🔬 विज्ञान Chapter-12: धातु एवं अधातु
Metals & Non-Metals • Properties • Reactions • Extraction • Alloys • Corrosion
धातु एवं अधातु विज्ञान के महत्वपूर्ण विषयों में से एक हैं। इस अध्याय में धातु एवं अधातु के भौतिक और रासायनिक गुण, विभिन्न अभिक्रियाएँ, अभिक्रियाशीलता श्रेणी, आयनिक यौगिक, धातुओं का निष्कर्षण, परिष्करण, मिश्रधातु तथा संक्षारण का अध्ययन किया जाएगा। परीक्षा की दृष्टि से इस अध्याय में गुणों, अभिक्रियाओं और महत्वपूर्ण उदाहरणों पर विशेष ध्यान देना उपयोगी है।
📑 Table of Contents
- धातु एवं अधातु क्या हैं?
- धातुओं के भौतिक गुण
- अधातुओं के भौतिक गुण
- धातु और अधातु में अंतर
- धातुओं की अभिक्रियाशीलता
- धातु एवं ऑक्सीजन की अभिक्रिया
- धातु एवं जल की अभिक्रिया
- धातु एवं अम्ल की अभिक्रिया
- धातु एवं लवण विलयन की अभिक्रिया
- अभिक्रियाशीलता श्रेणी
- आयनिक यौगिक
- धातुओं का निष्कर्षण
- अयस्क एवं धातुकर्म
- धातुओं का परिष्करण
- संक्षारण एवं रोकथाम
- मिश्रधातु
- अधातुओं के उपयोग
- धातुओं के दैनिक जीवन में उपयोग
- One Liner Quick Revision
- Exam Important Points
1️⃣ धातु एवं अधातु क्या हैं?
वे तत्व जिनमें सामान्यतः चमक, तन्यता, आघातवर्धनीयता और ऊष्मा एवं विद्युत के अच्छे चालक होने जैसे गुण पाए जाते हैं, धातु (Metals) कहलाते हैं।
उदाहरण: लोहा (Fe), तांबा (Cu), एल्युमिनियम (Al), सोडियम (Na), जस्ता (Zn), चाँदी (Ag), सोना (Au) आदि।
जिन तत्वों में सामान्यतः धातुओं के विपरीत गुण पाए जाते हैं, उन्हें अधातु (Non-Metals) कहा जाता है।
उदाहरण: ऑक्सीजन (O), नाइट्रोजन (N), कार्बन (C), सल्फर (S), फॉस्फोरस (P), क्लोरीन (Cl) आदि।
2️⃣ धातुओं के भौतिक गुण
धातुओं के प्रमुख भौतिक गुण निम्नलिखित हैं:
- चमकीले: अधिकांश धातुओं की सतह चमकीली होती है।
- तन्य: धातुओं को तार के रूप में खींचा जा सकता है।
- आघातवर्धनीय: धातुओं को पीटकर पतली चादर बनाई जा सकती है।
- सुचालक: धातुएँ ऊष्मा और विद्युत की अच्छी चालक होती हैं।
- ध्वन्यात्मक: चोट करने पर अधिकांश धातुएँ ध्वनि उत्पन्न करती हैं।
- अधिकांश धातुएँ सामान्य ताप पर ठोस होती हैं।
तांबा और एल्युमिनियम विद्युत के अच्छे चालक हैं, इसलिए विद्युत तारों में इनका उपयोग किया जाता है।
3️⃣ अधातुओं के भौतिक गुण
अधातुओं के सामान्य भौतिक गुण:
- अधिकांश अधातुओं में धातुओं जैसी चमक नहीं होती।
- अधिकांश अधातु भंगुर होते हैं।
- अधिकांश अधातु ऊष्मा और विद्युत के कुचालक होते हैं।
- अधातु ठोस, द्रव या गैस किसी भी अवस्था में पाए जा सकते हैं।
- अधिकांश अधातु ध्वन्यात्मक नहीं होते।
4️⃣ धातु और अधातु में अंतर
| गुण | धातु | अधातु |
|---|---|---|
| चमक | सामान्यतः चमकीले | सामान्यतः चमकीले नहीं |
| तन्यता | सामान्यतः तन्य | सामान्यतः तन्य नहीं |
