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कक्षा-10 (हिन्दी) - गद्य खण्ड : Chapter-1 (मित्रता) : आचार्य रामचन्द्र शुक्ल

📚 UP BOARD • कक्षा 10 • हिन्दी

अध्याय 1 — “मित्रता”

आचार्य रामचन्द्र शुक्ल

गद्य-खण्ड | सम्पूर्ण पाठ समाधान

🎯 सत्र 2026–27 | Board Exam 2027
📖 विषय हिन्दी
🎓 कक्षा 10वीं
📕 अध्याय मित्रता
✍️ लेखक आचार्य रामचन्द्र शुक्ल

📖 अध्याय परिचय

‘मित्रता’ आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का विचारप्रधान निबन्ध है। इसमें लेखक ने मित्रता के स्वरूप, मित्र के चुनाव, बाल-मैत्री, सच्चे मित्र के गुण तथा संगति के प्रभाव पर विचार किया है।

लेखक बताते हैं कि मनुष्य जब सामाजिक जीवन में प्रवेश करता है तब उसका मन और व्यवहार पूरी तरह परिपक्व नहीं होता। इसलिए उस समय मित्रों का चुनाव विशेष सावधानी से करना चाहिए।

सच्चा मित्र केवल सुख-दुःख में साथ देने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह हमारी गलतियों को पहचानता है, हमें बुरे मार्ग से बचाता है, अच्छे संकल्पों में दृढ़ करता है और निराशा के समय उत्साहित करता है।

✍️ आचार्य रामचन्द्र शुक्ल — विस्तृत जीवन-परिचय

🌟 जीवन-परिचय

आचार्य रामचन्द्र शुक्ल हिन्दी साहित्य के महान निबन्धकार, आलोचक, साहित्येतिहासकार और चिन्तक थे। हिन्दी साहित्य के इतिहास और आलोचना को व्यवस्थित एवं वैज्ञानिक दृष्टि प्रदान करने में उनका अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान रहा।

उनका जन्म 4 अक्टूबर 1884 ई. को उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद के अगोना गाँव में हुआ था।

उनके पिता का नाम पं. चन्द्रबली शुक्ल था। वे फारसी भाषा के अच्छे ज्ञाता थे और पुरानी हिन्दी कविता में भी उनकी रुचि थी। पिता के साहित्यिक वातावरण का बालक रामचन्द्र पर गहरा प्रभाव पड़ा।

👨‍👩‍👦 माता-पिता एवं पारिवारिक वातावरण

आचार्य शुक्ल के पिता पं. चन्द्रबली शुक्ल सरकारी सेवा से जुड़े थे। उनका स्थानान्तरण विभिन्न स्थानों पर होता रहा। इसी कारण शुक्ल जी का बचपन अलग-अलग स्थानों के वातावरण में बीता। उनके पिता के अध्ययन और साहित्यिक रुचि ने शुक्ल जी के बौद्धिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

🎓 शिक्षा-दीक्षा

आचार्य रामचन्द्र शुक्ल की प्रारम्भिक शिक्षा मिर्जापुर में हुई। उन्होंने 1898 ई. में मिडिल तथा 1901 ई. में एंट्रेंस परीक्षा उत्तीर्ण की। उन्होंने मिर्जापुर के मिशन स्कूल से हाईस्कूल की शिक्षा प्राप्त की।

उन्होंने आगे की पढ़ाई के लिए एफ.ए. आदि की शिक्षा का प्रयास किया, लेकिन औपचारिक शिक्षा पूरी नहीं हो सकी। इसके बाद उन्होंने स्वाध्याय को अपने ज्ञान-विस्तार का प्रमुख साधन बनाया। हिन्दी, संस्कृत, अंग्रेजी, दर्शन, इतिहास और मनोविज्ञान आदि विषयों का उन्होंने गहन अध्ययन किया।

