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विज्ञान 🔬 Chapter-13: जीव एवं जीवन (Full Notes)

🔬 विज्ञान Chapter-13: जीव एवं जीवन

Cell • Life Processes • Nutrition • Respiration • Transport • Excretion • Reproduction

📚 Chapter Introduction
जीव एवं जीवन विज्ञान का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। इस अध्याय में जीवों की प्रमुख विशेषताओं, कोशिका की संरचना, पोषण, श्वसन, परिवहन, उत्सर्जन, वृद्धि, प्रजनन तथा अन्य जीवन-प्रक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है। परीक्षा की दृष्टि से कोशिका, जीवन-प्रक्रियाओं और पौधों एवं जंतुओं में होने वाली प्रमुख जैविक प्रक्रियाओं को समझना विशेष रूप से उपयोगी है।

1️⃣ जीव एवं जीवन की अवधारणा

हमारे चारों ओर अनेक प्रकार की वस्तुएँ और जीव पाए जाते हैं। पौधे, जंतु, मनुष्य और सूक्ष्मजीव जीवों के उदाहरण हैं।

जीव वे संगठन हैं जिनमें जीवन से संबंधित आवश्यक प्रक्रियाएँ होती हैं, जैसे पोषण, श्वसन, वृद्धि, उत्सर्जन और प्रजनन।

जीवन: जीवन को केवल एक गुण से नहीं पहचाना जाता। जीवों में अनेक जैविक प्रक्रियाओं का समन्वित रूप से होना जीवन की पहचान में महत्वपूर्ण है।

जीवों का शरीर कोशिकाओं से बना होता है। कुछ जीव एककोशिकीय होते हैं, जबकि अनेक जीव बहुकोशिकीय होते हैं।

2️⃣ जीवों की प्रमुख विशेषताएँ

जीवों में सामान्यतः निम्न प्रमुख विशेषताएँ पाई जाती हैं:

  • पोषण: जीवों को जीवन-क्रियाओं के लिए ऊर्जा और पदार्थ चाहिए।
  • श्वसन: ऊर्जा प्राप्त करने के लिए कोशिकीय प्रक्रियाएँ होती हैं।
  • वृद्धि: जीवों में आकार या जैविक संरचना में वृद्धि हो सकती है।
  • उत्सर्जन: उपापचयी अपशिष्ट पदार्थों को हटाना आवश्यक है।
  • प्रजनन: जीव अपनी जाति की निरंतरता के लिए नए जीव उत्पन्न कर सकते हैं।
  • उत्तेजना के प्रति प्रतिक्रिया: जीव बाहरी परिवर्तनों के प्रति प्रतिक्रिया करते हैं।
  • अनुकूलन: जीव अपने वातावरण के अनुरूप विशेषताएँ विकसित कर सकते हैं।
परीक्षा बिंदु: वृद्धि और प्रजनन जीवन से संबंधित महत्वपूर्ण प्रक्रियाएँ हैं, लेकिन अकेले इनमें से किसी एक को जीवन की पूर्ण पहचान नहीं माना जाता।

3️⃣ कोशिका क्या है?

कोशिका (Cell) जीवों की संरचनात्मक और क्रियात्मक मूल इकाई है। सभी जीवित संगठन एक या अधिक कोशिकाओं से बने होते हैं।

कुछ जीव केवल एक कोशिका से बने होते हैं। इन्हें एककोशिकीय जीव कहते हैं। उदाहरण: अमीबा।

जिन जीवों का शरीर अनेक कोशिकाओं से बना होता है, उन्हें बहुकोशिकीय जीव कहते हैं। उदाहरण: मनुष्य, आम का पेड़ आदि।

महत्वपूर्ण: कोशिका जीवन की मूल संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई है।
कोशिका सिद्धांत: आधुनिक कोशिका सिद्धांत के अनुसार जीवों का शरीर कोशिकाओं से बना होता है और कोशिका जीवन की मूल इकाई है। नई कोशिकाएँ पूर्ववर्ती कोशिकाओं से उत्पन्न होती हैं।