| आघातवर्धनीयता | सामान्यतः होती है | सामान्यतः नहीं होती |
| विद्युत चालकता | अच्छे चालक | अधिकांश कुचालक |
| ध्वन्यात्मकता | सामान्यतः होती है | सामान्यतः नहीं होती |
| अवस्था | अधिकांश ठोस | ठोस, द्रव या गैस |
5️⃣ धातुओं की अभिक्रियाशीलता
विभिन्न धातुएँ रासायनिक अभिक्रियाओं में अलग-अलग मात्रा में सक्रियता दिखाती हैं। कुछ धातुएँ बहुत अधिक अभिक्रियाशील होती हैं, जबकि कुछ धातुएँ बहुत कम अभिक्रियाशील होती हैं।
- सोडियम और पोटैशियम अत्यधिक अभिक्रियाशील धातुओं में आते हैं।
- मैग्नीशियम, जस्ता और लोहा मध्यम अभिक्रियाशीलता दिखाते हैं।
- तांबा, चाँदी और सोना अपेक्षाकृत कम अभिक्रियाशील हैं।
6️⃣ धातु एवं ऑक्सीजन की अभिक्रिया
अनेक धातुएँ ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके धातु ऑक्साइड बनाती हैं।
4Na + O₂ → 2Na₂O
धातु ऑक्साइड सामान्यतः क्षारीय प्रकृति के होते हैं, हालांकि कुछ धातु ऑक्साइड उभयधर्मी भी हो सकते हैं।
7️⃣ धातु एवं जल की अभिक्रिया
विभिन्न धातुएँ जल के साथ अलग-अलग प्रकार से अभिक्रिया करती हैं। बहुत अधिक अभिक्रियाशील धातुएँ जल के साथ तेजी से अभिक्रिया कर सकती हैं, जबकि कुछ धातुएँ जल के साथ सामान्य परिस्थितियों में आसानी से अभिक्रिया नहीं करतीं।
- सोडियम और पोटैशियम जल के साथ बहुत तीव्र अभिक्रिया करते हैं।
- कैल्शियम जल के साथ अभिक्रिया करता है।
- मैग्नीशियम गर्म जल या भाप के साथ अधिक आसानी से अभिक्रिया करता है।
- लोहा सामान्य ठंडे जल के साथ तेजी से अभिक्रिया नहीं करता।
8️⃣ धातु एवं अम्ल की अभिक्रिया
कई धातुएँ तनु अम्लों के साथ अभिक्रिया करके लवण और हाइड्रोजन गैस बनाती हैं।
इस प्रकार की अभिक्रिया में हाइड्रोजन गैस की उपस्थिति को उपयुक्त वैज्ञानिक परीक्षण द्वारा पहचाना जा सकता है।
9️⃣ धातु एवं लवण विलयन की अभिक्रिया
अधिक अभिक्रियाशील धातु किसी कम अभिक्रियाशील धातु को उसके लवण के विलयन से विस्थापित कर सकती है।
यहाँ लोहा, तांबे की अपेक्षा अधिक अभिक्रियाशील होने के कारण कॉपर सल्फेट से तांबे को विस्थापित करता है।
🔟 अभिक्रियाशीलता श्रेणी
धातुओं को उनकी अभिक्रियाशीलता के घटते क्रम में व्यवस्थित करने पर अभिक्रियाशीलता श्रेणी (Reactivity Series) प्राप्त होती है।
यह विद्यालय-स्तर पर सामान्यतः पढ़ाई जाने वाली अभिक्रियाशीलता श्रेणी है। इसमें हाइड्रोजन धातु नहीं है, लेकिन अम्लों से धातुओं की अभिक्रिया को समझने के लिए इसे श्रेणी में संदर्भ के रूप में रखा जाता है।
- ऊपर की धातुएँ अधिक अभिक्रियाशील होती हैं।
- नीचे की धातुएँ अपेक्षाकृत कम अभिक्रियाशील होती हैं।
- अधिक अभिक्रियाशील धातु कम अभिक्रियाशील धातु को उसके लवण से विस्थापित कर सकती है।
1️⃣1️⃣ आयनिक यौगिक