💼 कार्यक्षेत्र

शुक्ल जी ने अपने जीवन में अध्यापन और साहित्य-सृजन दोनों क्षेत्रों में महत्वपूर्ण कार्य किया। उन्होंने मिर्जापुर के मिशन स्कूल में ड्राइंग शिक्षक के रूप में भी कार्य किया। बाद में वे काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से जुड़े और हिन्दी विभाग में अध्यापन एवं विभागीय दायित्व निभाया।

📚 साहित्यिक व्यक्तित्व

आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने हिन्दी आलोचना को नई दिशा प्रदान की। उन्होंने साहित्य को केवल मनोरंजन का साधन न मानकर उसे मानव जीवन, समाज और लोकमंगल से जोड़कर देखा। उनके निबन्धों में मनोवैज्ञानिक विश्लेषण, तर्क, विचार-गम्भीरता और जीवन की वास्तविक अनुभूतियाँ दिखाई देती हैं।

📖 प्रमुख रचनाएँ

  • हिन्दी साहित्य का इतिहास
  • चिन्तामणि — भाग 1
  • चिन्तामणि — भाग 2
  • रसमीमांसा
  • त्रिवेणी
  • विचार-वीथी

🖋️ भाषा-शैली

उनकी भाषा प्रायः सरल, गम्भीर, तर्कपूर्ण, विचारप्रधान और प्रभावशाली है। उन्होंने अपने निबन्धों में मनोवैज्ञानिक तथा विश्लेषणात्मक शैली का प्रभावशाली प्रयोग किया।

🏆 साहित्य में स्थान

आचार्य रामचन्द्र शुक्ल को हिन्दी के प्रमुख आलोचकों और साहित्येतिहासकारों में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। उन्होंने हिन्दी साहित्य के इतिहास-लेखन और आलोचना को एक व्यवस्थित आधार प्रदान किया। उनका साहित्य आज भी हिन्दी अध्ययन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

🕯️ निधन

आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का निधन 2 फरवरी 1941 ई. को हुआ।

🎯 बोर्ड परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
  • जन्म — 4 अक्टूबर 1884 ई.
  • जन्म-स्थान — अगोना, बस्ती, उत्तर प्रदेश
  • पिता — पं. चन्द्रबली शुक्ल
  • मिडिल — 1898 ई.
  • एंट्रेंस — 1901 ई.
  • हाईस्कूल — मिशन स्कूल, मिर्जापुर
  • प्रमुख क्षेत्र — निबन्ध, आलोचना, साहित्येतिहास
  • प्रमुख कृति — हिन्दी साहित्य का इतिहास
  • निधन — 2 फरवरी 1941 ई.

📝 पाठ का विस्तृत सरल सारांश

मनुष्य सामाजिक प्राणी है। वह समाज में अनेक लोगों के संपर्क में आता है और उनमें से कुछ व्यक्तियों के साथ उसका मित्रता का संबंध स्थापित होता है। मित्रता मनुष्य के जीवन को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण संबंध है।

लेखक बताते हैं कि मित्रता के लिए यह आवश्यक नहीं कि दोनों मित्रों का स्वभाव, कार्य या रुचि बिल्कुल समान हो। अलग-अलग प्रकृति और रुचि वाले व्यक्तियों में भी गहरी मित्रता हो सकती है। राम और लक्ष्मण तथा कर्ण और दुर्योधन के उदाहरणों से यह बात स्पष्ट की गई है।

सामाजिक जीवन के आरम्भिक समय में मनुष्य का चित्त कोमल और उसकी प्रवृत्तियाँ अपरिपक्व होती हैं। इस अवस्था में जिस व्यक्ति की संगति मिलती है, उसका प्रभाव व्यक्ति के विचार और चरित्र पर पड़ सकता है। इसलिए मित्र का चुनाव बहुत सोच-समझकर करना चाहिए।

