अध्याय 9: किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र (Ray Optics)
प्रकाश का परावर्तन, गोलीय दर्पण, दर्पण सूत्र तथा प्रकाश का अपवर्तन
1. प्रकाश का परावर्तन (Reflection of Light)
जब प्रकाश किरण किसी पॉलिशदार या चिकने पृष्ठ से टकराकर वापस उसी माध्यम में लौट आती है, तो इसे प्रकाश का परावर्तन कहते हैं।
परावर्तन के नियम:
1. आपतन कोण ($\angle i$), परावर्तन कोण ($\angle r$) के सदैव बराबर होता है (i = r)।
2. आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा आपतन बिंदु पर अभिलंब तीनों एक ही तल में होते हैं।
2. गोलीय दर्पण (Spherical Mirrors)
वे दर्पण जिनका परावर्तक पृष्ठ गोलीय होता है, गोलीय दर्पण कहलाते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं:
• अवतल दर्पण (Concave Mirror): जिसका परावर्तक पृष्ठ अंदर की ओर धंसा होता है।
• उत्तल दर्पण (Convex Mirror): जिसका परावर्तक पृष्ठ बाहर की ओर उभरा होता है।
फोकस दूरी और वक्रता त्रिज्या में संबंध: f = R2
3. दर्पण सूत्र (Mirror Formula)
गोलीय दर्पण के लिए वस्तु की दूरी (u), प्रतिबिंब की दूरी (v) और फोकस दूरी (f) के बीच का संबंध दर्पण सूत्र कहलाता है:
रैखिक आवर्धन (m): m = h'h = - vu
4. प्रकाश का अपवर्तन (Refraction of Light)
जब प्रकाश किरण एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम में प्रवेश करती है, तो वह दोनों माध्यमों को अलग करने वाले पृष्ठ पर अपने मार्ग से विचलित हो जाती है। इसे अपवर्तन कहते हैं。
स्नेल का नियम: आपतन कोण की ज्या ($\sin i$) तथा अपवर्तन कोण की ज्या ($\sin r$) का अनुपात एक नियतांक होता है:
5. पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection - TIR)
जब प्रकाश सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाता है और आपतन कोण का मान क्रांतिक कोण (C) से अधिक हो जाता है, तो प्रकाश का अपवर्तन न होकर वह संपूर्ण प्रकाश परावर्तित होकर वापस सघन माध्यम में ही लौट आता है। इस घटना को पूर्ण आंतरिक परावर्तन कहते हैं।
संबंध: n = 1sin C
प्रमुख उपयोग:
• ऑप्टिकल फाइबर (Optical Fibers) द्वारा सिग्नल भेजने में।
• हीरे का अत्यधिक चमकना।
• रेगिस्तान में मरीचिका (Mirage) का बनना।
6. लेंस (Lenses) तथा लेंस सूत्र (Lens Formula)
दो गोलीय पृष्ठों या एक समतल व एक गोलीय पृष्ठ से घिरे पारदर्शी माध्यम को लेंस कहते हैं (उत्तल और अवतल लेंस)।
लेंस सूत्र: वस्तु की दूरी (u), प्रतिबिंब की दूरी (v) तथा फोकस दूरी (f) में संबंध:
7. लेंस मेकर सूत्र (Lens Maker's Formula)
यह सूत्र लेंस के अपवर्तनांक (n), दोनों पृष्ठों की वक्रता त्रिज्याओं (R1, R2) और उसकी फोकस दूरी (f) को आपस में जोड़ता है:
8. संपर्क में रखे पतले लेंसों का संयोजन (Combination of Lenses)
यदि कई पतले लेंस (जिनकी फोकस दूरियाँ f1, f2, f3... हैं) संपर्क में रखे हों, तो संयुक्त लेंस की तुल्य फोकस दूरी (F) और संयुक्त क्षमता (P) निम्न प्रकार दी जाती है:
9. प्रिज्म द्वारा प्रकाश का अपवर्तन तथा विचलन (Refraction through a Prism)
जब कोई प्रकाश किरण किसी प्रिज्म के एक पृष्ठ पर आपतिक होती है, तो अपवर्तन के पश्चात वह आधार की ओर झुक जाती है। आपतित किरण और निर्गत किरण के बीच बने कोण को विचलन कोण (δ) कहते हैं।
प्रिज्म के पदार्थ का अपवर्तनांक (n) ज्ञात करने का सूत्र:
(जहाँ A प्रिज्म का कोण तथा δm अल्पतम विचलन कोण है)
10. प्रकाश का प्रकीर्णन (Scattering of Light)
जब प्रकाश किसी ऐसे माध्यम (जैसे धूल के कण, वायु के अणु आदि) से गुजरता है, जिसके कणों का आकार प्रकाश की तरंगदैर्ध्य की कोटि का होता है, तो प्रकाश सभी दिशाओं में फैल जाता है। इसे प्रकाश का प्रकीर्णन कहते हैं।
• रेले के प्रकीर्णन नियमानुसार, प्रकीर्णित प्रकाश की तीव्रता तरंगदैर्ध्य की चतुर्थ घात के व्युत्क्रमानुपाती होती है (I ∝ 1λ4)।
• इसी कारण आकाश का रंग नीला दिखाई देता है और खतरे के सिग्नल लाल रंग के होते हैं।
11. प्रकाशिक यंत्र: सूक्ष्मदर्शी तथा खगोलीय दूरदर्शी (Optical Instruments)
(क) सरल व संयुक्त सूक्ष्मदर्शी (Microscope): यह सूक्ष्म वस्तुओं का बड़ा आवर्धित प्रतिबिंब बनाने के काम आता है। संयुक्त सूक्ष्मदर्शी में दो उत्तल लेंस (अभिदृश्यक और नेत्रलेंस) होते हैं।
(ख) खगोलीय दूरदर्शी (Astronomical Telescope): इसका उपयोग बहुत दूर स्थित आकाशीय पिंडों (जैसे तारे, ग्रह आदि) को देखने के लिए किया जाता है। इसमें अभिदृश्यक लेंस की फोकस दूरी और द्वारक, नेत्रलेंस की तुलना में बहुत अधिक होते हैं।

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