4️⃣ कोशिका की संरचना एवं प्रमुख अंगक

कोशिका के अंदर विभिन्न संरचनाएँ होती हैं जिन्हें कोशिकांग या Cell Organelles कहा जाता है। प्रत्येक कोशिकांग का अपना कार्य होता है।

कोशिकांग मुख्य कार्य
कोशिका झिल्ली कोशिका को घेरती है और पदार्थों के आवागमन को नियंत्रित करती है।
कोशिका भित्ति पादप कोशिका को मजबूती और निश्चित आकार प्रदान करती है।
केंद्रक आनुवंशिक पदार्थ रखता है और कोशिकीय क्रियाओं के नियंत्रण में महत्वपूर्ण है।
माइटोकॉन्ड्रिया कोशिकीय श्वसन और ऊर्जा उत्पादन में प्रमुख भूमिका।
राइबोसोम प्रोटीन संश्लेषण।
हरितलवक प्रकाश संश्लेषण में महत्वपूर्ण।
रिक्तिका जल, लवण तथा अन्य पदार्थों के भंडारण में सहायक।
याद रखें: माइटोकॉन्ड्रिया को सामान्यतः कोशिका का "Powerhouse" कहा जाता है क्योंकि यह कोशिकीय ऊर्जा उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

5️⃣ पादप एवं जंतु कोशिका में अंतर

विशेषता पादप कोशिका जंतु कोशिका
कोशिका भित्ति उपस्थित अनुपस्थित
हरितलवक प्रकाश संश्लेषी कोशिकाओं में उपस्थित अनुपस्थित
रिक्तिका सामान्यतः बड़ी केंद्रीय रिक्तिका छोटी या अस्थायी रिक्तिकाएँ हो सकती हैं
आकार अक्सर अधिक निश्चित अक्सर अपेक्षाकृत लचीला
मुख्य अंतर: पादप कोशिका में कोशिका भित्ति और प्रकाश संश्लेषण के लिए हरितलवक प्रमुख विशेषताएँ हैं।

6️⃣ जीवों में संगठन का स्तर

बहुकोशिकीय जीवों में कोशिकाएँ मिलकर अधिक जटिल संगठन बनाती हैं।

कोशिका → ऊतक → अंग → अंग-तंत्र → जीव
  • कोशिका: जीवन की मूल इकाई।
  • ऊतक: समान कार्य करने वाली कोशिकाओं का समूह।
  • अंग: विभिन्न ऊतकों से बना संरचनात्मक भाग।
  • अंग-तंत्र: मिलकर कार्य करने वाले अंगों का समूह।
उदाहरण: मनुष्य में हृदय एक अंग है और परिसंचरण तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

7️⃣ पोषण क्या है?

जीवों द्वारा भोजन या पोषक पदार्थ प्राप्त करने और उनका उपयोग करने की प्रक्रिया को पोषण (Nutrition) कहा जाता है।

पोषण के प्रमुख प्रकार:

  • स्वपोषी पोषण: जीव स्वयं अपना भोजन बनाते हैं। हरे पौधे इसका प्रमुख उदाहरण हैं।
  • परपोषी पोषण: जीव भोजन के लिए अन्य जीवों या उनसे प्राप्त पदार्थों पर निर्भर होते हैं।
पोषक पदार्थ मुख्य भूमिका
कार्बोहाइड्रेट ऊर्जा का प्रमुख स्रोत
प्रोटीन शरीर की वृद्धि एवं ऊतकों के निर्माण में महत्वपूर्ण
वसा ऊर्जा का स्रोत और ऊर्जा भंडारण
विटामिन शरीर की विभिन्न जैविक क्रियाओं के लिए आवश्यक
खनिज लवण विभिन्न शारीरिक कार्यों के लिए आवश्यक
जल शरीर की अनेक जैविक प्रक्रियाओं में आवश्यक