बाल्यावस्था की मित्रता में सरलता, उत्साह और भावुकता अधिक होती है। बच्चे अपने सहपाठियों और मित्रों के साथ अनेक कल्पनाएँ करते हैं। छोटी-छोटी बातों से उनका मन प्रसन्न या दुखी हो जाता है।

लेखक सच्चे मित्र को अत्यंत उपयोगी मानते हैं। विश्वासपात्र मित्र जीवन की औषधि के समान होता है। वह हमें दोषों और त्रुटियों से बचाता है, अच्छे संकल्पों में दृढ़ करता है तथा सत्य, पवित्रता और मर्यादा के प्रेम को मजबूत करता है।

सच्चा मित्र आवश्यकता पड़ने पर हमें कुमार्ग पर जाने से सचेत करता है और निराशा के समय उत्साहित करता है। वह केवल हमारी प्रशंसा नहीं करता, बल्कि हमारी कमियों को भी पहचानता और सुधारने में सहायता करता है।

लेखक का निष्कर्ष है कि मित्रता मनुष्य के जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी है, लेकिन मित्र चुनते समय विवेक और सावधानी आवश्यक है। हमें ऐसे व्यक्ति को मित्र बनाना चाहिए जो हमारे चरित्र, विचार और जीवन को श्रेष्ठ बनाने में सहायक हो।

📚 कठिन शब्द एवं शब्दार्थ

शब्द अर्थ
मित्रता मित्र होने का भाव या संबंध
प्रकृति स्वभाव
आचरण व्यवहार
प्रवृत्ति मन का झुकाव
अपरिपक्व जिसका पूर्ण विकास न हुआ हो
अपरिमार्जित जिसे ठीक या शुद्ध न किया गया हो
अनुरक्ति प्रेम या लगाव
उद्गार मन के भावों की अभिव्यक्ति
विश्वासपात्र जिस पर विश्वास किया जा सके
औषध दवाई
सचेत सावधान
हतोत्साहित निराश या उत्साहहीन
निपुणता कुशलता
परख गुण-दोष पहचानने की क्षमता
कुमार्ग गलत मार्ग
सन्मार्ग अच्छा या उचित मार्ग
मर्यादा उचित आचरण की सीमा

