Home गीता सार गीता श्लोक अनुवाद Jakhai Baba UP Board Material GS Kitaab

Ads Area

Class 12th Chemistry Chapter-4 : d एवं f-ब्लॉक के तत्व (d and f Block Elemens)

🧪 NCERT कक्षा 12 रसायन विज्ञान • सत्र 2026-27 (हिंदी माध्यम)
⚗️ अध्याय - 4 (CHAPTER 4) 🧪

d एवं f-ब्लॉक के तत्व
(d and f Block Elements)

🔬 मुख्य बोर्ड टॉपिक्स व प्रयोगशाला परीक्षण (Key Lab Topics) 🧲
⚛️ d-ब्लॉक (संक्रमण धातुएँ) 🧬 f-ब्लॉक (अंतर-संक्रमण तत्व) 🧲 चुंबकीय गुण (μ = √n(n+2) BM) 🧪 KMnO₄ व K₂Cr₂O₇ निर्माण व गुण
⚗️ [Ar] 3d¹⁻¹⁰ 4s¹⁻²  |  🟣 KMnO₄  |  🟠 K₂Cr₂O₇  |  🔬 4f (लेन्थेनाइड) & 5f (ऐक्टिनाइड)
📝 100% बोर्ड स्पेशल हिंदी हस्तलिखित नोट्स 🌐 Sunil Learning Point

⚛️ टॉपिक 1: d-ब्लॉक के तत्व (संक्रमण तत्व) - परिचय, इलेक्ट्रॉनिक विन्यास एवं गुणधर्म

📌 1. परिचय एवं इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (Introduction)

वे तत्व जिनमें अंतिम इलेक्ट्रॉन बाह्य कोश से पहले वाले कोश (उपान्त्य कोश - Penultimate Shell) के d-कक्षक में प्रवेश करता है, उन्हें d-ब्लॉक के तत्व कहते हैं। इन्हें आवर्त सारणी में s-ब्लॉक तथा p-ब्लॉक के मध्य रखा गया है, इसलिए इन्हें संक्रमण तत्व (Transition Elements) भी कहा जाता है।

सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास:
(n - 1) d¹⁻¹⁰ n s¹⁻²
संक्रमण तत्व की परिभाषा: जिनके परमाणु या किसी सामान्य ऑक्सीकरण अवस्था में d-कक्षक आंशिक (अपूर्ण) रूप से भरे होते हैं।
विशेष नोट: Zinc (Zn), Cadmium (Cd) एवं Mercury (Hg) के d-कक्षक पूर्णतः भरे (d¹⁰) होते हैं, इसलिए इन्हें सच्चा संक्रमण तत्व नहीं माना जाता।

✨ 2. d-ब्लॉक तत्वों के प्रमुख सामान्य लक्षण (General Characteristics)

1. परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थाएँ:
(n-1)d तथा ns कक्षकों की ऊर्जाओं में बहुत कम अंतर होने के कारण ये एक से अधिक ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाते हैं (जैसे Mn: +2 से +7 तक)।
2. रंगीन आयनों का बनना:
अयुग्मित d-इलेक्ट्रॉनों के कारण प्रकाश के दृश्य क्षेत्र से ऊर्जा अवशोषित कर d-d संक्रमण (d-d transition) होता है, जिससे इनके यौगिक रंगीन होते हैं।
3. चुंबकीय गुण (Magnetic Properties):
• अयुग्मित इलेक्ट्रॉन उपस्थिति → अनुचुंबकीय (Paramagnetic)
• सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित → प्रतिचुंबकीय (Diamagnetic)
चुंबकीय आघूर्ण सूत्र: μ = √[n(n + 2)] BM (जहाँ n = अयुग्मित इलेक्ट्रॉन)
4. उत्प्रेरकीय गुण (Catalytic Properties):
परिवर्तनशील ऑक्सीकरण अवस्था व ठोस सतह पर रिक्त d-कक्षक उपलब्ध कराने के कारण ये अच्छे उत्प्रेरक हैं (उदा. Fe, Ni, V₂O₅)।
5. संकुल/जटिल यौगिक निर्माण:
छोटे आकार, उच्च नाभिकीय आवेश एवं रिक्त d-कक्षकों की उपलब्धता के कारण ये आसानी से संकुल बनाते हैं (उदा. [Fe(CN)₆]³⁻)।
6. अंतराकाशी यौगिक & मिश्रधातु:
क्रिस्टल जालक के खाली स्थानों (Voids) में H, C, N जैसे छोटे परमाणु फंसकर अंतराकाशी यौगिक बनाते हैं (उदा. TiC, Fe₃H)।

🔥 बोर्ड परीक्षा विशेष प्रश्न (Board Important Questions)