धातु और अधातु के बीच इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण से बनने वाले यौगिकों को सामान्यतः आयनिक यौगिक कहा जाता है।
धातु सामान्यतः इलेक्ट्रॉन खोकर धनायन बनाती है और अधातु इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन बनाती है। इन विपरीत आवेशित आयनों के बीच आकर्षण से आयनिक यौगिक बनते हैं।
| गुण | आयनिक यौगिक |
|---|---|
| अवस्था | सामान्यतः ठोस और क्रिस्टलीय |
| गलनांक | सामान्यतः उच्च |
| क्वथनांक | सामान्यतः उच्च |
| विद्युत चालकता | पिघली हुई या जलीय अवस्था में चालक |
1️⃣2️⃣ धातुओं का निष्कर्षण
पृथ्वी की पर्पटी से अयस्कों या खनिजों से उपयोगी धातु प्राप्त करने की प्रक्रिया को धातु का निष्कर्षण (Extraction) कहा जाता है।
निष्कर्षण की सामान्य प्रक्रिया में निम्न चरण हो सकते हैं:
- अयस्क की पहचान और प्राप्ति
- अयस्क का सांद्रण
- उचित रासायनिक प्रक्रिया द्वारा धातु यौगिक प्राप्त करना
- अपचयन द्वारा धातु प्राप्त करना
- धातु का परिष्करण
1️⃣3️⃣ अयस्क एवं धातुकर्म
वे खनिज जिनसे धातु को आर्थिक रूप से उपयोगी मात्रा में प्राप्त किया जा सकता है, अयस्क (Ore) कहलाते हैं।
अयस्क से धातु प्राप्त करने तथा उसे उपयोग योग्य बनाने से संबंधित प्रक्रियाओं के अध्ययन को धातुकर्म (Metallurgy) कहा जाता है।
| धातु की प्रकृति | सामान्य निष्कर्षण विचार |
|---|---|
| कम अभिक्रियाशील धातुएँ | कुछ धातुएँ प्रकृति में मुक्त अवस्था में मिल सकती हैं |
| मध्यम अभिक्रियाशील धातुएँ | अक्सर यौगिकों से रासायनिक अपचयन द्वारा प्राप्त की जाती हैं |
| अधिक अभिक्रियाशील धातुएँ | अक्सर विद्युत अपघटन जैसी विधियों की आवश्यकता होती है |
1️⃣4️⃣ धातुओं का परिष्करण
निष्कर्षण के बाद प्राप्त धातु में अशुद्धियाँ हो सकती हैं। अशुद्धियों को हटाकर अधिक शुद्ध धातु प्राप्त करने की प्रक्रिया को परिष्करण (Refining) कहा जाता है।
धातु के अनुसार अलग-अलग परिष्करण विधियाँ प्रयोग की जा सकती हैं।
1️⃣5️⃣ संक्षारण एवं रोकथाम
वातावरण के प्रभाव से धातु की सतह का धीरे-धीरे खराब होना संक्षारण (Corrosion) कहलाता है।
लोहे पर नमी और ऑक्सीजन की उपस्थिति में बनने वाली लाल-भूरी परत को सामान्यतः जंग (Rust) कहा जाता है।
संक्षारण को रोकने के कुछ सामान्य उपाय:
- पेंट करना
- तेल या ग्रीस लगाना
- गैल्वनीकरण
- मिश्रधातु बनाना
- धातु की सतह को उपयुक्त सुरक्षात्मक परत से ढकना
1️⃣6️⃣ मिश्रधातु
दो या दो से अधिक तत्वों के मिश्रण से बनी ऐसी सामग्री जिसमें कम से कम एक घटक धातु हो और जिसके गुण उपयोगी हों, उसे मिश्रधातु (Alloy) कहा जाता है।
| मिश्रधातु | मुख्य घटक | सामान्य उपयोग |
|---|---|---|
| पीतल (Brass) | तांबा + जस्ता | सजावटी वस्तुएँ, उपकरण आदि |
| कांसा (Bronze) | तांबा + टिन | मूर्तियाँ, पदक आदि |
| स्टेनलेस स्टील | लोहा + क्रोमियम + निकेल आदि | बर्तन, उपकरण आदि |