❓ महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर

प्रश्न 1. ‘मित्रता’ पाठ के लेखक कौन हैं?
उत्तर: ‘मित्रता’ पाठ के लेखक हिन्दी साहित्य के प्रसिद्ध निबन्धकार, आलोचक और साहित्येतिहासकार आचार्य रामचन्द्र शुक्ल हैं।
प्रश्न 2. मित्रता के लिए क्या यह आवश्यक है कि दोनों मित्रों की प्रकृति समान हो?
उत्तर: नहीं। मित्रता के लिए दोनों मित्रों की प्रकृति, रुचि या कार्य का समान होना आवश्यक नहीं है। अलग-अलग स्वभाव वाले व्यक्ति भी एक-दूसरे के गुणों से प्रभावित होकर घनिष्ठ मित्र बन सकते हैं।
प्रश्न 3. राम और लक्ष्मण के स्वभाव में क्या अंतर था?
उत्तर: राम धीर और शांत स्वभाव के थे, जबकि लक्ष्मण उग्र और उद्धत स्वभाव के थे। फिर भी दोनों भाइयों में अत्यंत गहरा स्नेह था। इससे स्पष्ट होता है कि मित्रता या प्रेम के लिए स्वभाव की समानता अनिवार्य नहीं है।
प्रश्न 4. कर्ण और दुर्योधन की मित्रता से क्या स्पष्ट होता है?
उत्तर: कर्ण उदार और उच्च विचारों वाला था, जबकि दुर्योधन के स्वभाव में लोभ और अन्य दोष थे। फिर भी दोनों में गहरी मित्रता थी। इससे स्पष्ट होता है कि मित्रता के लिए दोनों व्यक्तियों की प्रकृति का समान होना आवश्यक नहीं है।
प्रश्न 5. सामाजिक जीवन के प्रारम्भिक समय में मनुष्य की क्या स्थिति होती है?
उत्तर: सामाजिक जीवन के आरम्भिक समय में मनुष्य का चित्त कोमल, भाव अपरिमार्जित और प्रवृत्ति अपरिपक्व होती है। वह अपने आसपास के लोगों से शीघ्र प्रभावित हो सकता है। इसलिए इस अवस्था में अच्छी संगति बहुत आवश्यक है।
प्रश्न 6. व्यक्ति को अपने मित्र से क्या आशा रखनी चाहिए?
उत्तर: व्यक्ति को अपने मित्र से आशा रखनी चाहिए कि वह उसे अच्छे संकल्पों में दृढ़ करेगा, दोषों और त्रुटियों से बचाएगा, सत्य एवं पवित्रता के प्रति प्रेम बढ़ाएगा, कुमार्ग से सचेत करेगा और निराशा के समय उत्साहित करेगा।
प्रश्न 7. विश्वासपात्र मित्र को जीवन की औषधि क्यों कहा गया है?
उत्तर: जिस प्रकार औषधि रोगों को दूर करके शरीर को स्वस्थ बनाती है, उसी प्रकार विश्वासपात्र मित्र व्यक्ति को दोषों और बुराइयों से बचाकर उसके जीवन को बेहतर बनाने में सहायता करता है। इसी कारण उसे जीवन की औषधि कहा गया है।
प्रश्न 8. सच्चे मित्र की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: सच्चा मित्र विश्वासपात्र, हितैषी, धैर्यवान और सदाचारी होता है। वह मित्र की अच्छाइयों को बढ़ाने तथा कमियों को दूर करने में सहायता करता है। वह गलत मार्ग से रोकता है और कठिन समय में उत्साह देता है।
प्रश्न 9. क्या केवल प्रशंसा करने वाला व्यक्ति सच्चा मित्र हो सकता है?
उत्तर: नहीं। केवल प्रशंसा करने वाला व्यक्ति सच्चा मित्र नहीं माना जा सकता। सच्चा मित्र आवश्यकता पड़ने पर हमारी कमियों और गलतियों को भी बताता है तथा उन्हें सुधारने में सहायता करता है।
प्रश्न 10. मित्र चुनते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर: मित्र चुनते समय उसके चरित्र, स्वभाव, विचार, आचरण और आदतों पर ध्यान देना चाहिए। हमें ऐसे व्यक्ति की संगति चुननी चाहिए जो अच्छे कार्यों के लिए प्रेरित करे और हमारे व्यक्तित्व के विकास में सहायक हो।

✍️ दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. ‘मित्रता’ पाठ का सारांश लिखिए।
उत्तर:

‘मित्रता’ आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का विचारप्रधान निबन्ध है। लेखक ने इसमें मित्रता के महत्व और सच्चे मित्र के गुणों का विवेचन किया है।

लेखक बताते हैं कि मित्रता के लिए समान स्वभाव या समान रुचि आवश्यक नहीं है। भिन्न प्रकृति के व्यक्तियों में भी गहरी मित्रता हो सकती है। सामाजिक जीवन के आरम्भिक समय में व्यक्ति का मन कोमल और प्रवृत्ति अपरिपक्व होती है, इसलिए संगति का प्रभाव उसके जीवन पर पड़ता है।

विश्वासपात्र मित्र जीवन की औषधि के समान होता है। वह हमें दोषों और त्रुटियों से बचाता है, अच्छे संकल्पों में दृढ़ करता है, कुमार्ग से रोकता है और निराशा में उत्साहित करता है।

अतः लेखक का संदेश है कि मित्रता करते समय विवेक से काम लेना चाहिए और ऐसे मित्र चुनने चाहिए जो हमारे जीवन और चरित्र को श्रेष्ठ बनाने में सहायक हों।