8️⃣ पादपों में पोषण एवं प्रकाश संश्लेषण

हरे पौधे सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में कार्बन डाइऑक्साइड और जल से कार्बोहाइड्रेट बनाते हैं। इस प्रक्रिया को प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) कहा जाता है।

6CO₂ + 6H₂O → C₆H₁₂O₆ + 6O₂
प्रकाश एवं क्लोरोफिल की उपस्थिति में

प्रकाश संश्लेषण के लिए प्रमुख आवश्यकताएँ:

  • सूर्य का प्रकाश
  • क्लोरोफिल
  • कार्बन डाइऑक्साइड
  • जल
क्लोरोफिल: पौधों के हरितलवक में पाया जाने वाला हरा वर्णक है जो प्रकाश ऊर्जा के अवशोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

9️⃣ जंतुओं में पोषण

मनुष्य जैसे जंतुओं में पोषण मुख्यतः परपोषी प्रकार का होता है। भोजन को ग्रहण करने, पचाने, अवशोषित करने और उपयोग करने की प्रक्रिया में पाचन तंत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

पाचन तंत्र का भाग मुख्य कार्य
मुख भोजन ग्रहण करना और चबाना; लार के साथ पाचन की शुरुआत।
ग्रसनी/ग्रासनली भोजन को पेट तक पहुँचाना।
पेट भोजन के पाचन में महत्वपूर्ण भूमिका।
छोटी आंत पाचन की पूर्णता और पोषक पदार्थों का प्रमुख अवशोषण।
बड़ी आंत जल के अवशोषण और मल निर्माण में महत्वपूर्ण।
यकृत पित्त का निर्माण करता है और चयापचय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
परीक्षा बिंदु: छोटी आंत पोषक पदार्थों के अवशोषण का प्रमुख स्थान है।

🔟 श्वसन

जीवों की कोशिकाओं में भोजन के अणुओं से ऊर्जा प्राप्त करने की प्रक्रिया को कोशिकीय श्वसन (Cellular Respiration) कहा जाता है।

वायवीय श्वसन में ग्लूकोज ऑक्सीजन की उपस्थिति में टूटकर ऊर्जा, कार्बन डाइऑक्साइड और जल उत्पन्न करता है।

C₆H₁₂O₆ + 6O₂ → 6CO₂ + 6H₂O + ऊर्जा

मनुष्य में श्वसन तंत्र के प्रमुख भाग नाक, श्वासनली, ब्रांकाई और फेफड़े हैं। फेफड़ों में गैसों का आदान-प्रदान मुख्यतः वायुकोष्ठिकाओं के क्षेत्र में होता है।

1️⃣1️⃣ वायवीय एवं अवायवीय श्वसन

विशेषता वायवीय श्वसन अवायवीय श्वसन
ऑक्सीजन आवश्यक ऑक्सीजन की आवश्यकता नहीं
ऊर्जा तुलनात्मक रूप से अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है तुलनात्मक रूप से कम ऊर्जा प्राप्त होती है
उत्पाद मुख्यतः CO₂ और H₂O जीव के अनुसार अलग-अलग उत्पाद
उदाहरण: यीस्ट में अवायवीय परिस्थितियों में अल्कोहल और कार्बन डाइऑक्साइड बन सकते हैं। मांसपेशियों में अत्यधिक व्यायाम के दौरान ऑक्सीजन की कमी की स्थिति में लैक्टिक अम्ल बनने की प्रक्रिया से संबंधित अवायवीय श्वसन का उदाहरण दिया जाता है।

1️⃣2️⃣ जीवों में परिवहन

बहुकोशिकीय जीवों में विभिन्न पदार्थों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने के लिए परिवहन तंत्र आवश्यक होता है।

शरीर में परिवहन के प्रमुख कार्य:

