त 1947
⚡ अति लघु उत्तरीय प्रश्न
उत्तर — जयशंकर प्रसाद।
उत्तर — चूड़ामणि।
उत्तर — सोन नदी।
उत्तर — वह ब्राह्मणी थी।
उत्तर — एक थका हुआ मुगल पथिक।
उत्तर — हुमायूँ।
उत्तर — जयशंकर प्रसाद।
उत्तर — छायावादी युग।
उत्तर — उपन्यास।
उत्तर — मानवता और अतिथि-सत्कार की भावना से।
🔥 Board Exam 2027 — Most Important Questions
⭐ इन प्रश्नों की तैयारी अवश्य करें
- जयशंकर प्रसाद का जीवन-परिचय एवं साहित्यिक परिचय लिखिए।
- ‘ममता’ कहानी का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
- ममता का चरित्र-चित्रण कीजिए।
- ‘ममता’ शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
- ममता ने चूड़ामणि के धन का विरोध क्यों किया?
- ममता और हुमायूँ के प्रसंग से क्या शिक्षा मिलती है?
- कहानी में मानवता की भावना किस प्रकार प्रकट हुई है?
- कर्तव्य और मानवता के संघर्ष को स्पष्ट कीजिए।
- ममता की अतिथि-सत्कार भावना पर प्रकाश डालिए।
- जयशंकर प्रसाद की भाषा-शैली की विशेषताएँ लिखिए।
- जयशंकर प्रसाद की प्रमुख रचनाएँ लिखिए।
- ममता कहानी का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।
📌 Quick Revision — एक नजर में
- ‘ममता’ के लेखक — जयशंकर प्रसाद।
- ममता — युवा विधवा ब्राह्मणी और कहानी की मुख्य पात्र।
- ममता के पिता — चूड़ामणि।
- कहानी में रोहतास दुर्ग और सारनाथ का ऐतिहासिक वातावरण है।
- ममता ने संकटग्रस्त मुगल पथिक को आश्रय दिया।
- वह पथिक हुमायूँ था।
- ममता ने सहायता के बदले पुरस्कार की इच्छा नहीं रखी।
- कहानी का केंद्रीय संदेश — मानवता और निष्काम सेवा।
✅ अध्याय का निष्कर्ष
‘ममता’ कहानी केवल ऐतिहासिक घटनाओं का वर्णन नहीं करती, बल्कि मानवता के सार्वभौमिक मूल्य को सामने रखती है। ममता कठिन परिस्थितियों में भी अपने आत्मसम्मान और मानवीय कर्तव्य से समझौता नहीं करती।
कहानी हमें सिखाती है कि संकट में पड़े मनुष्य की सहायता करना, बिना किसी स्वार्थ के सेवा करना और मानवता को संकीर्ण भेदभाव से ऊपर रखना ही सच्चे मनुष्य की पहचान है।
अध्याय 2 — ममता
✍️ जयशंकर प्रसाद

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