प्रश्न 2. आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का जीवन-परिचय एवं साहित्यिक परिचय लिखिए।
उत्तर:

आचार्य रामचन्द्र शुक्ल हिन्दी के महान निबन्धकार, आलोचक, साहित्येतिहासकार और चिन्तक थे। उनका जन्म 4 अक्टूबर 1884 ई. को बस्ती जनपद के अगोना गाँव में हुआ था। उनके पिता का नाम पं. चन्द्रबली शुक्ल था।

उनकी शिक्षा मिर्जापुर में हुई। उन्होंने 1898 ई. में मिडिल और 1901 ई. में एंट्रेंस परीक्षा उत्तीर्ण की। आगे की औपचारिक शिक्षा पूरी न हो सकी, इसलिए उन्होंने स्वाध्याय द्वारा हिन्दी, संस्कृत, अंग्रेजी, दर्शन, इतिहास और मनोविज्ञान का अध्ययन किया।

उन्होंने अध्यापन और साहित्य-सृजन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किया। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में हिन्दी विभाग से जुड़कर उन्होंने हिन्दी के अध्ययन-अध्यापन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

उनकी प्रमुख रचनाओं में ‘हिन्दी साहित्य का इतिहास’, ‘चिन्तामणि’, ‘रसमीमांसा’ और ‘त्रिवेणी’ उल्लेखनीय हैं। उनकी भाषा गम्भीर, तर्कपूर्ण, विचारप्रधान और प्रभावशाली है। उनका निधन 2 फरवरी 1941 ई. को हुआ।

प्रश्न 3. सच्चे मित्र की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:

सच्चा मित्र अपने मित्र का हित चाहता है। वह सुख-दुःख में साथ देता है और कठिन परिस्थितियों में सहायता करता है। वह केवल प्रशंसा करके मित्र को प्रसन्न नहीं करता, बल्कि उसकी कमियों को भी बताता है।

सच्चा मित्र गलत कार्यों से रोकता है और अच्छे कार्यों के लिए प्रेरित करता है। वह मित्र के सत्य, पवित्रता और मर्यादा के प्रेम को मजबूत करता है। निराशा के समय वह उत्साह बढ़ाता है। इस प्रकार सच्चा मित्र जीवन को सही दिशा देने वाला मार्गदर्शक होता है।

प्रश्न 4. मित्रता के लिए स्वभाव की समानता आवश्यक नहीं है — स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:

लेखक के अनुसार मित्रता के लिए दोनों व्यक्तियों की प्रकृति, रुचि और कार्य का समान होना आवश्यक नहीं है। अलग-अलग स्वभाव वाले व्यक्ति भी एक-दूसरे के गुणों से प्रभावित होकर मित्र बन सकते हैं।

राम और लक्ष्मण के उदाहरण से यह स्पष्ट होता है। राम शांत और धीर स्वभाव के थे, जबकि लक्ष्मण उग्र और उद्धत स्वभाव के थे। फिर भी दोनों में अत्यंत गहरा स्नेह था।

इसलिए सच्ची मित्रता का आधार केवल स्वभाव की समानता नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और परस्पर हितभावना है।

प्रश्न 5. ‘मित्रता’ पाठ से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर:

‘मित्रता’ पाठ हमें शिक्षा देता है कि मित्र का चुनाव सोच-समझकर करना चाहिए। मनुष्य जिस संगति में रहता है, उसका प्रभाव उसके विचारों और व्यवहार पर पड़ता है।

हमें ऐसे मित्र चुनने चाहिए जो अच्छे कार्यों के लिए प्रेरित करें, हमारी गलतियों को सुधारें, बुराई से बचाएँ और कठिन समय में हमारा उत्साह बढ़ाएँ।

📜 गद्यांश-आधारित प्रश्नोत्तर

सन्दर्भ लिखने का सामान्य प्रारूप:
प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक के ‘गद्य-खण्ड’ में संकलित ‘मित्रता’ नामक निबन्ध से लिया गया है। इसके लेखक आचार्य रामचन्द्र शुक्ल हैं।
गद्यांश 1 — सामाजिक जीवन और मित्र-चयन

प्रश्न: सामाजिक जीवन के प्रारम्भ में मनुष्य की मानसिक स्थिति कैसी होती है?