  • ऑक्सीजन का परिवहन
  • पोषक पदार्थों का परिवहन
  • हार्मोन का परिवहन
  • अपशिष्ट पदार्थों को उत्सर्जन अंगों तक पहुँचाना
मनुष्य में रक्त परिसंचरण तंत्र पदार्थों के परिवहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

पौधों में भी जल, खनिज और भोजन को विभिन्न भागों तक पहुँचाने के लिए विशेष संवहनी ऊतक पाए जाते हैं।

1️⃣3️⃣ पौधों में परिवहन

पौधों में जल और खनिजों का परिवहन मुख्यतः जाइलम (Xylem) द्वारा होता है, जबकि पत्तियों में बने भोजन का परिवहन फ्लोएम (Phloem) द्वारा होता है।

ऊतक मुख्य कार्य
जाइलम जल और खनिजों का परिवहन
फ्लोएम पत्तियों में बने भोजन का परिवहन

वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) पत्तियों तथा पौधे के अन्य वायवीय भागों से जल के वाष्प के रूप में निकलने की प्रक्रिया है।

वाष्पोत्सर्जन पौधे में जल के ऊपर की ओर परिवहन में सहायक बल उत्पन्न करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

1️⃣4️⃣ जंतुओं में परिवहन एवं रक्त

मनुष्य में हृदय, रक्त और रक्त वाहिकाएँ मिलकर परिसंचरण तंत्र बनाते हैं।

रक्त का घटक मुख्य कार्य
लाल रक्त कणिकाएँ मुख्यतः ऑक्सीजन के परिवहन में सहायक
श्वेत रक्त कणिकाएँ रोग-प्रतिरोध में महत्वपूर्ण
प्लेटलेट्स रक्त का थक्का बनने में सहायक
प्लाज्मा विभिन्न घुलित पदार्थों के परिवहन का माध्यम
हृदय: हृदय एक पेशीय अंग है जो रक्त को शरीर के विभिन्न भागों में पंप करता है।

1️⃣5️⃣ उत्सर्जन

शरीर में उपापचय के दौरान बनने वाले अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने की प्रक्रिया को उत्सर्जन (Excretion) कहा जाता है।

मनुष्य में उत्सर्जन तंत्र के प्रमुख अंगों में वृक्क, मूत्रवाहिनी, मूत्राशय और मूत्रमार्ग शामिल हैं।

अंग मुख्य भूमिका
वृक्क रक्त को छानने और मूत्र निर्माण में प्रमुख भूमिका।
मूत्रवाहिनी मूत्र को वृक्क से मूत्राशय तक पहुँचाती है।
मूत्राशय मूत्र का अस्थायी संग्रह।
मूत्रमार्ग मूत्र को शरीर से बाहर निकालने का मार्ग।
नेफ्रॉन: वृक्क की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई को नेफ्रॉन कहा जाता है।

1️⃣6️⃣ वृद्धि एवं विकास

जीवों में समय के साथ आकार, संरचना और कार्यों में होने वाले क्रमिक परिवर्तनों को वृद्धि और विकास से जोड़ा जाता है।

  • वृद्धि: आकार, द्रव्यमान या कोशिकाओं की संख्या में बढ़ोतरी।
  • विकास: शरीर की संरचना और कार्यों में क्रमिक एवं गुणात्मक परिवर्तन।
  • बहुकोशिकीय जीवों में कोशिका विभाजन वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • कोशिकाओं का विभेदन विभिन्न विशिष्ट कार्यों वाली कोशिकाओं के निर्माण में सहायक होता है।
महत्वपूर्ण: वृद्धि और विकास पर आनुवंशिकता, पोषण, हार्मोन और वातावरण जैसे कई कारकों का प्रभाव पड़ सकता है।

1️⃣7️⃣ प्रजनन

जीवों द्वारा अपनी ही जाति के नए जीव उत्पन्न करने की प्रक्रिया को प्रजनन (Reproduction) कहते हैं। यह जैविक प्रजातियों की निरंतरता के लिए महत्वपूर्ण है।

प्रजनन के दो प्रमुख प्रकार हैं:

प्रकार मुख्य विशेषता
अलैंगिक प्रजनन सामान्यतः एक अभिभावक से; युग्मकों के संलयन की आवश्यकता नहीं होती।
लैंगिक प्रजनन नर और मादा युग्मकों से संबंधित प्रक्रिया; आनुवंशिक विविधता में महत्वपूर्ण।

अलैंगिक प्रजनन के उदाहरण:

  • द्विखंडन — अमीबा
  • मुकुलन — यीस्ट
  • खंडन — कुछ सरल जीव
  • वनस्पतिक प्रवर्धन — कई पौधे
लैंगिक प्रजनन में आनुवंशिक विविधता उत्पन्न होने की संभावना अधिक होती है, जो बदलते वातावरण में प्रजातियों के अनुकूलन में सहायक हो सकती है।

1️⃣8️⃣ अनुकूलन एवं जीवन का संतुलन

किसी जीव की ऐसी संरचनात्मक, शारीरिक या व्यवहार संबंधी विशेषताएँ जो उसे उसके वातावरण में जीवित रहने और प्रजनन में सहायता करती हैं, उन्हें अनुकूलन (Adaptation) कहा जाता है।

जीव/वातावरण अनुकूलन का उदाहरण
रेगिस्तानी पौधे जल की हानि कम करने वाली संरचनाएँ
जलीय पौधे जल में रहने के अनुरूप विशेष संरचनाएँ
ध्रुवीय क्षेत्र के जीव ठंडे वातावरण के अनुरूप विशेष अनुकूलन
पक्षी उड़ान और भोजन प्राप्त करने से संबंधित विभिन्न अनुकूलन
जीवन का संतुलन: जीव अपने वातावरण, अन्य जीवों और उपलब्ध संसाधनों के साथ परस्पर संबंध रखते हैं। इसलिए जीवन को समझने में जीव और पर्यावरण दोनों का अध्ययन आवश्यक है।

1️⃣9️⃣ One Liner Quick Revision

1. कोशिका जीवों की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक मूल इकाई है।