| सोल्डर | परंपरागत रूप से सीसा + टिन | सोल्डरिंग में उपयोग |
1️⃣7️⃣ अधातुओं के उपयोग
अधातु हमारे दैनिक जीवन और उद्योगों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
| अधातु | प्रमुख उपयोग |
|---|---|
| ऑक्सीजन | श्वसन, चिकित्सा और विभिन्न औद्योगिक प्रक्रियाएँ |
| नाइट्रोजन | उर्वरक निर्माण और अन्य औद्योगिक उपयोग |
| क्लोरीन | जल शोधन और विभिन्न रासायनिक उद्योग |
| सल्फर | सल्फ्यूरिक अम्ल और विभिन्न औद्योगिक उत्पाद |
| कार्बन | ईंधन, ग्रेफाइट, कार्बन-आधारित पदार्थ आदि |
| फॉस्फोरस | उर्वरक एवं विभिन्न रासायनिक उत्पाद |
1️⃣8️⃣ धातुओं के दैनिक जीवन में उपयोग
धातुओं के भौतिक और रासायनिक गुणों के कारण उनका उपयोग घर, परिवहन, निर्माण, विद्युत, उद्योग और तकनीक में व्यापक रूप से किया जाता है।
| धातु | प्रमुख उपयोग | मुख्य कारण |
|---|---|---|
| लोहा | निर्माण, मशीनें, औजार | मजबूती |
| तांबा | विद्युत तार | अच्छी विद्युत चालकता |
| एल्युमिनियम | बर्तन, विमान, पैकेजिंग | हल्का और उपयोगी धातु |
| सोना | आभूषण एवं इलेक्ट्रॉनिक्स में उपयोग | कम अभिक्रियाशीलता और अन्य उपयोगी गुण |
| चाँदी | आभूषण एवं कुछ तकनीकी उपयोग | अच्छी विद्युत चालकता |
| जस्ता | गैल्वनीकरण और मिश्रधातु | संक्षारण से सुरक्षा में उपयोगी |
1️⃣9️⃣ One Liner Quick Revision
1. धातु सामान्यतः ऊष्मा और विद्युत की अच्छी चालक होती हैं।
2. धातुओं को तार में खींचने के गुण को तन्यता कहते हैं।
3. धातुओं को पीटकर पतली चादर बनाने के गुण को आघातवर्धनीयता कहते हैं।
4. पारा सामान्य ताप पर द्रव धातु है।
5. ग्रेफाइट विद्युत का चालक अधातु है।
6. धातु ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके सामान्यतः धातु ऑक्साइड बनाती हैं।
7. धातु और तनु अम्ल की कई अभिक्रियाओं में हाइड्रोजन गैस बनती है।
8. अधिक अभिक्रियाशील धातु कम अभिक्रियाशील धातु को उसके लवण से विस्थापित कर सकती है।
9. अभिक्रियाशीलता श्रेणी धातुओं को अभिक्रियाशीलता के क्रम में व्यवस्थित करती है।
10. आयनिक यौगिकों के गलनांक सामान्यतः उच्च होते हैं।
11. आयनिक यौगिक पिघली या जलीय अवस्था में विद्युत का संचालन कर सकते हैं।
12. अयस्क से धातु प्राप्त करने की प्रक्रिया धातु निष्कर्षण कहलाती है।
13. धातु की शुद्धता बढ़ाने की प्रक्रिया परिष्करण कहलाती है।
14. लोहे पर बनने वाली लाल-भूरी परत को सामान्यतः जंग कहते हैं।
15. गैल्वनीकरण में लोहे पर जस्ता की सुरक्षात्मक परत चढ़ाई जाती है।
16. पीतल तांबा और जस्ता की प्रमुख मिश्रधातु है।
17. कांसा तांबा और टिन की मिश्रधातु है।
18. स्टेनलेस स्टील में मुख्यतः लोहा, क्रोमियम और निकेल जैसे घटक होते हैं।
19. Zn + 2HCl → ZnCl₂ + H₂ एक धातु-अम्ल अभिक्रिया का उदाहरण है।