उत्तर: सामाजिक जीवन के आरम्भ में मनुष्य का चित्त कोमल, भाव अपरिमार्जित और प्रवृत्ति अपरिपक्व होती है। वह अपने आसपास के लोगों से शीघ्र प्रभावित हो सकता है।

प्रश्न: ऐसे समय में मित्र चुनने में सावधानी क्यों आवश्यक है?

उत्तर: क्योंकि मित्रों की संगति का प्रभाव व्यक्ति के विचार, व्यवहार और चरित्र पर पड़ सकता है। गलत संगति उसे बुरी दिशा में ले जा सकती है।

गद्यांश 2 — सच्चा मित्र

प्रश्न: विश्वासपात्र मित्र को जीवन की औषधि क्यों कहा गया है?

उत्तर: क्योंकि सच्चा मित्र व्यक्ति के दोषों और त्रुटियों को दूर करने, उसे बुराई से बचाने और अच्छे मार्ग पर चलाने में सहायता करता है। जैसे औषधि रोग को दूर करती है, वैसे ही सच्चा मित्र जीवन की बुराइयों को दूर करने में सहायक होता है।

प्रश्न: सच्चा मित्र निराशा के समय क्या करता है?

उत्तर: वह मित्र का उत्साह बढ़ाता है और उसे हिम्मत के साथ कठिनाइयों का सामना करने के लिए प्रेरित करता है।

गद्यांश 3 — मित्रता में समानता

प्रश्न: क्या मित्रता के लिए समान रुचि आवश्यक है?

उत्तर: नहीं। अलग-अलग रुचि और स्वभाव वाले व्यक्तियों में भी सच्ची मित्रता हो सकती है।

प्रश्न: राम और लक्ष्मण का उदाहरण किस बात को स्पष्ट करता है?

उत्तर: राम और लक्ष्मण के स्वभाव में अंतर होते हुए भी उनमें गहरा प्रेम था। इससे स्पष्ट होता है कि मित्रता या स्नेह के लिए स्वभाव की समानता अनिवार्य नहीं है।

गद्यांश 4 — सच्ची मित्रता की पहचान

प्रश्न: केवल प्रशंसा करने वाला व्यक्ति सच्चा मित्र क्यों नहीं माना जा सकता?

उत्तर: क्योंकि सच्चा मित्र केवल प्रसन्न करने के लिए प्रशंसा नहीं करता। वह हमारी गलतियों और कमियों को भी बताता है तथा उन्हें सुधारने में सहायता करता है।

प्रश्न: सच्चे मित्र में कौन-कौन से गुण होने चाहिए?

उत्तर: सच्चा मित्र विश्वासपात्र, हितैषी, सत्यनिष्ठ, शिष्ट, धैर्यवान और सदाचारी होना चाहिए। उसे अपने मित्र की उन्नति और भलाई की चिंता करनी चाहिए।

गद्यांश 5 — अच्छी और बुरी संगति

प्रश्न: बुरी संगति का मनुष्य पर क्या प्रभाव पड़ता है?

उत्तर: बुरी संगति व्यक्ति के विचारों और व्यवहार को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकती है। वह धीरे-धीरे अच्छे संस्कारों और उचित जीवन-मार्ग से दूर हो सकता है।

प्रश्न: अच्छी संगति क्यों आवश्यक है?

उत्तर: अच्छी संगति व्यक्ति को अच्छे विचार, सदाचार, परिश्रम और उचित आचरण की ओर प्रेरित करती है।

🎯 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न

1. ‘मित्रता’ के लेखक कौन हैं?