2. अमीबा एककोशिकीय जीव का उदाहरण है।

3. मनुष्य बहुकोशिकीय जीव है।

4. केंद्रक में आनुवंशिक पदार्थ पाया जाता है।

5. माइटोकॉन्ड्रिया कोशिकीय ऊर्जा उत्पादन में महत्वपूर्ण है।

6. राइबोसोम प्रोटीन संश्लेषण से संबंधित है।

7. हरितलवक प्रकाश संश्लेषण में महत्वपूर्ण है।

8. पादप कोशिका में कोशिका भित्ति पाई जाती है।

9. प्रकाश संश्लेषण में CO₂ और जल का उपयोग होता है।

10. क्लोरोफिल प्रकाश ऊर्जा के अवशोषण में महत्वपूर्ण है।

11. कोशिकीय श्वसन से ऊर्जा प्राप्त होती है।

12. वायवीय श्वसन में ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है।

13. जाइलम जल और खनिजों के परिवहन में महत्वपूर्ण है।

14. फ्लोएम भोजन के परिवहन में महत्वपूर्ण है।

15. लाल रक्त कणिकाएँ मुख्यतः ऑक्सीजन के परिवहन में सहायक हैं।

16. श्वेत रक्त कणिकाएँ रोग-प्रतिरोध में महत्वपूर्ण हैं।

17. प्लेटलेट्स रक्त के थक्के बनने में सहायक हैं।

18. नेफ्रॉन वृक्क की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई है।

19. प्रजनन प्रजाति की निरंतरता के लिए महत्वपूर्ण है।

20. अनुकूलन जीवों को उनके वातावरण में जीवित रहने में सहायता करता है।

2️⃣0️⃣ Exam Important Points

⭐ सबसे महत्वपूर्ण तथ्य

  • कोशिका जीवों की मूल संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई है।
  • एककोशिकीय और बहुकोशिकीय जीवों में अंतर याद रखें।
  • केंद्रक, माइटोकॉन्ड्रिया, राइबोसोम, हरितलवक और रिक्तिका के कार्य महत्वपूर्ण हैं।
  • पादप कोशिका में कोशिका भित्ति और हरितलवक प्रमुख विशेषताएँ हैं।
  • पोषण स्वपोषी या परपोषी हो सकता है।
  • हरे पौधे प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन बनाते हैं।
  • प्रकाश संश्लेषण में कार्बन डाइऑक्साइड और जल का उपयोग होता है।
  • श्वसन से जीवों को उपयोगी ऊर्जा प्राप्त होती है।
  • वायवीय श्वसन में ऑक्सीजन का उपयोग होता है।
  • जाइलम जल और खनिजों के परिवहन से संबंधित है।
  • फ्लोएम भोजन के परिवहन से संबंधित है।
  • रक्त परिसंचरण शरीर में पदार्थों के परिवहन के लिए महत्वपूर्ण है।
  • लाल रक्त कणिकाएँ ऑक्सीजन परिवहन में महत्वपूर्ण हैं।
  • वृक्क उत्सर्जन तंत्र का प्रमुख अंग है।
  • नेफ्रॉन वृक्क की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई है।
  • प्रजनन जीवों की जातीय निरंतरता के लिए आवश्यक है।
  • अलैंगिक और लैंगिक प्रजनन में अंतर महत्वपूर्ण है।
  • अनुकूलन जीवों को वातावरण के अनुरूप रहने में सहायता करता है।

🧪 महत्वपूर्ण जैविक समीकरण

6CO₂ + 6H₂O → C₆H₁₂O₆ + 6O₂
प्रकाश एवं क्लोरोफिल की उपस्थिति में

C₆H₁₂O₆ + 6O₂ → 6CO₂ + 6H₂O + ऊर्जा

🎯 Quick Revision Checklist

  • ☑ जीवों की विशेषताएँ
  • ☑ कोशिका की मूल अवधारणा
  • ☑ कोशिकांग और उनके कार्य
  • ☑ पादप एवं जंतु कोशिका
  • ☑ कोशिकीय संगठन
  • ☑ पोषण
  • ☑ प्रकाश संश्लेषण
  • ☑ जंतुओं में पाचन
  • ☑ श्वसन
  • ☑ वायवीय एवं अवायवीय श्वसन
  • ☑ पौधों में परिवहन
  • ☑ रक्त एवं परिसंचरण
  • ☑ उत्सर्जन एवं नेफ्रॉन
  • ☑ वृद्धि एवं विकास
  • ☑ प्रजनन
  • ☑ अनुकूलन

📌 Chapter Summary

जीव एवं जीवन अध्याय में जीवों की प्रमुख विशेषताओं और जीवन की आवश्यक जैविक प्रक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है। कोशिका जीवों की मूल संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई है और विभिन्न कोशिकांग अलग-अलग कार्य करते हैं।

जीवों के लिए पोषण, श्वसन, परिवहन और उत्सर्जन जैसी प्रक्रियाएँ आवश्यक हैं। पौधों में प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन का निर्माण होता है, जबकि जंतुओं में भोजन का पाचन और अवशोषण होता है। श्वसन के द्वारा कोशिकाओं को ऊर्जा प्राप्त होती है।

बहुकोशिकीय जीवों में विभिन्न तंत्र मिलकर जीवन-प्रक्रियाओं को संचालित करते हैं। प्रजनन प्रजाति की निरंतरता और अनुकूलन जीवों को उनके वातावरण में जीवित रहने में सहायता करता है।

📚 Sunil Learning Point: इस Chapter की तैयारी में कोशिकांगों के कार्य, प्रकाश संश्लेषण, श्वसन, जाइलम-फ्लोएम, रक्त के घटक, नेफ्रॉन तथा प्रजनन के प्रकारों को विशेष रूप से दोहराएँ।
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