20. Fe + CuSO₄ → FeSO₄ + Cu विस्थापन अभिक्रिया का उदाहरण है।
2️⃣0️⃣ Exam Important Points
⭐ सबसे महत्वपूर्ण तथ्य
- धातुओं के प्रमुख गुण—चमक, तन्यता, आघातवर्धनीयता और चालकता।
- अधातुओं के सामान्य गुण धातुओं से भिन्न होते हैं।
- पारा द्रव धातु का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
- ग्रेफाइट विद्युत का चालक अधातु है।
- धातु + ऑक्सीजन → धातु ऑक्साइड।
- धातु + अम्ल → लवण + हाइड्रोजन, कई सामान्य मामलों में।
- अधिक अभिक्रियाशील धातु कम अभिक्रियाशील धातु को विस्थापित कर सकती है।
- अभिक्रियाशीलता श्रेणी को क्रम से याद करना परीक्षा के लिए उपयोगी है।
- आयनिक यौगिकों में धनायन और ऋणायन होते हैं।
- आयनिक यौगिक सामान्यतः उच्च गलनांक और क्वथनांक वाले होते हैं।
- अयस्क धातु प्राप्त करने का महत्वपूर्ण स्रोत होता है।
- धातुकर्म में अयस्क से उपयोगी धातु प्राप्त करने की प्रक्रियाएँ शामिल होती हैं।
- परिष्करण से धातु की शुद्धता बढ़ाई जाती है।
- संक्षारण धातु की सतह के वातावरणीय प्रभाव से खराब होने की प्रक्रिया है।
- पेंटिंग, तेल लगाना और गैल्वनीकरण संक्षारण रोकने के सामान्य उपाय हैं।
- मिश्रधातु में एक या अधिक धात्विक घटक हो सकते हैं और इनके गुण उपयोग के अनुसार उपयोगी बनाए जाते हैं।
🧪 महत्वपूर्ण रासायनिक समीकरण
4Na + O₂ → 2Na₂O
2Na + 2H₂O → 2NaOH + H₂
Zn + 2HCl → ZnCl₂ + H₂
Fe + CuSO₄ → FeSO₄ + Cu
🎯 Quick Revision Checklist
- ☑ धातुओं के भौतिक गुण
- ☑ अधातुओं के भौतिक गुण
- ☑ धातु-अधातु अंतर
- ☑ ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया
- ☑ जल के साथ अभिक्रिया
- ☑ अम्ल के साथ अभिक्रिया
- ☑ लवण विलयन के साथ अभिक्रिया
- ☑ अभिक्रियाशीलता श्रेणी
- ☑ आयनिक यौगिक
- ☑ धातु निष्कर्षण और धातुकर्म
- ☑ परिष्करण
- ☑ संक्षारण और रोकथाम
- ☑ मिश्रधातुएँ
- ☑ दैनिक जीवन में धातु-अधातु के उपयोग
📌 Chapter Summary
धातु एवं अधातु हमारे दैनिक जीवन और औद्योगिक गतिविधियों में अत्यंत महत्वपूर्ण तत्व हैं। धातुओं में सामान्यतः चमक, तन्यता, आघातवर्धनीयता और विद्युत एवं ऊष्मा की चालकता जैसे गुण पाए जाते हैं, जबकि अधातुओं में सामान्यतः इनके विपरीत गुण पाए जाते हैं।
धातुओं की अभिक्रियाशीलता अलग-अलग होती है और इसी आधार पर उन्हें अभिक्रियाशीलता श्रेणी में व्यवस्थित किया जाता है। धातुएँ ऑक्सीजन, जल, अम्ल और लवण विलयनों के साथ विभिन्न प्रकार की अभिक्रियाएँ कर सकती हैं।
धातुओं का निष्कर्षण, धातुकर्म, परिष्करण, संक्षारण तथा मिश्रधातुओं का अध्ययन इस अध्याय के महत्वपूर्ण भाग हैं। परीक्षा की तैयारी के लिए गुणों के साथ-साथ महत्वपूर्ण रासायनिक समीकरण और अभिक्रियाशीलता श्रेणी को भी दोहराना चाहिए।

Do not spam here. All the comments are reviewed by admin.