(क) प्रेमचन्द
(ख) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
(ग) जयशंकर प्रसाद
(घ) महादेवी वर्मा
✅ सही उत्तर — (ख)
2. ‘मित्रता’ किस विधा की रचना है?

(क) कहानी
(ख) कविता
(ग) निबन्ध
(घ) नाटक
✅ सही उत्तर — (ग)
3. आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का जन्म कब हुआ?

(क) 4 अक्टूबर 1884
(ख) 2 फरवरी 1884
(ग) 4 अक्टूबर 1885
(घ) 2 फरवरी 1941
✅ सही उत्तर — (क)
4. आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का जन्म-स्थान क्या था?

(क) मिर्जापुर
(ख) अगोना
(ग) वाराणसी
(घ) प्रयागराज
✅ सही उत्तर — (ख)
5. आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के पिता का नाम क्या था?

(क) पं. चन्द्रबली शुक्ल
(ख) पं. रामचन्द्र शुक्ल
(ग) पं. बदरीनाथ शुक्ल
(घ) पं. गोपाल शुक्ल
✅ सही उत्तर — (क)
6. शुक्ल जी ने हाईस्कूल की शिक्षा कहाँ से प्राप्त की?

(क) काशी हिन्दू विश्वविद्यालय
(ख) मिशन स्कूल, मिर्जापुर
(ग) इलाहाबाद विश्वविद्यालय
(घ) लखनऊ विश्वविद्यालय
✅ सही उत्तर — (ख)
7. शुक्ल जी ने मिडिल परीक्षा कब उत्तीर्ण की?

(क) 1898 ई.
(ख) 1901 ई.
(ग) 1904 ई.
(घ) 1910 ई.
✅ सही उत्तर — (क)
8. शुक्ल जी ने एंट्रेंस परीक्षा कब उत्तीर्ण की?

(क) 1898 ई.
(ख) 1901 ई.
(ग) 1904 ई.
(घ) 1912 ई.
✅ सही उत्तर — (ख)
9. विश्वासपात्र मित्र को किसके समान माना गया है?

(क) शिक्षक
(ख) औषधि
(ग) धन
(घ) राजा
✅ सही उत्तर — (ख)
10. राम का स्वभाव कैसा था?

(क) उग्र
(ख) उद्धत
(ग) धीर और शांत
(घ) चंचल
✅ सही उत्तर — (ग)
11. लक्ष्मण का स्वभाव कैसा बताया गया है?

(क) उग्र और उद्धत
(ख) शांत
(ग) अत्यंत गंभीर
(घ) डरपोक
✅ सही उत्तर — (क)
12. सच्चा मित्र क्या करता है?

(क) गलत कार्यों को बढ़ावा देता है
(ख) केवल प्रशंसा करता है
(ग) दोषों से बचाता है
(घ) स्वार्थ पूरा करता है
✅ सही उत्तर — (ग)
13. शुक्ल जी का निधन कब हुआ?

(क) 4 अक्टूबर 1884
(ख) 2 फरवरी 1941
(ग) 2 फरवरी 1940
(घ) 15 अगस्त 1947
✅ सही उत्तर — (ख)
14. ‘कुमार्ग’ का अर्थ है—

(क) अच्छा मार्ग
(ख) गलत मार्ग
(ग) कठिन मार्ग
(घ) छोटा मार्ग
✅ सही उत्तर — (ख)
15. ‘सचेत’ का अर्थ है—

(क) प्रसन्न
(ख) सावधान
(ग) निराश
(घ) क्रोधित
✅ सही उत्तर — (ख)

