1. वैद्युत आवेश (Electric Charge) व उसके गुण
वैद्युत आवेश किसी पदार्थ का वह आंतरिक गुण है जिसके कारण वह वस्तुओं पर विद्युत तथा चुंबकीय बल का अनुभव करता है अथवा उत्पन्न करता है।
- प्रकार: आवेश दो प्रकार के होते हैं— धनात्मक (+) और ऋणात्मक (-)। सजातीय आवेश प्रतिकर्षित व विजातीय आवेश आकर्षित करते हैं।
- आवेश का क्वांटीकरण: किसी भी वस्तु पर कुल आवेश हमेशा एक निश्चित न्यूनतम मूल आवेश (e) का पूर्ण गुणज होता है।
(जहाँ n पूर्णांक है तथा e = 1.6 × 10-19 कूलॉम इलेक्ट्रॉन पर आवेश है।)
2. आवेश का संरक्षण (Conservation of Charge)
इस नियम के अनुसार, "आवेश को न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है; इसे केवल एक वस्तु से दूसरी वस्तु में स्थानांतरित किया जा सकता है।" किसी विलगित निकाय का कुल आवेश हमेशा नियत रहता है।
3. कूलाम का नियम (Coulomb's Law)
किन्हीं दो स्थिर बिंदु आवेशों के बीच कार्य करने वाला आकर्षण या प्रतिकर्षण बल दोनों आवेशों के परिमाणों के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
(जहाँ 14πε0 = 9 × 109 N·m2/C2 तथा ε0 निर्वात की विद्युतशीलता है।)
4. अध्यारोपण का सिद्धांत (Principle of Superposition)
यदि किसी निकाय में अनेक स्थिर आवेश उपस्थित हों, तो किसी एक आवेश पर अन्य सभी आवेशों के कारण लगने वाला कुल परिणामी बल, प्रत्येक आवेश द्वारा अकेले लगाए जाने वाले बलों के सदिश योग के बराबर होता है।
5. वैद्युत क्षेत्र तथा वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता (Electric Field & Intensity)
किसी आवेश के चारों ओर का वह क्षेत्र जहाँ तक उसका प्रभाव रहता है, वैद्युत क्षेत्र कहलाता है। वैद्युत क्षेत्र में किसी बिंदु पर रखे परीक्षण आवेश q0 पर लगने वाले बल F तथा परीक्षण आवेश के मान के अनुपात को उस बिंदु पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता (E) कहते हैं।
(मात्रक: न्यूटन प्रति कूलॉम N/C या वोल्ट/मीटर V/m | विमा: [MLT-3A-1])
वैद्युत क्षेत्र रेखाएँ (Electric Field Lines): ये वे काल्पनिक निष्कंटक वक्र हैं जो वैद्युत क्षेत्र की दिशा को प्रदर्शित करती हैं। ये हमेशा धन आवेश से निकलकर ऋण आवेश पर समाप्त होती हैं और कभी भी एक-दूसरे को नहीं काटती हैं।
6. वैद्युत द्विध्रुव तथा वैद्युत द्विध्रुव आघूर्ण (Electric Dipole & Dipole Moment)
वैद्युत द्विध्रुव: वह निकाय जिसमें दो बराबर तथा विपरीत बिंदु आवेश एक-दूसरे से बहुत अल्प दूरी पर स्थित होते हैं, वैद्युत द्विध्रुव कहलाता है (जैसे- HCl, H2O आदि)।
वैद्युत द्विध्रुव आघूर्ण (p): द्विध्रुव के किसी एक आवेश के परिमाण तथा दोनों आवेशों के बीच की अल्प दूरी (2l) के गुणनफल को वैद्युत द्विध्रुव आघूर्ण कहते हैं।
(यह एक सदिश राशि है जिसकी दिशा ऋण आवेश से धन आवेश की ओर होती है। इसका मात्रक कूलॉम·मीटर C·m है।)
7. एकसमान बाह्य वैद्युत क्षेत्र में द्विध्रुव पर बल आघूर्ण (Torque on Dipole)
जब किसी वैद्युत द्विध्रुव को एकसमान बाह्य वैद्युत क्षेत्र E में क्षेत्र की दिशा से θ कोण पर रखा जाता है, तो उस पर एक प्रत्यानयन बल आघूर्ण कार्य करने लगता है जो द्विध्रुव को क्षेत्र की दिशा में लाने का प्रयास करता है।
विशेष स्थितियाँ:
1. यदि θ = 0° हो, तो τ = 0 (स्थायी संतुलन की स्थिति)।
2. यदि θ = 90° हो, तो τmax = p E (अधिकतम बल आघूर्ण)।
8. गाउस की प्रमेय (Gauss's Theorem)
किसी बंद पृष्ठ से गुजरने वाला कुल वैद्युत फ्लक्स (φE) उस पृष्ठ द्वारा परिबद्ध कुल आवेश (q) का 1ε0 गुना होता है।
9. अनुप्रयोग 1: अनंत लंबाई के सीधे आवेशित तार के निकट तीव्रता
यदि किसी अनंत लंबाई के सीधे रेखीय चालक पर रैखिक आवेश घनत्व λ हो, तो उससे r दूरी पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता:
10. अनुप्रयोग 2: समतल आवेशित चादर के निकट तीव्रता
यदि किसी पतली समतल आवेशित चादर का पृष्ठीय आवेश घनत्व σ हो, तो उसके निकट किसी बिंदु पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता दूरी पर निर्भर नहीं करती है:
11. अनुप्रयोग 3: गोलीय कोश (Spherical Shell) के कारण तीव्रता
R त्रिज्या के आवेशित गोलीय कोश के केंद्र से r दूरी पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता:
1. गोले के बाहर (r > R): E = 14πε0 × qr2
2. गोले के पृष्ठ पर (r = R): E = 14πε0 × qR2
3. गोले के अंदर (r < R): E = 0 (खोखले गोले के अंदर वैद्युत क्षेत्र शून्य होता है)।
गाउस की प्रमेय और इसके तीनों अनुप्रयोग (अनंत तार, समतल चादर, गोलीय कोश) बोर्ड परीक्षा के दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों (Long Answer Questions) में सबसे ज्यादा बार पूछे जाते हैं। इनका अच्छे से अभ्यास करें।

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