प्रश्न 1: Cr (Z = 24) तथा Cu (Z = 29) का अपवाद इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।
Cr (24): 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁶ 3d⁵ 4s¹ (अर्धपूरित d-कक्षक के कारण अधिक स्थायित्व)
Cu (29): 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁶ 3d¹⁰ 4s¹ (पूर्णपूरित d-कक्षक के कारण अधिक स्थायित्व)
प्रश्न 2: Zn²⁺ आयन रंगहीन तथा प्रतिचुंबकीय क्यों होता है?
उत्तर: Zn²⁺ का विन्यास [Ar] 3d¹⁰ है। d-कक्षक पूर्णतः भरा होने के कारण इसमें अयुग्मित इलेक्ट्रॉन अनुपस्थित होते हैं (n = 0), इसलिए यह प्रतिचुंबकीय होता है तथा d-d संक्रमण न होने के कारण यह रंगहीन होता है।
🎓 Complete Chemistry Notes & Board Special Numericals | Sunil Learning Point

🧪 टॉपिक 2: d-ब्लॉक के महत्वपूर्ण यौगिक - K₂Cr₂O₇ एवं KMnO₄

🟠 1. पोटैशियम डाइक्रोमेट (Potassium Dichromate - K₂Cr₂O₇)

यह एक तीव्र ऑक्सीकारक पदार्थ तथा नारंगी रंग का क्रिस्टलीय ठोस है। इसका निर्माण क्रोमाइट अयस्क (FeCr₂O₄) से किया जाता है।

निर्माण की विधि (Preparation Method):
1. क्रोमाइट अयस्क को Na₂CO₃ तथा वायु की उपस्थिति में भर्जित करने पर सोडियम क्रोमेट बनता है:
  4FeCr₂O₄ + 8Na₂CO₃ + 7O₂ → 8Na₂CrO₄ + 2Fe₂O₃ + 8CO₂↑
2. Na₂CrO₄ की अम्लीय अभिक्रिया (H₂SO₄) से Na₂Cr₂O₇ बनता है:
  2Na₂CrO₄ + H₂SO₄ → Na₂Cr₂O₇ + Na₂SO₄ + H₂O
3. Na₂Cr₂O₇ की KCl से अभिक्रिया द्वारा K₂Cr₂O₇ प्राप्त होता है:
  Na₂Cr₂O₇ + 2KCl → K₂Cr₂O₇ + 2NaCl
⚡ अम्लीय माध्यम में ऑक्सीकारक गुण (Cr₂O₇²⁻ + 14H⁺ + 6e⁻ → 2Cr³⁺ + 7H₂O):
• Fe²⁺ को Fe³⁺ में ऑक्सीकृत करता है।
• I⁻ को I₂ में ऑक्सीकृत करता है।
• H₂S को सल्फर (S) में ऑक्सीकृत करता है।

🟣 2. पोटैशियम परमैंगनेट (Potassium Permanganate - KMnO₄)

यह गहरे बैंगनी/काले रंग का क्रिस्टलीय ठोस पदार्थ है जो एक प्रबल ऑक्सीकारक है। इसका निर्माण पाइरोलुसाइट अयस्क (MnO₂) द्वारा किया जाता है।

निर्माण की विधि (Preparation):
• MnO₂ को KOH व KNO₃ (ऑक्सीकारक) के साथ गलित करने पर हरा पोटैशियम मैंगनेट (K₂MnO₄) बनता है:
  2MnO₂ + 4KOH + O₂ → 2K₂MnO₄ + 2H₂O
• K₂MnO₄ का अम्लीय विलयन में या विद्युत-अपघटन द्वारा ऑक्सीकरण करने पर KMnO₄ प्राप्त होता है:
  3MnO₄²⁻ + 4H⁺ → 2MnO₄⁻ + MnO₂ + 2H₂O
🔥 माध्यम के अनुसार KMnO₄ का ऑक्सीकारक गुण:
1. अम्लीय माध्यम (Acidic): MnO₄⁻ + 8H⁺ + 5e⁻ → Mn²⁺ + 4H₂O (तुल्यांकी भार = M/5)
2. उदासीन / दुर्बल क्षारीय माध्यम: MnO₄⁻ + 2H₂O + 3e⁻ → MnO₂ + 4OH⁻ (तुल्यांकी भार = M/3)
3. प्रबल क्षारीय माध्यम: MnO₄⁻ + e⁻ → MnO₄²⁻ (तुल्यांकी भार = M/1)

⚡ बोर्ड परीक्षा में पूछी जाने वाली महत्वपूर्ण रासायनिक अभिक्रियाएँ (Equations)