⚡ अति लघु उत्तरीय प्रश्न

1. ‘मित्रता’ के लेखक कौन हैं?
उत्तर — आचार्य रामचन्द्र शुक्ल।
2. ‘मित्रता’ किस विधा की रचना है?
उत्तर — निबन्ध।
3. शुक्ल जी का जन्म कब हुआ?
उत्तर — 4 अक्टूबर 1884 ई.
4. शुक्ल जी का जन्म कहाँ हुआ?
उत्तर — अगोना, बस्ती।
5. शुक्ल जी के पिता का नाम क्या था?
उत्तर — पं. चन्द्रबली शुक्ल।
6. विश्वासपात्र मित्र किसके समान है?
उत्तर — जीवन की औषधि के समान।
7. ‘कुमार्ग’ का अर्थ क्या है?
उत्तर — गलत मार्ग।
8. ‘सन्मार्ग’ का अर्थ क्या है?
उत्तर — अच्छा या उचित मार्ग।
9. शुक्ल जी की प्रमुख कृति कौन-सी है?
उत्तर — हिन्दी साहित्य का इतिहास।
10. शुक्ल जी का निधन कब हुआ?
उत्तर — 2 फरवरी 1941 ई.

🔥 Board Exam 2027 — Most Important

⭐ इस अध्याय को इन प्रश्नों के साथ जरूर तैयार करें

  1. आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का जीवन-परिचय एवं साहित्यिक परिचय।
  2. ‘मित्रता’ पाठ का सारांश लिखिए।
  3. मित्रता के लिए समान स्वभाव आवश्यक नहीं है — स्पष्ट कीजिए।
  4. राम और लक्ष्मण के स्वभाव में क्या अंतर था?
  5. कर्ण और दुर्योधन की मित्रता से क्या शिक्षा मिलती है?
  6. विश्वासपात्र मित्र को जीवन की औषधि क्यों कहा गया है?
  7. सच्चे मित्र की विशेषताएँ लिखिए।
  8. व्यक्ति को अपने मित्रों से कैसी आशा रखनी चाहिए?
  9. बाल-मैत्री की विशेषताओं को स्पष्ट कीजिए।
  10. अच्छी और बुरी संगति का मनुष्य के जीवन पर प्रभाव बताइए।
  11. मित्र का चुनाव करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
  12. पाठ से प्राप्त शिक्षा लिखिए।

📌 Quick Revision — एक नजर में पूरा अध्याय

मित्रता आचार्य रामचन्द्र शुक्ल सच्चा मित्र विश्वासपात्र मित्र बाल-मैत्री अच्छी संगति मित्र का चुनाव कुमार्ग सन्मार्ग जीवन की औषधि UP Board 2027

🎯 याद रखने योग्य मुख्य बातें

  • मित्रता के लिए स्वभाव की समानता अनिवार्य नहीं है।
  • सामाजिक जीवन के प्रारम्भ में व्यक्ति आसानी से प्रभावित होता है।
  • अच्छी संगति चरित्र-विकास में सहायक होती है।
  • विश्वासपात्र मित्र जीवन की औषधि के समान होता है।
  • सच्चा मित्र हमारी गलतियों को बताकर सुधारने में सहायता करता है।
  • सच्चा मित्र कुमार्ग से बचाकर सन्मार्ग की ओर प्रेरित करता है।
  • मित्र का चुनाव विवेक और सावधानी से करना चाहिए।

✅ अध्याय का निष्कर्ष

‘मित्रता’ निबन्ध हमें समझाता है कि मित्रता मनुष्य के जीवन का अत्यंत प्रभावशाली संबंध है। सही मित्र जीवन को ऊँचा उठा सकता है, जबकि गलत संगति व्यक्ति को गलत दिशा में ले जा सकती है।

इसलिए मित्र चुनते समय केवल बाहरी आकर्षण या मनोरंजन को महत्व न देकर मित्र के चरित्र, विचार, स्वभाव और आचरण को देखना चाहिए। सच्चा मित्र वही है जो हमारे हित में हमें सही मार्ग दिखाए और हमारी कमियों को दूर करने में सहायता करे।

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