1. अम्लीय KMnO₄ द्वारा फेरस आयन (Fe²⁺) का फेरिक आयन (Fe³⁺) में ऑक्सीकरण:
MnO₄⁻ + 5Fe²⁺ + 8H⁺ → Mn²⁺ + 5Fe³⁺ + 4H₂O
2. अम्लीय KMnO₄ द्वारा ऑक्सेलेट आयन (C₂O₄²⁻) का CO₂ में ऑक्सीकरण:
2MnO₄⁻ + 5C₂O₄²⁻ + 16H⁺ → 2Mn²⁺ + 10CO₂ + 8H₂O
3. अम्लीय K₂Cr₂O₇ द्वारा H₂S का सल्फर (S) में ऑक्सीकरण:
Cr₂O₇²⁻ + 3H₂S + 8H⁺ → 2Cr³⁺ + 3S + 7H₂O
🎓 Complete Chemistry Notes & Board Special Numericals | Sunil Learning Point

🧬 टॉपिक 3: f-ब्लॉक के तत्व (अंतर-संक्रमण तत्व) - लेन्थेनाइड एवं ऐक्टिनाइड

🔹 1. लेन्थेनाइड (Lanthanoids - 4f श्रेणी)

वे तत्व जिनमें अंतिम इलेक्ट्रॉन उपांत्य से अंदर वाले कोश (Antepenultimate Shell) के 4f-कक्षक में प्रवेश करता है, उन्हें लेन्थेनाइड (4f-श्रेणी) कहते हैं। ये सेरियम (58Ce) से ल्यूटेशियम (71Lu) तक कुल 14 तत्व हैं।

इलेक्ट्रॉनिक विन्यास एवं ऑक्सीकरण अवस्था:
सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: [Xe] 4f¹⁻¹⁴ 5d⁰⁻¹ 6s²
ऑक्सीकरण अवस्था: लेन्थेनाइडों की सबसे सामान्य और स्थाई ऑक्सीकरण अवस्था +3 होती है। इसके अतिरिक्त स्थायित्व (f⁰, f⁷, f¹⁴) के कारण Ce⁴⁺, Eu²⁺ तथा Yb²⁺ भी बनते हैं।
🔥 लेन्थेनाइड आकुंचन (Lanthanoid Contraction):
परमाणु क्रमांक बढ़ने पर 4f-इलेक्ट्रॉनों के दुर्बल परिरक्षण प्रभाव (Poor Shielding Effect) के कारण नाभिकीय आवेश बढ़ता है, जिससे परमाण्विक व आयनिक त्रिज्याओं में निरंतर कमी आती है। इसे लेन्थेनाइड आकुंचन कहते हैं।
परिणाम: Zr और Hf की त्रिज्याएँ लगभग समान होना; लेन्थेनाइडों के रासायनिक गुणों में अत्यधिक समानता।

🔴 2. ऐक्टिनाइड (Actinoids - 5f श्रेणी)

वे तत्व जिनमें अंतिम इलेक्ट्रॉन 5f-कक्षक में भरता है, उन्हें ऐक्टिनाइड (5f-श्रेणी) कहते हैं। ये थोरियम (90Th) से लॉरेंसियम (103Lr) तक कुल 14 तत्व हैं।

सामान्य विन्यास: [Rn] 5f¹⁻¹⁴ 6d⁰⁻¹ 7s²
रेडियोऐक्टिव प्रकृति: प्रॉमिसियम (Pm) को छोड़कर सभी ऐक्टिनाइड रेडियोऐक्टिव होते हैं। यूरेनियम (92U) के बाद वाले तत्वों को पराबैंगनी/परा-यूरेनियम तत्व (Transuranic Elements) कहते हैं।
ऑक्सीकरण अवस्थाएँ: 5f, 6d और 7s कक्षकों की ऊर्जाओं में बहुत कम अंतर होने के कारण ये +3, +4, +5, +6 तथा +7 जैसी विस्तृत परिवर्तनशील ऑक्सीकरण अवस्थाएँ दर्शाते हैं।

🔥 बोर्ड परीक्षा विशेष: लेन्थेनाइड एवं ऐक्टिनाइड में अंतर (Comparison Table)

गुण (Property) लेन्थेनाइड (4f-श्रेणी) ऐक्टिनाइड (5f-श्रेणी)
इलेक्ट्रॉन प्रवेश 4f-कक्षक में भरते हैं। 5f-कक्षक में भरते हैं।
ऑक्सीकरण अवस्थाएँ मुख्यतः +3 (सीमित परिवर्तनशील)। +3, +4, +5, +6, +7 (विस्तृत परिवर्तनशील)।
रेडियोऐक्टिवता Pm को छोड़कर अ-रेडियोऐक्टिव हैं। सभी तत्व रेडियोऐक्टिव हैं।
आकुंचन (Contraction) लेन्थेनाइड आकुंचन तुलनात्मक रूप से कम होता है। 5f के अधिक दुर्बल परिरक्षण के कारण आकुंचन अधिक होता है।
🎓 Complete Chemistry Notes & Board Special Numericals | Sunil Learning Point

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

Top Post Ad

Below Post Ad

Ads Area